CEC Gyanesh Kumar: नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा अचानक स्थगित कर दिया गया है। यह दौरा 7 और 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित था। आयोग ने इसे अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए टाल दिया है। नई तारीखों का एलान बाद में किया जाएगा।
दौरे में दंतेवाड़ा, बस्तर और कवर्धा सहित राज्य के कई अहम हिस्सों का कार्यक्रम था। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने ज्ञानेश कुमार को राज्य अतिथि घोषित कर सुरक्षा और प्रोटोकॉल की तैयारी पूरी कर ली थी। स्थगन के बाद वे तैयारियां रोक दी गई हैं। फैसला ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मतदाता सूची संशोधन को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन चल रहा है और आयोग के फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है।
दौरा क्यों टाला गया?
चुनाव आयोग ने आधिकारिक रूप से अपरिहार्य कारण बताए हैं। अलग से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं हुआ है। समय संयोग से उस दौर का है, जब CEC खुद प्रशासनिक और कानूनी विवाद के केंद्र में हैं। आरोप है कि तीन सदस्यीय आयोग में ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति के बावजूद कई अहम फैसले लिए।
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों आयुक्तों ने कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। सबसे बड़ा विवाद नए मतदाताओं के पंजीकरण वाले फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर है। कहा गया है कि बदलाव बिना उचित प्रक्रिया के हुए। आयोग इन आरोपों पर अदालत में अपना पक्ष रखेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
विवाद 5 अक्टूबर की सुनवाई में सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है। कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने से इनकार कर दिया। साथ ही केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि वह रिकॉर्ड देखकर जांच करेगी कि फैसले सामूहिक सहमति से हुए थे या नहीं। नियमों के खिलाफ पाए गए फैसलों को रद्द भी किया जा सकता है। निलंबन न होने का मतलब आरोपों की सफाई नहीं है। मामला नोटिस और जवाब के चरण में है।
छत्तीसगढ़ में क्या तैयारी हो चुकी थी?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने दौरे को राज्य अतिथि का दर्जा दे दिया था। सुरक्षा घेरा, प्रोटोकॉल और स्थानीय कार्यक्रम की रूपरेखा बन चुकी थी। दंतेवाड़ा, बस्तर और कवर्धा पर खास ध्यान था। ये इलाके मतदाता सूची, पहुंच और प्रशासनिक समीक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाते हैं।
दौरा टलने के बाद नई तारीख का इंतजार है। जब तक आयोग कार्यक्रम दोबारा नहीं जारी करता, राज्य स्तर की तैयारियां रुकी रहेंगी। स्थगन से क्षेत्रीय दौरे का मकसद भी आगे खिसक गया है।
दिल्ली में विरोध का इस फैसले से क्या संबंध है?
इसी दौर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों का दिल्ली में प्रदर्शन हुआ। इंडिया गठबंधन के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय के बाहर जुटे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं के खिलाफ आकाशवाणी कार्यालय में कथित जबरन प्रवेश को लेकर एफआईआर दर्ज होने की खबरें भी आईं। जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक सुरक्षा कड़ी रही और ट्रैफिक प्रभावित हुआ।
आयोग ने दौरा टालने का कारण प्रदर्शन नहीं बताया है। फिर भी दोनों घटनाएं एक ही दिन के आसपास हुई हैं, इसलिए राजनीतिक चर्चा में इन्हें साथ पढ़ा जा रहा है। आधिकारिक बयान अपरिहार्य कारणों तक सीमित है।
आगे क्या होगा?
छत्तीसगढ़ दौरे की नई तारीख बाद में घोषित होगी। सुप्रीम कोर्ट में नोटिस का जवाब आने के बाद यह देखा जाएगा कि फॉर्म-6 और अन्य फैसले सामूहिक सहमति से थे या नहीं। नियमों के विरुद्ध पाई गई कार्रवाई रद्द हो सकती है। निलंबन की मांग फिलहाल खारिज हो चुकी है।
जब तक अदालत रिकॉर्ड न देख ले और आयोग नई यात्रा कार्यक्रम न जारी करे, दोनों मोर्चों पर इंतजार है। दौरा टलना प्रशासनिक स्थगन है। विवाद का फैसला अब नोटिस, जवाब और सुनवाई पर टिका है।
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