Dangerous Noise Levels: आजकल डीजे, गाड़ियों के हॉर्न और पटाखों की आवाज आम हो गई है। कई लोग घंटों तेज शोर के बीच रहते हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार लंबे समय तक तेज आवाज में रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। आवाज जितनी तेज और जितनी देर तक हो, कानों को उतना ही नुकसान पहुंच सकता है।
आवाज की तीव्रता डेसीबल (dB) में मापी जाती है। सामान्य बातचीत करीब 60 डेसीबल होती है। WHO के मुताबिक 70 डेसीबल तक की आवाज को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा सकता है, लेकिन इसमें समय भी महत्वपूर्ण है। आप कितनी देर तक शोर में रह रहे हैं, यह नुकसान की मात्रा तय करता है।
85 डेसीबल से ऊपर की आवाज क्यों खतरनाक है?
जैसे ही आवाज 85 डेसीबल या उससे ज्यादा हो जाती है, सावधानी बरतनी जरूरी हो जाती है। भारी ट्रैफिक या मशीनों के शोर में काम करने वाले लोगों को खास ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से धीरे-धीरे सुनने की शक्ति कम होने लगती है। कानों को आराम देने के लिए बीच-बीच में शांत जगह पर जाना फायदेमंद माना जाता है।
100 से 130 डेसीबल की आवाज कितनी रिस्की होती है?
अगर शोर 100 डेसीबल तक पहुंच जाए, जैसा लाउडस्पीकर या भारी ट्रैफिक के पास होता है, तो यह कानों के लिए काफी जोखिम भरा है। ऐसे में जितनी जल्दी हो सके शोर के स्रोत से दूरी बना लेनी चाहिए। 120 से 130 डेसीबल की आवाज, जैसे तेज सायरन या विमान की आवाज, असहनीय होती है। इससे कानों में दर्द और बेचैनी शुरू हो सकती है। इस स्तर पर तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाना बेहतर है।
140 डेसीबल से ज्यादा की आवाज का क्या असर पड़ता है?
140 से 150 डेसीबल का शोर अचानक और बहुत तीव्र होता है, जैसे पटाखों का धमाका। यह स्तर सीधे कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे कान में लगातार घंटी बजने जैसी समस्या या सुनने की क्षमता में अचानक कमी आ सकती है। 175 से 180 डेसीबल की आवाज बड़े धमाके जैसी होती है। इस स्तर पर हवा का दबाव भी बढ़ जाता है, जो कान के पर्दे और शरीर के अन्य हिस्सों को चोट पहुंचा सकता है।
200 डेसीबल से ज्यादा का शोर और भी खतरनाक माना जाता है क्योंकि इससे पैदा होने वाली दबाव की लहरें शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे शोर से बचना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
कानों की सुरक्षा कैसे करें?
सबसे आसान तरीका यह है कि अगर शोर इतना तेज है कि सामने वाले की बात साफ सुनाई न दे, तो समझ लें कि वह आपके कानों के लिए हानिकारक है। ऐसे माहौल से तुरंत दूर हट जाएं। शोर वाली जगहों पर ईयरप्लग का इस्तेमाल करें। अगर तेज आवाज सुनने के बाद कान में दर्द, भारीपन या आवाजें सुनाई देने जैसी कोई समस्या महसूस हो, तो बिना देरी डॉक्टर से सलाह लें।
नियमित रूप से कानों की जांच कराना भी फायदेमंद हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोज तेज शोर में काम करते हैं। छोटे-छोटे बदलाव जैसे वॉल्यूम कम रखना और शांत जगह पर समय बिताना कानों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।
शोर से बचाव के लिए रोजमर्रा में क्या ध्यान रखें?
त्योहारों या आयोजनों में पटाखों और डीजे के शोर से जितना हो सके दूरी बनाए रखें। गाड़ी चलाते समय हॉर्न का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा न करें। घर में टीवी या संगीत का वॉल्यूम मध्यम रखें। बच्चों को तेज शोर से दूर रखें क्योंकि उनके कान ज्यादा संवेदनशील होते हैं। अगर काम के दौरान लगातार शोर में रहना पड़ता है तो ईयर प्रोटेक्शन जरूर इस्तेमाल करें।
WHO की सलाह के अनुसार लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क से बचना ही सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है। जागरूकता और छोटे कदमों से कानों को नुकसान से बचाया जा सकता है।
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