Odisha News: भारतीय वायुसेना में 62 साल तक देश की सेवा करने के बाद मिग-21 विमानों का युग समाप्त हो गया है। यह विमान अब ओडिशा के सुनाबेड़ा स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) संग्रहालय में अपनी वीरगाथा बयां कर रहा है।
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मिग-21 ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कारगिल युद्ध और अन्य अभियानों में भी इसका योगदान रहा। नए विमानों के आने के बाद मिग-21 ने सम्मान के साथ सेवा से विदाई ली है।
मिग-21 ने भारतीय वायुसेना में कितने साल सेवा की?
मिग-21 ने भारतीय वायुसेना में 62 साल तक सेवा दी। यह वायुसेना का पहला सुपरसोनिक फाइटर जेट था। भारत ने रूसी तकनीक अपनाकर इसका निर्माण किया था।
1968 से सुनाबेड़ा HAL में मिग इंजनों का निर्माण शुरू हुआ। मिग-21, मिग-27 और मिग-29 के इंजन यहां बनाए गए। लंबे सेवा काल के बाद अब इसका युग समाप्त हो गया है।
नए युद्ध विमानों के शामिल होने के बावजूद मिग-21 का पराक्रम याद किया जाता है।
1971 युद्ध और अन्य अभियानों में मिग-21 की क्या भूमिका रही?
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मिग-21 ने भारतीय सेना को बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसने पाकिस्तान के चार पीएएफ-104एएस, दो एफ-6सीएस, एक एफ-86एफ सबर और एक सी-130ई हरक्यूलिस विमान को नष्ट किया। दो एफ-104एएस विमानों को निष्क्रिय भी किया।
कारगिल युद्ध में मिग विमानों ने 16,000 फुट की ऊंचाई पर उड़ान भरकर दुश्मन को रोकने में भूमिका निभाई। 1999 में पाकिस्तान के ब्रिके-1150 अटलांटिक मैरीटाइम पेट्रोल विमान को मिग ने मार गिराया।
2019 में ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्तमान ने मिग से पाकिस्तान के विमान को गिराया। ऑपरेशन सिंदूर में भी दो मिग फाइटर जेट ने पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर प्रहार किए।
मिग-21 को ‘फ्लाइंग कॉफिन’ क्यों कहा गया?
समय के साथ रक्षा विशेषज्ञों ने इसके पुराने होते प्रारूप के कारण मिग-21 को ‘फ्लाइंग कॉफिन’ का नाम दिया। वहीं युद्ध के मैदान में इसने ‘आसमान के बाज’ की तरह प्रदर्शन किया।
पायलटों के बीच यह विमान अपनी असाधारण गति और वर्टिकल क्लाइंबिंग क्षमता के लिए लोकप्रिय था। तकनीक पुरानी होने के बावजूद इसने रिटायरमेंट तक देश की सरहदों की रक्षा की।
इसके प्रदर्शन और सीमाओं दोनों पर चर्चा रही है।
सुनाबेड़ा HAL संग्रहालय में अब क्या है?
अब सुनाबेड़ा स्थित HAL संग्रहालय में मिग-21 की मौजूदगी है। यहां इसकी वीरगाथा को जीवंत किया गया है। आने वाली पीढ़ियों और एयरोस्पेस के छात्रों को भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी महारत की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है।
सुनाबेड़ा HAL का मिग के इतिहास से गहरा रिश्ता रहा है। यहां इंजन बनाने का काम होता था। संग्रहालय में इसकी कहानी संरक्षित की जा रही है।
यह स्थान अब मिग-21 के योगदान को याद रखने का केंद्र बन गया है।
मिग-21 की जगह अब कौन से विमान हैं?
मिग-21 का जाना एक युग का अंत है। अब स्वदेशी तकनीक से बने तेजस, अत्याधुनिक राफेल और शक्तिशाली सुखोई भारतीय आकाश की नई पहचान बन चुके हैं।
पुरानी पीढ़ियों के अनुभव और नई तकनीक के संगम के साथ भारतीय वायुसेना पहले से अधिक आधुनिक हो चुकी है। मिग-21 ने सम्मान के साथ विदाई ली है।
कुल मिलाकर, भारतीय वायुसेना में 62 साल सेवा के बाद मिग-21 का युग समाप्त हो गया है। 1971 युद्ध, कारगिल और अन्य अभियानों में इसकी भूमिका रही। अब सुनाबेड़ा HAL संग्रहालय में इसकी शौर्य गाथा संरक्षित है। नए विमानों ने इसकी जगह ली है।
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