India Bloc Meeting: दिल्ली में बुधवार को इंडिया गठबंधन की बैठक होनी है। विपक्षी दल स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा तय करना चाहते हैं। एजेंडे में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।
इंडिया गठबंधन बैठक इसलिए अहम बताई जा रही है क्योंकि चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर विवाद चल रहा है और विपक्ष एक स्वर में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार लोकसभा और राज्यसभा में CEC को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए ड्राफ्ट नोटिस तैयार है। बैठक में उसे मंजूरी देने पर चर्चा होगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल शामिल होने वाले हैं। तृणमूल कांग्रेस से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के आने की जानकारी है। समाजवादी पार्टी, सीपीआई, सीपीआई एम, एनसीपी एसपी और शिवसेना यूबीटी के नेता भी भाग लेंगे। डीएमके और आम आदमी पार्टी बैठक में नहीं होंगे। अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में राज्यसभा नामांकन के कारण स्वयं नहीं आएंगे, प्रतिनिधि भेजेंगे।
बैठक में कौन आएगा और कौन नहीं?
कांग्रेस की शीर्ष कमान के साथ बंगाल की तृणमूल नेतृत्व की मौजूदगी बैठक को राजनीतिक वजन देती है। वाम दल और शिवसेना यूबीटी के आने से गठबंधन का विस्तार दिखता है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अनुपस्थित रहेंगे, लेकिन पार्टी प्रतिनिधित्व रहेगा। के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने अखिलेश यादव से बात की और खड़गे ने भी बात की। राज्यसभा चुनाव का नामांकन देखना है, इसलिए वे दिल्ली नहीं आ रहे।
डीएमके और आप ने साफ किया है कि वे इस बैठक का हिस्सा नहीं बनेंगे। वेणुगोपाल से पूछा गया कि क्या इन दलों को साथ लाने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर चर्चा होगी। उनके मुताबिक डीएमके इंडिया ब्लॉक का अहम हिस्सा रही है और वे मानते हैं कि वह लोकतंत्र पर ऐसे हमले के खिलाफ है। आगे क्या होता है, यह देखने की बात कही गई।
अनुपस्थिति का अर्थ हर मुद्दे पर विरोध नहीं होता, यह डीएमके के अलग बयान से भी झलकता है। फिर भी मेज पर बैठने वालों और बाहर रहने वालों का फर्क आज की तस्वीर तय करेगा। गठबंधन बैठक को व्यापक बनाने की कोशिश और दो दलों के न आने का तथ्य साथ साथ पढ़ना जरूरी है।
एजेंडे पर SIR और CEC इस्तीफा क्यों हैं?
विपक्ष SIR में कथित अनियमितताओं को सरकार को घेरने और खुद को एकजुट करने का अवसर मान रहा है। बैठक में संयुक्त आंदोलन की कार्ययोजना अंतिम रूप लेने की बात कही गई है। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उसी पैकेज का हिस्सा है। संसद के दोनों सदनों में हटाने का प्रस्ताव लाने वाला ड्राफ्ट नोटिस चर्चा में रहेगा।
ये मांगें और आरोप विपक्ष के राजनीतिक दावे हैं। आयोग ने अपने आदेशों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है। इसलिए SIR गड़बड़ी को सिद्ध तथ्य की तरह नहीं लिखा जा सकता। लिखा जा सकता है कि विपक्ष इसे विवाद का केंद्र बना रहा है और बैठक उसी विवाद की रणनीति गढ़ेगी।
के.सी. वेणुगोपाल ने बैठक से पहले कहा था कि कांग्रेस सभी दलों की मदद से लोकतंत्र बचाने के लिए बड़ा आंदोलन चाहती है। कल नेताओं से महत्वपूर्ण सुझाव मिलेंगे, फिर भविष्य के आंदोलन की स्पष्ट योजना बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इंडिया ब्लॉक के कार्यक्रम और कांग्रेस के कार्यक्रम में तालमेल बिठाया जाएगा। यानी एक संयुक्त कैलेंडर बनाने की कोशिश है, दो अलग अभियान नहीं।
डीएमके का रुख बैठक से अलग कैसे है?
डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि वैचारिक रूप से सब साथ हैं। हो सकता है वे इंडिया गठबंधन का हिस्सा न हों, वह अलग बात है। संसद में जो भी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाएगा, उसका समर्थन करेंगे। नेता पहले बयान दे चुके हैं। कई मुद्दों पर जहां विपक्ष भाजपा का विरोध करता है, वे भी साथ खड़े होंगे। इसका मतलब साथ होना नहीं है। वे इंडिया ब्लॉक में नहीं हैं।
यह बयान गठबंधन की कुर्सी और संसदीय वोट को अलग करता है। बैठक में न आकर भी हटाने के प्रस्ताव पर साथ देने का वादा संसद की अंकगणित को प्रभावित कर सकता है। साथ ही यह रेखा खींचता है कि संगठन स्तर पर गठबंधन सदस्यता और मुद्दे स्तर पर समर्थन एक नहीं हैं। इंडिया गठबंधन बैठक के लिए यह सबसे साफ बाहरी संदेश है।
आप के न आने का विस्तृत उद्धरण स्रोत में डीएमके जितना नहीं है। तथ्य इतना है कि आप बैठक का हिस्सा नहीं बनेगी। बाकी व्याख्या अनुमान होगी।
चुनाव आयोग ने SIR आपत्तियों पर क्या कहा?
बैठक द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद हो रही है जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आधिकारिक आपत्ति जताई। उनका कहना बताया गया कि फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए। यह समाचार रिपोर्ट का दावा है, अदालती निष्कर्ष नहीं।
आयोग ने कहा है कि किसी संस्था में चर्चा के दौरान अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं। सभी आदेशों को पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है और वे तय प्रक्रिया के अनुसार जारी होते हैं। विपक्ष रिपोर्ट को हमले का आधार बना रहा है, आयोग भिन्न मत को आंतरिक चर्चा बता रहा है। दोनों संस्करण आज की बैठक की पृष्ठभूमि हैं।
पाठक के लिए साफ रेखा यह है कि विपक्ष आंदोलन और इस्तीफे की मांग लेकर बैठ रहा है, आयोग अपने आदेशों की वैधता दोहरा रहा है। बीच का फैसला न बैठक से पहले तय है, न इस रिपोर्ट में।
बैठक के बाद क्या देखा जाएगा?
आज का नतीजा कार्ययोजना, प्रस्ताव के ड्राफ्ट पर सहमति और कार्यक्रमों के तालमेल पर निर्भर करेगा। खड़गे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी जैसे चेहरे अगर एक मंच से बोलते हैं तो संदेश राजनीतिक रूप से तेज होगा। अखिलेश की अनुपस्थिति और डीएमके आप की दूरी उसी संदेश की सीमा भी तय करेंगी।
इंडिया गठबंधन बैठक SIR और CEC ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी एकजुटता की परीक्षा है। मांगें घोषित हैं, उपस्थिति आंशिक है, आयोग का बचाव दर्ज है। बैठक खत्म होने के बाद ही पता चलेगा कि ड्राफ्ट नोटिस मंजूर हुआ या आंदोलन की तारीखें कितनी साझा बनीं। उस घोषणा से पहले तथ्य इतने ही हैं।
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