मेघा का जोर तली चीज कम करने और पानी न भूलने पर है। डायबिटीज, किडनी की समस्या, गर्भावस्था या कोई और बीमारी हो तो व्रत से पहले डॉक्टर से पूछना बेहतर बताया गया है। किसी खास धार्मिक व्रत में अपनी पारंपरिक विधि ही माननी चाहिए।
दिन की शुरुआत फल और दूध से कैसे हो सकती है?
व्रत में सेब, केला, पपीता, संतरा, अनार, अमरूद और नारियल जैसे फल खाए जा सकते हैं। दूध, दही और छाछ भी विकल्प हैं। इनसे दिन में हल्का खाना मिल जाता है। फल का चुनाव मौसम और पेट के हिसाब से करें। बहुत मीठा फल बार-बार लेना हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं रहता।
साबूदाना, मखाना और कुट्टू का इस्तेमाल कहां होता है?
मेघा बताती हैं कि साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना खीर या साबूदाना वड़ा व्रत में बनता है। ज्यादा तेल की जगह कम तेल में पकाना बेहतर रहता है। मखाने को भूनकर या दूध के साथ खाया जा सकता है। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से रोटी, पूरी या पकौड़ी बनती है। इन आटों से घर पर कई व्रत वाले व्यंजन तैयार हो सकते हैं। पूरी और पकौड़ी तले रूप हैं, इसलिए इन्हें ही पूरा भोजन न बनाएं।
कौन सी सब्जियां कई घरों में चलती हैं?
मेघा के अनुसार आलू, शकरकंद, लौकी, कद्दू और अरबी कई घरों में व्रत की सब्जी मानी जाती हैं। सब्जी की सूची हर क्षेत्र में समान नहीं है। किसी घर में अरबी चलती है, किसी में नहीं। अपने घर की पुरानी परंपरा देखकर ही थाली तय करें। नया नियम इंटरनेट से जोड़कर परिवार की रीति न बदलें, जब तक घर वाले सहमत न हों।
गेहूं, चावल, दाल और नमक पर क्या परहेज बताया गया है?
व्रत के दौरान आमतौर पर गेहूं, चावल, सामान्य आटा, दाल, चना और राजमा नहीं खाए जाते। सामान्य नमक की जगह कई लोग सेंधा नमक रखते हैं। प्याज और लहसुन का परहेज भी कई परिवारों में है। मसालों में सेंधा नमक, जीरा और काली मिर्च का जिक्र है। मसाले भी क्षेत्र के हिसाब से बदलते हैं। यह धार्मिक परहेज है, चिकित्सकीय भोजन सूची नहीं।
पानी, पेय और तली चीज का संतुलन क्यों जरूरी है?
व्रत में पानी पीते रहना जरूरी बताया गया है। परंपरा के अनुसार नारियल पानी, दूध या दूसरा उपयुक्त पेय लिया जा सकता है। निर्जल व्रत में पानी नहीं लिया जाता। वह अलग प्रकार का व्रत है। हर व्यक्ति को उसे नहीं अपनाना चाहिए।
सिर्फ पूरी, साबूदाना वड़ा, तले आलू या मिठाई पर निर्भर न रहें। फल, दही और भुने मखाने को भी जोड़ें। डायबिटीज, किडनी की तकलीफ, गर्भावस्था या दूसरी स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना व्रत न रखें। नवरात्रि के खाने-पीने के नियम परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हैं। किसी विशेष व्रत की अपनी विधि हो तो वही अपनाएं।
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