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मौत की सजा से लेकर सत्ता की कुर्सी तक का सफर, जानें कौन हैं BNP के चेयरमैन तारिक रहमान

Bangladesh Election: बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग का आरंभ हो चुका है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की शानदार चुनावी जीत के बाद इसके चेयरमैन तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं। यह बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि 36 वर्षों के बाद कोई पुरुष नेता प्रधानमंत्री पद की कुर्सी पर विराजमान होने जा रहा है। हालांकि तारिक रहमान के लिए यह सफर कतई आसान नहीं रहा। भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, 84 मुकदमे, मौत की सजा, जेल में यातनाएं और 17 वर्षों का कठिन निर्वासन – इन सब से गुजरने के बाद आज वह बांग्लादेश की सत्ता के शिखर पर पहुंचने वाले हैं। आइए जानते हैं कौन हैं तारिक रहमान और कैसे उन्होंने इस कठिन राजनीतिक यात्रा को पूरा किया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और राजनीतिक विरासत

Bangladesh Election - Tarique Rahman
Bangladesh Election – Tarique Rahman

तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुआ था। उनके पिता जिया-उर-रहमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के संस्थापक और देश के पूर्व राष्ट्रपति थे। वह एक सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी भी थे जिन्होंने 1971 में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी मां बेगम खालिदा जिया तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। हालांकि उनका दूसरा कार्यकाल केवल कुछ सप्ताहों का था, लेकिन उन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरे किए। इस प्रकार तारिक रहमान एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसने बांग्लादेश की राजनीति में गहरी छाप छोड़ी है। बचपन से ही राजनीतिक माहौल में पलने-बढ़ने के कारण उनमें राजनीति के प्रति स्वाभाविक रुझान विकसित हुआ। यह पारिवारिक विरासत ही थी जिसने उन्हें देश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

राजनीति में सक्रिय प्रवेश

तारिक रहमान ने 1990 के दशक में सक्रिय रूप से राजनीति में प्रवेश किया। उस समय बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली के लिए आंदोलन चल रहा था। 1991 में जब उनकी मां खालिदा जिया पहली बार प्रधानमंत्री बनीं, तो तारिक ने इस जीत को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने में सक्रिय योगदान दिया। युवा नेता के रूप में उन्होंने पार्टी में नई ऊर्जा का संचार किया। वह पार्टी की रणनीति बनाने और चुनाव अभियान चलाने में सक्रिय रहे। धीरे-धीरे उनकी पार्टी में पकड़ मजबूत होती गई और वह BNP के भीतर एक प्रभावशाली युवा नेता के रूप में उभरे। उनकी संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक समझ को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी स्वीकार किया।

प्रभावशाली नेता से विवादों का केंद्र तक

जब 2001 में खालिदा जिया दूसरी बार (तीसरे कार्यकाल के रूप में) प्रधानमंत्री बनीं, तो तारिक रहमान पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बन चुके थे। ढाका के प्रसिद्ध ‘हवा भवन’ को उनके नाम से जोड़ा जाने लगा। यह स्थान पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णयों का केंद्र बन गया था। यहीं से BNP की रणनीतियां तय होती थीं और प्रमुख नियुक्तियों पर फैसले लिए जाते थे। हालांकि इसी दौरान उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, घूसखोरी और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगने शुरू हो गए। विपक्षी अवामी लीग ने उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ कहना शुरू कर दिया। आरोप लगाया गया कि वह पर्दे के पीछे से सरकारी फैसलों को प्रभावित करते हैं और अनुचित लाभ उठाते हैं। इन विवादों ने उनकी छवि को धूमिल करना शुरू कर दिया।

गिरफ्तारी और 84 मुकदमे

2006-07 में बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता के गंभीर दौर से गुजर रहा था। सेना समर्थित अंतरिम सरकार ने देश में सत्ता संभाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू किया। मार्च 2007 में एक नाटकीय घटनाक्रम में तारिक रहमान को रात के अंधेरे में गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ कुल 84 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इन मुकदमों में वित्तीय घोटालों, मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी और यहां तक कि 2004 में हुए एक ग्रेनेड हमले में शामिल होने का आरोप भी शामिल था। BNP ने लगातार दावा किया कि ये सभी मुकदमे राजनीतिक प्रतिशोध के तहत लगाए गए हैं और यह उनकी प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना की साजिश का हिस्सा है। हालांकि अंतरिम सरकार ने कहा कि यह कानून का शासन स्थापित करने और भ्रष्टाचार से मुक्त बांग्लादेश बनाने के प्रयास का हिस्सा है।

जेल में यातना और स्वास्थ्य समस्याएं

जेल में तारिक रहमान को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। BNP के दावों के अनुसार, उन्हें जेल में शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। इसी दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके कारण उन्हें लंबे समय तक तीव्र पीड़ा सहनी पड़ी। उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही। परिवार और पार्टी ने उनके उचित इलाज की मांग की। सितंबर 2008 में अंततः उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। रिहाई के तुरंत बाद, चिकित्सा उपचार के नाम पर उन्होंने अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जैमा रहमान के साथ लंदन जाने का निर्णय लिया। 11 सितंबर 2008 को जब उनका विमान ढाका से उड़ा, तो किसी को नहीं पता था कि यह एक लंबे निर्वासन की शुरुआत होगी।

17 वर्षों का कठिन निर्वासन

लंदन पहुंचने के बाद तारिक रहमान ने वापस बांग्लादेश न लौटने का निर्णय लिया। यह स्वनिर्वासन पूरे 17 वर्षों तक चला। इस दौरान शेख हसीना की अवामी लीग सरकार लगातार सत्ता में रही और उनके खिलाफ मुकदमे जारी रहे। एक मामले में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई। हालांकि तारिक रहमान ने निर्वासन में रहते हुए भी BNP की कमान अपने हाथों में रखी। उन्होंने लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पार्टी की बैठकें कीं, रणनीतियां तैयार कीं और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि दूरी के बावजूद वह पार्टी के निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय रहें। यह एक अभूतपूर्ण स्थिति थी – एक राजनीतिक नेता जो हजारों किलोमीटर दूर से अपनी पार्टी का नेतृत्व कर रहा था।

छात्र आंदोलन और शेख हसीना का पतन

तारिक रहमान की वापसी का मार्ग अगस्त 2024 में प्रशस्त हुआ जब बांग्लादेश में एक शक्तिशाली छात्र आंदोलन शुरू हुआ। यह आंदोलन शेख हसीना की सरकार के खिलाफ था। छात्रों ने सरकार की नीतियों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन किए। आंदोलन इतना व्यापक और शक्तिशाली हो गया कि अंततः शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। अवामी लीग सरकार का पतन हो गया और देश में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ। नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस को इस अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया। इस राजनीतिक परिवर्तन ने तारिक रहमान के लिए नई संभावनाएं खोल दीं। अंतरिम सरकार के दौरान अदालतों ने उनके खिलाफ चल रहे सभी 84 मुकदमे रद्द कर दिए। यह उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी राहत थी।

ऐतिहासिक घर वापसी

सभी मुकदमों से मुक्ति के बाद दिसंबर 2025 में तारिक रहमान ने अपनी स्वदेश वापसी की घोषणा की। 25 दिसंबर 2025 का दिन बांग्लादेश की राजनीति में ऐतिहासिक बन गया जब 17 वर्षों के निर्वासन के बाद तारिक रहमान ढाका हवाई अड्डे पर उतरे। हवाई अड्डे और वहां से शहर तक के रास्ते में लाखों समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया। यह दृश्य अभूतपूर्व था – सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, नारे लगाते कार्यकर्ता, और भावुक समर्थक। यह केवल एक नेता की वापसी नहीं थी, बल्कि BNP के लिए एक नए युग की शुरुआत थी। तारिक रहमान ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र की बहाली, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और सभी के लिए न्याय का वादा किया। हालांकि इस खुशी के क्षण के कुछ ही दिनों बाद उन्हें व्यक्तिगत त्रासदी का सामना करना पड़ा जब उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो गया।

चुनावी मैदान में सफलता

अपनी मां के निधान के मात्र 50 दिनों बाद तारिक रहमान चुनावी मैदान में उतरे। उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 दोनों सीटों से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। ढाका-17 राजधानी की एक महत्वपूर्ण सीट थी, जबकि बोगरा-6 उनके परिवार की पारंपरिक सीट रही है। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने खुद को एक लोकतंत्र समर्थक, सुधारवादी नेता के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने वादा किया कि BNP का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश में वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली करना है। जनता ने उनके संदेश को स्वीकार किया और दोनों सीटों पर उन्हें शानदार जीत मिली। यह उनकी लोकप्रियता और जनसमर्थन का स्पष्ट प्रमाण था।

BNP की ऐतिहासिक जीत

12 फरवरी 2026 को हुए संसदीय चुनावों में BNP ने शानदार प्रदर्शन किया और 200 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यह बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। 18 वर्षों के बाद BNP सत्ता में वापस आने वाली थी। तारिक रहमान ने चुनाव परिणामों के बाद सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने अपने समर्थकों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल BNP की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की है। अब तारिक रहमान 36 वर्षों में बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। पिछले चार दशकों में बांग्लादेश की राजनीति पर शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा था। अब एक नई पीढ़ी के नेता के रूप में तारिक रहमान देश की कमान संभालने वाले हैं।

Bangladesh Election: चुनौतियां और वादे

60 वर्षीय तारिक रहमान के सामने अनेक चुनौतियां हैं। बांग्लादेश आर्थिक कठिनाइयों, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और राजनीतिक ध्रुवीकरण से जूझ रहा है। उन्होंने ‘स्वच्छ राजनीति, भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता, युवाओं के लिए रोजगार सृजन और लोकतंत्र की पूर्ण बहाली’ का वादा किया है। उन्हें देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना होगा, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करना होगा। उन्हें ‘नरम स्वभाव’ वाले नेता के रूप में जाना जाता है, जो सर्वसम्मति बनाने में विश्वास रखते हैं। अब देखना होगा कि वह अपने वादों को कैसे पूरा करते हैं और बांग्लादेश को किस दिशा में ले जाते हैं।

तारिक रहमान की कहानी मौत की सजा से लेकर सत्ता की कुर्सी तक का एक असाधारण सफर है – यह लचीलापन, धैर्य और राजनीतिक रणनीति की कहानी है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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