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NCERT Social Science: एनसीईआरटी कक्षा 9 सोशल साइंस किताब में 1000 से 1700 का दौर प्रतिरोध और मजबूती के रूप में

NCERT Social Science: एनसीईआरटी ने कक्षा 9 के लिए सोशल साइंस की नई किताब जारी कर दी है। पुस्तक का नाम Understanding Society: India and Beyond Part 2 है। इसमें वर्ष 1000 से 1700 ईस्वी के भारतीय इतिहास को प्रतिरोध और मजबूती के दौर के रूप में रखा गया है।

किताब इस बात पर जोर देती है कि उस अवधि में भारत पर कई बाहरी हमले हुए। अलग अलग भारतीय शासकों और समाज ने उनका सामना किया और अपनी परंपराओं को बचाए रखा। मेडियावल भारत की कहानी राजवंशों और उनके संघर्षों के जरिए समझाई गई है। छात्रों के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि पाठ्यक्रम अब उसी कालखंड को एक नए फ्रेम में रख रहा है।

नई किताब में मध्यकाल को कैसे समझाया गया है

नई किताब में राजपूत, असम का अहोम साम्राज्य, विजयनगर, मराठा, सिख और जाट जैसे राज्यों तथा समुदायों का उल्लेख है। किताब के अनुसार बाहरी ताकतों के खिलाफ प्रतिरोध केवल युद्ध से नहीं हुआ। संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखना भी प्रतिरोध का हिस्सा बताया गया है।

यह प्रस्तुति छात्रों को केवल राजाओं की सूची नहीं देती। यह दिखाती है कि अलग अलग क्षेत्रों में सत्ता और समाज दोनों ने दबाव का जवाब दिया। उत्तर से दक्षिण तक के उदाहरण एक साथ रखे गए हैं ताकि यह न लगे कि संघर्ष एक ही भूभाग तक सीमित था।

आईई की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली सल्तनत वाले हिस्से में उन स्थानीय शासकों का जिक्र है जिन्होंने अपने इलाकों में बाहर से आने वाली शक्तियों का सामना किया। मुगल काल में भी क्षेत्रीय शक्तियों के संघर्ष को जगह दी गई है।

महाराणा प्रताप, अहोम और विजयनगर को क्या जगह मिली

मुगल काल वाले खंड में मेवाड़ और महाराणा प्रताप के अकबर के खिलाफ संघर्ष का उल्लेख है। यह हिस्सा क्षेत्रीय शक्तियों के प्रतिरोध के उदाहरण के रूप में आया है।

असम के अहोम साम्राज्य को विशेष स्थान दिया गया है। किताब बताती है कि अहोम राज्य ने करीब छह सौ साल तक अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखी और मुगल विस्तार का सामना किया। इसी क्रम में सरायघाट के युद्ध का भी जिक्र है।

इसके बाद विजयनगर साम्राज्य की चर्चा है। किताब यह भी कहती है कि बाहरी आक्रमणों का सामना केवल उत्तर भारत के राज्यों ने नहीं किया। दक्षिण भारत में भी कई शक्तियों ने विरोध किया। छात्रों के लिए यह बिंदु इसलिए उपयोगी है कि मध्यकालीन प्रतिरोध को पूरे उपमहाद्वीप के नक्शे पर देखा जा सके।

सिख इतिहास, जाट प्रतिरोध और धार्मिक संदर्भ क्या हैं

आईई की रिपोर्ट के अनुसार किताब में सिख इतिहास और उनके संघर्षों को शामिल किया गया है। सिख गुरुओं की शहादत और उस दौर की धार्मिक नीतियों का उल्लेख है। इसके बाद जाटों के प्रतिरोध की चर्चा आती है।

किताब में जाट प्रतिरोध के पीछे आर्थिक परेशानियों का संदर्भ दिया गया है। साथ ही औरंगजेब के शासनकाल की कुछ धार्मिक नीतियों का भी उल्लेख है। ये बिंदु स्रोत में दी गई रूपरेखा तक सीमित हैं। अतिरिक्त व्याख्या या नई घटनाएं नहीं जोड़ी गई हैं।

यह खंड दिखाता है कि प्रतिरोध केवल बड़े साम्राज्यों तक नहीं रहा। धार्मिक समुदाय और किसान पृष्ठभूमि वाले समूह भी पाठ्य सामग्री में आए हैं। कक्षा 9 के विद्यार्थी इन उदाहरणों से कालखंड की विविधता समझ सकते हैं।

काशी विश्वनाथ और चैतन्य महाप्रभु का उल्लेख क्यों है

काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में किताब बताती है कि इसका पुनर्निर्माण टोडरमल और मान सिंह से जुड़ा है। बाद में औरंगजेब के शासनकाल में मंदिर को नुकसान पहुंचाए जाने का उल्लेख है। फिर अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्माण का भी जिक्र है।

चैतन्य महाप्रभु के सार्वजनिक संकीर्तन का उदाहरण दिया गया है। किताब के अनुसार उन्होंने बंगाल में भक्ति गतिविधियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ संकीर्तन का नेतृत्व किया था। सूफी परंपरा को इस्लाम के अपेक्षाकृत उदार पक्ष के रूप में बताया गया है और उसके प्रसार में योगदान का उल्लेख है।

ये प्रसंग युद्ध कथाओं के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन को भी पाठ में लाते हैं। मंदिर के निर्माण, क्षति और दोबारा निर्माण की कड़ी छात्रों को एक स्थल के लंबे इतिहास से जोड़ती है। भक्ति और सूफी धारा का उल्लेख उस दौर की धार्मिक गतिविधियों की दूसरी परत दिखाता है।

विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है

कक्षा 9 सोशल साइंस की यह किताब मध्यकाल को Resistance and Resilience यानी प्रतिरोध और मजबूती के फ्रेम में रखती है। विद्यार्थी अब 1000 से 1700 ईस्वी के इतिहास को केवल आक्रमणों की सूची के रूप में नहीं पढ़ेंगे। वे यह भी पढ़ेंगे कि स्थानीय शासक, क्षेत्रीय राज्य और समाज ने कैसे जवाब दिया।

राजपूत, अहोम, विजयनगर, मराठा, सिख और जाट जैसे नाम एक ही पुस्तक खंड में आने से तुलना आसान होगी। दिल्ली सल्तनत और मुगल काल दोनों में क्षेत्रीय प्रतिरोध दर्ज है। महाराणा प्रताप, सरायघाट और काशी विश्वनाथ जैसे प्रसंग यादगार बिंदु बन सकते हैं।

अभिभावकों और शिक्षकों के लिए साफ बात यह है कि पाठ्य सामग्री का फोकस बदलकर टकराव के साथ सांस्कृतिक निरंतरता पर भी गया है। किताब के अनुसार परंपराओं को बचाए रखना भी प्रतिरोध माना गया है। खरीद या वितरण की नई तारीख स्रोत में नहीं दी गई है, इसलिए यहां केवल जारी होने की सूचना ही दी जा रही है।

एनसीईआरटी कक्षा 9 सोशल साइंस किताब Understanding Society: India and Beyond Part 2 अब उसी रूप में पढ़ाई की दिशा तय करेगी जो ऊपर दर्ज है। 1000 से 1700 के काल को प्रतिरोध और मजबूती कहा गया है। बाहरी हमलों के बावजूद शासकों और समाज ने परंपराएं बनाए रखीं, यही केंद्रीय संदेश है। दिल्ली सल्तनत के स्थानीय शासक, अकबर के विरुद्ध महाराणा प्रताप, अहोम की लंबी स्वतंत्रता, सरायघाट, विजयनगर, सिख गुरुओं की शहादत, जाट प्रतिरोध, काशी विश्वनाथ का पुनर्निर्माण और क्षति, अहिल्याबाई होल्कर, चैतन्य महाप्रभु का संकीर्तन तथा सूफी परंपरा का उल्लेख इसी ढांचे के हिस्से हैं। छात्रों को यह सामग्री परीक्षा और समझ दोनों के लिए नए कोण से पढ़नी होगी।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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