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NASA Telescope Mission: स्विफ्ट टेलीस्कोप बचाने गया लिंक स्पेसक्राफ्ट वायुमंडल में नष्ट, नासा का करीब 250 करोड़ का मिशन अधूरा

26 सितंबर 2026
NASA Telescope Mission
NASA Telescope Mission

NASA Telescope Mission: नासा के 22 वर्ष पुराने स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को ऊंची कक्षा में ले जाने वाला निजी अंतरिक्ष यान लिंक अपना काम पूरा नहीं कर सका। करीब तीन महीने पहले छूटा लिंक शुक्रवार को धरती के वायुमंडल में लौटकर नष्ट हो गया। मिशन पर करीब 3 करोड़ डॉलर यानी लगभग 250 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।

कैटेलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज ने यह यान स्विफ्ट तक पहुंचाकर रोबोटिक भुजाओं से पकड़ने और सुरक्षित कक्षा में ले जाने के लिए भेजा था। लॉन्च के बाद इलेक्ट्रॉनिक खराबियां शुरू हुईं। ईंधन भी इतना नहीं बचा कि कक्षा बदली जा सके। अगस्त में बचाव प्रयास आधिकारिक रूप से बंद कर दिया गया।

अब स्विफ्ट अकेला रह गया है। नासा के अनुसार उसकी कक्षा नीचे आ रही है और नवंबर की शुरुआत में वायुमंडल में प्रवेश की उम्मीद है। फिलहाल वह फिर निगरानी कर रहा है, लेकिन समय सीमित है।

लिंक स्पेसक्राफ्ट स्विफ्ट तक क्यों भेजा गया था?

स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी 2004 में लॉन्च हुआ था। करीब 36.4 करोड़ डॉलर यानी लगभग 3500 करोड़ रुपये की लागत से बना यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड की तेज और शक्तिशाली घटनाओं को देखने के लिए है। यह तेजी से दिशा बदल सकता है तथा गामा रे विस्फोट, तारों के फटने और अचानक होने वाली घटनाओं को रिकॉर्ड करता है।

इस क्षमता के कारण स्विफ्ट दूसरे टेलीस्कोप के लिए पहले चेतावनी देने वाले यंत्र जैसी भूमिका निभाता है। किसी घटना का पता लगते ही वह अन्य वेधशालाओं को उसी दिशा में देखने का संकेत दे सकता है। सूर्य के तेज फ्लेयर्स के कारण उसकी कक्षा उम्मीद से ज्यादा तेजी से नीचे आने लगी। वायुमंडल में गिरने का खतरा बढ़ा तो नासा ने इस साल की शुरुआत में वैज्ञानिक गतिविधियां रोक दीं।

स्थिति इस तरह बदली गई कि वायुमंडलीय खिंचाव कम हो। ऐसा न होता तो मदद पहुंचने से पहले ही स्विफ्ट गिर सकता था। इसी खतरे को देखते हुए कैटेलिस्ट ने लिंक तैयार किया। यान 3 जुलाई को लॉन्च हुआ। योजना थी स्विफ्ट को पकड़कर ऊंची और अधिक टिकाऊ कक्षा में ले जाना। लिंक एक साल से भी कम समय में बनाया गया था।

मिशन तकनीकी रूप से कहां अटका?

लॉन्च के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक दिक्कतें शुरू हो गईं। स्विफ्ट को सही दिशा में घुमाने के लिए जरूरी तीन रिएक्शन व्हील में से दो खराब हो गए। फिर एक खराब वाल्व की वजह से लिंक तेजी से घूमने लगा। संचार भी प्रभावित हुआ।

इंजीनियरों ने बाद में नियंत्रण हासिल कर लिया, लेकिन तब तक काफी ईंधन खर्च हो चुका था। स्विफ्ट को उठाकर कक्षा बदलने जितना ईंधन नहीं बचा। इसलिए अगस्त में बचाव प्रयास आधिकारिक तौर पर रोक दिया गया। शुक्रवार को लिंक वायुमंडल में प्रवेश कर नष्ट हो गया। तीन रोबोटिक भुजाएं उसके पास थीं, लेकिन मुख्य लक्ष्य अधूरा रह गया।

केप कैनावेरल से जुड़ी इस खबर में साफ है कि महत्वाकांक्षी योजना समय की कमी और यान की खराबी दोनों से जूझी। निजी कंपनी ने कम अवधि में यान बनाया था। अंतरिक्ष में पहुंचते ही सिस्टम साथ नहीं दिए। नियंत्रण वापस मिला, काम पूरा करने लायक संसाधन नहीं बचे।

असफल मिशन में कौन सी सफलता मिली?

बचाव बंद होने के बाद टीम ने बचे समय का उपयोग परीक्षणों में किया। तीनों रोबोटिक भुजाएं चलाई गईं। हर भुजा करीब तीन फीट लंबी थी और सिरे पर ग्रिपर लगा था। फ्लाइट कंट्रोलर्स लिंक को स्विफ्ट के बहुत पास तक ले गए। दूरी घटकर करीब 12 से 15 किलोमीटर रह गई। इस दौरान स्विफ्ट की तस्वीरें भी ली गईं।

कैटेलिस्ट के सीईओ गोन्ही ली ने कहा कि वे शुरुआत से जानते थे कि मिशन महत्वाकांक्षी है और बहुत कम समय में पूरा करना था। कंपनी इस मिशन से मिली सीख को भविष्य के सैटेलाइट रिकवरी मिशनों में इस्तेमाल करेगी। उन्होंने इसे आगे काम करने की नींव बताया।

नासा के शॉन डोमागल गोल्डमैन ने कहा कि स्विफ्ट का मिशन खत्म होते देखकर दुख होगा, लेकिन ऊंची कक्षा में पहुंचाने की कोशिश किसी भी स्थिति में सार्थक मानी गई थी। उनके अनुसार इस प्रयास से दूसरे उपग्रह बचाने वाले मिशनों के लिए महत्वपूर्ण प्रैक्टिस हुई। टीमों को पहले से ज्यादा तेजी से काम करने और समय के खिलाफ दौड़ने का अनुभव मिला।

स्विफ्ट अब कितने समय तक काम कर सकता है?

लिंक के नष्ट होने के बाद स्विफ्ट अकेला है। नासा के मुताबिक वह फिलहाल फिर ब्रह्मांड की निगरानी कर रहा है। उसके पास करीब एक महीने का समय बचा बताया गया है। नवंबर की शुरुआत में वायुमंडल में प्रवेश की उम्मीद है।

नासा यह भी देख रहा है कि स्विफ्ट के खत्म होने के बाद अचानक घटनाओं पर नजर रखने की भूमिका कैसे पूरी की जाए। 22 वर्षों से यह यान अंतरिक्ष में काम कर रहा है। तेजी से दिशा बदलने की क्षमता ने इसे गामा रे विस्फोटों और तेजी से बदलती घटनाओं के लिए उपयोगी बनाया।

लिंक उसे बचा नहीं पाया, लेकिन पहले से मौजूद उपग्रह के पास जाकर काम करने और कक्षा बदलने की तकनीक आजमाने का मौका मिला। कंपनी और नासा दोनों ने इसी सीख को अगले मिशनों की तैयारी से जोड़ा है। स्विफ्ट की जगह भरने की चर्चा अब एजेंसी के एजेंडे में है।

इस विफलता का वैज्ञानिक काम पर क्या असर होगा?

स्विफ्ट फर्स्ट रिस्पॉन्डर जैसा काम करता रहा है। घटना का संकेत मिलते ही अन्य टेलीस्कोप उसी ओर मुड़ सकते थे। वैज्ञानिक गतिविधियां पहले ही रोकी जा चुकी थीं ताकि कक्षा और नीचे न आए। फिर निगरानी दोबारा शुरू हुई, लेकिन समय कम है।

नवंबर की संभावित वापसी के बाद यह भूमिका खाली हो सकती है। नासा विकल्प तलाश रहा है। लिंक मिशन से पकड़ने, पास जाने और भुजाएं चलाने का अभ्यास हुआ। 12 से 15 किलोमीटर की दूरी और तस्वीरें उसी अभ्यास का हिस्सा हैं। सीईओ ली और नासा अधिकारी दोनों ने भविष्य के रिकवरी मिशनों में इस अनुभव के उपयोग की बात कही।

तीन करोड़ डॉलर का खर्च मुख्य लक्ष्य तक नहीं पहुंचा। फिर भी एजेंसी ने प्रयास को बेकार नहीं माना। स्विफ्ट 2004 से काम कर रहा था। सूर्य के फ्लेयर्स ने कक्षा गिराई। निजी यान उसे ऊपर नहीं ले जा सका। अब एक महीने के आसपास का समय और नवंबर का अनुमान बाकी रह गए हैं।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran

Netsha Singh

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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