India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है जहां दोनों पक्षों के लिए और रियायतें देना आसान नहीं रह गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वार्ता जारी है लेकिन आगे बढ़ना काफी कठिन नजर आ रहा है।
5 अक्टूबर को नई दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान उन्होंने साफ कहा कि दोनों देश अभी भी बातचीत कर रहे हैं। फिर भी ऐसा लगता है कि वार्ता एक प्लैट्यू पर पहुंच चुकी है जहां आगे कुछ देना या लेना बहुत मुश्किल हो सकता है।
वित्त मंत्री ने क्या कहा पूरी बात
निर्मला सीतारमण ने बताया कि मौजूदा प्रस्ताव बहुत कठिन और गंभीर बातचीत के बाद तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि ट्रेड बैलेंस भारत के पक्ष में है। अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है इसलिए भारत से और रियायतें मांग रहा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर आगे बढ़ने की कोई गुंजाइश बची है तो दोनों देश उसे तलाश सकते हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति में अतिरिक्त रियायत देना दोनों के लिए आसान नहीं है।
ट्रेड डील की बातचीत कब शुरू हुई
भारत और अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की प्रक्रिया फरवरी 2025 में शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 13 फरवरी 2025 को इसकी शुरुआत पर सहमति जताई थी।
फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क घोषित किया था। इसमें टैरिफ में कमी गैर टैरिफ बाधाओं को कम करना बाजार तक बेहतर पहुंच और सप्लाई चेन में सहयोग जैसे मुद्दे शामिल थे। डिजिटल ट्रेड और अतिरिक्त बाजार पहुंच पर भी आगे चर्चा की बात कही गई थी।
यह फ्रेमवर्क अंतिम डील नहीं था। बातचीत आगे भी जारी रही। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीयर ने हाल में कहा था कि डील पर काम चल रहा है लेकिन समझौता अभी तत्काल होने वाला नहीं है और कुछ अहम मुद्दे अटके हुए हैं।
टैरिफ को लेकर क्या उठाए सवाल
वित्त मंत्री ने व्यापार असंतुलन दूर करने के लिए टैरिफ के बढ़ते इस्तेमाल पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पहले टैरिफ बातचीत के तय फ्रेमवर्क के अंदर एक जरिया हुआ करते थे। अब टैरिफ हथियार बन गया है।
उन्होंने चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे का भी जिक्र किया। उनके अनुसार 2014 के बाद से चीन के साथ भारत का व्यापार असंतुलन तेजी से बढ़ा है। उन्होंने पूछा कि अगर हर व्यापार असंतुलन को सिर्फ टैरिफ से ठीक किया जाए तो क्या भारत भी चीन के खिलाफ वैसा ही रास्ता अपना सकता है।
यूरोपीय संघ डील का उदाहरण क्यों दिया
सीतारमण ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते का उदाहरण दिया। उन्होंने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स बताया। भारत और यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्थाएं मिलकर दुनिया की करीब एक चौथाई जीडीपी का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि इस समझौते में डेयरी कृषि और सोया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षित रखा गया है। भारत और यूरोपीय संघ ने 27 जनवरी 2026 को एफटीए बातचीत पूरी की थी।
वित्त मंत्री के अनुसार व्यापार समझौतों का मकसद सिर्फ बाजार खोलना नहीं होना चाहिए। इनमें सप्लाई चेन को मजबूत करना नए कारोबारी साझेदार बनाना और देश के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा भी जरूरी है।
भारत अमेरिका व्यापार समझौते की मौजूदा स्थिति दोनों देशों के लिए चुनौतीपूर्ण है। आगे की राह में संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और आपसी हितों का संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
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