Papankusha Ekadashi 2026 का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 21 अक्टूबर की दोपहर से शुरू हो रही है, लेकिन उस दिन सूर्योदय के समय दशमी तिथि रहेगी। अगले दिन सुबह एकादशी होने के कारण उपवास 22 अक्टूबर को ही माना जाएगा। व्रत का पारण 23 अक्टूबर, शुक्रवार की सुबह किया जाएगा। द्रिक पंचांग और इस्कॉन जयपुर की व्रत सूची में भी यही तारीखें दी गई हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। तिथि शुरू होने और व्रत रखने की तारीख में अंतर के कारण हर साल कई श्रद्धालु असमंजस में रहते हैं।
पापांकुशा एकादशी 2026 की तिथि और समय
नई दिल्ली के लिए हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे से शुरू होगी। यह तिथि 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:47 बजे समाप्त होगी। यानी तिथि का एक हिस्सा 21 अक्टूबर में पड़ता है और दूसरा हिस्सा 22 अक्टूबर में।
इसी वजह से कई लोग सोच रहे हैं कि व्रत 21 को रखें या 22 को। पंचांग की गणना के आधार पर इसका जवाब स्पष्ट है। व्रत की तारीख 22 अक्टूबर, गुरुवार रखी गई है। श्रद्धालुओं को केवल तिथि शुरू होने का समय देखकर 21 अक्टूबर को उपवास नहीं रखना चाहिए।
सूर्योदय के आधार पर क्यों तय होती है व्रत की तारीख
एकादशी जैसे व्रतों की तारीख तय करते समय परंपरा में यह देखा जाता है कि सूर्योदय के समय कौन सी तिथि चल रही है। तिथि कभी भी शुरू या खत्म हो सकती है, लेकिन दिन की गिनती सूर्योदय से होती है। इसलिए पंचांग में उसी तिथि को उस दिन का माना जाता है जो सूर्योदय के समय मौजूद हो।
इस बार 21 अक्टूबर को सूर्योदय के समय दशमी तिथि थी। एकादशी दोपहर में लगेगी, इसलिए उस दिन व्रत का आधार नहीं बनता। इसके उलट 22 अक्टूबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि रहेगी। यही कारण है कि द्रिक पंचांग और इस्कॉन जयपुर, दोनों ने व्रत के लिए 22 अक्टूबर की तारीख बताई है।
हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय का समय थोड़ा बदलता है। ऐसे में अपने शहर के स्थानीय पंचांग से मिलान कर लेना बेहतर रहता है।
पारण का समय और नियम
पारण का अर्थ है अगले दिन व्रत खोलना। नई दिल्ली और एनसीआर के लिए पापांकुशा एकादशी का पारण समय 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 बजे से 8:42 बजे तक बताया गया है। इस अवधि में व्रत खोलना श्रेष्ठ माना जाता है।
पारण को अपनी सुविधा के हिसाब से किसी भी समय करने के बजाय पंचांग में दिए गए समय के भीतर करना चाहिए। यह समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए दूसरे शहरों में रहने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग से सही समय देख लें। दिल्ली-एनसीआर के लिए बताया गया समय केवल इसी क्षेत्र पर लागू होता है।
भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें
पापांकुशा एकादशी पर पूजा की शुरुआत सुबह स्नान से होती है। साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद दीपक जलाया जाता है।
भक्त अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार फूल, फल और तुलसी दल अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप किया जा सकता है। जो लोग चाहें, वे विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं। मंत्र जाप या पाठ में कोई कठोर बाध्यता नहीं है और इसे अपनी सुविधा से किया जा सकता है।
एक बात अक्सर पूछी जाती है कि क्या पूजा में पीले कपड़े पहनना जरूरी है। इसका उत्तर है कि पीले कपड़े पहनना अनिवार्य नहीं है। पूजा में असली महत्व साफ-सफाई, श्रद्धा और संयम का है।
व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान
एकादशी व्रत की परंपरा में चावल और अन्न का सेवन नहीं किया जाता। यह नियम इस व्रत की पहचान माना जाता है और अधिकतर परिवार इसका पालन करते हैं। फलाहार को लेकर नियम हर परिवार और धार्मिक परंपरा में अलग हो सकते हैं। इसलिए इसमें अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा का पालन करना ही ठीक रहता है।
निर्जल उपवास को सभी के लिए जरूरी नहीं बताया जाना चाहिए। बुजुर्ग, बीमार या किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोग अपनी स्थिति के अनुसार फैसला लें। चिकित्सकीय सलाह की जरूरत हो तो उसे नजरअंदाज न करें। श्रद्धा का मतलब खुद को कष्ट देना नहीं है।
व्रत के दिन संयम का ध्यान रखना भी इस परंपरा का हिस्सा है। मन को शांत रखना और दिनभर भगवान का स्मरण करना श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
दान और धार्मिक मान्यता
एकादशी पर जरूरतमंद को भोजन या अनाज देने की परंपरा भी है। जो लोग यह करना चाहते हैं, वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान कर सकते हैं। इसमें कोई तय मात्रा या अनिवार्य सूची नहीं है। मदद का भाव ही सबसे अहम माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी का व्रत पापों से मुक्ति और मन की शुद्धि के लिए किया जाता है। यह मान्यता श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है। इसी आस्था के चलते हर साल बड़ी संख्या में लोग आश्विन शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह
सबसे पहले तारीख को लेकर भ्रम दूर कर लें। तिथि 21 अक्टूबर को शुरू होगी, लेकिन व्रत 22 अक्टूबर को रखा जाएगा। इसके बाद पारण का समय अपने शहर के पंचांग से जांच लें। दिल्ली-एनसीआर के लिए 23 अक्टूबर को सुबह 6:27 से 8:42 बजे तक का समय बताया गया है।
पूजा-विधि को लेकर भी ज्यादा जटिल नियमों में उलझने की जरूरत नहीं है। संकल्प, दीपक, फूल, तुलसी दल और मंत्र जाप से पूजा पूरी मानी जाती है। जो परिवार अलग परंपरा का पालन करते हैं, वे उसी के अनुसार पूजा कर सकते हैं। किसी भी तरह की दुविधा हो तो अपने पारिवारिक पुरोहित या स्थानीय पंडित से सलाह ली जा सकती है।
अंततः पापांकुशा एकादशी 2026 का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे लगेगी, पर सूर्योदय के आधार पर उपवास अगले दिन होगा। तिथि 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे समाप्त होगी। पारण 23 अक्टूबर की सुबह किया जाएगा, जिसका समय दिल्ली-एनसीआर के लिए 6:27 से 8:42 बजे तक बताया गया है। द्रिक पंचांग और इस्कॉन जयपुर की सूची में भी यही तारीखें हैं। भगवान विष्णु की पूजा, संकल्प, अन्न और चावल से परहेज तथा संयम इस व्रत की मुख्य बातें हैं। शहर के अनुसार समय में फर्क हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना न भूलें।
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Sanjana Gupta
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