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ओडिशा के 28वें राज्यपाल बने ब्रजमोहन राम, पलामू के पूर्व सांसद को लोकभवन में चीफ जस्टिस ने दिलाई शपथ

Odisha Governor: झारखंड के पलामू से तीन बार सांसद रहे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ब्रजमोहन राम ने रविवार को ओडिशा के 28वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। भुवनेश्वर के लोकभवन में आयोजित समारोह में ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को ब्रजमोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया था। उन्होंने हरि बाबू कंभमपति का स्थान लिया है, जिन्होंने तीन जनवरी 2025 को राज्यपाल का कार्यभार संभाला था। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

लोकभवन में हुआ शपथ ग्रहण समारोह

समारोह भुवनेश्वर के लोकभवन में आयोजित किया गया। यहां मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन ने ब्रजमोहन राम को शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी और विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी भी उपस्थित रहे।

इनके अलावा राज्य सरकार के मंत्री, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी समारोह का हिस्सा बने। शपथ के साथ ही ब्रजमोहन राम ने औपचारिक रूप से ओडिशा के राज्यपाल का पद संभाल लिया।

12 अक्टूबर को हुई थी नियुक्ति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को पलामू के रहने वाले ब्रजमोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया था। नियुक्ति के छह दिन बाद रविवार को शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई।

वह हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे। कंभमपति ने तीन जनवरी 2025 को ओडिशा के राज्यपाल का कार्यभार संभाला था। इस तरह राज्य को नया संवैधानिक प्रमुख मिल गया है।

चंदवा के ग्रामीण परिवेश से निकला सफर

ब्रजमोहन राम का जन्म एक जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार, अब झारखंड, के लातेहार जिले के चंदवा में हुआ। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी है। उनके परिवार का मुख्य पेशा खेती रहा है।

शिक्षा की बात करें तो उन्होंने बीएस कॉलेज, लोहरदगा से बीए की पढ़ाई पूरी की। पांच मार्च 1979 को उनका विवाह लीला देवी से हुआ और उनके तीन बेटे हैं। उनका सफर उस दौर में शुरू हुआ, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और पलामू बिहार का हिस्सा था।

लातेहार विधानसभा से शुरू हुई राजनीति

ब्रजमोहन राम के राजनीतिक जीवन का अहम पड़ाव बिहार विधानसभा रहा। वह वर्ष 1991 से 1995 तक लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के सदस्य रहे।इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर जनता का प्रतिनिधित्व किया और अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाया।

लगातार तीन बार रहे लोकसभा सांसद

वर्ष 1996 में ब्रजमोहन राम 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद वर्ष 1998 में वे 12वीं लोकसभा और 1999 में 13वीं लोकसभा के लिए दोबारा चुने गए। इस तरह वह पलामू से लगातार तीन बार लोकसभा सदस्य रहे।

लगातार तीन कार्यकाल के कारण उन्हें संसदीय कामकाज का लंबा अनुभव मिला। संसद में उनकी भूमिका सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कई अहम संसदीय समितियों में भी जिम्मेदारी निभाई।

संसदीय समितियों में निभाई अहम भूमिका

वर्ष 1996-97 में वह गृह मामलों की समिति और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सदस्य रहे। इसी अवधि में उन्होंने इस्पात एवं खान मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के साथ भी काम किया। रेल मंत्रालय की पूर्वी रेलवे से संबंधित अनौपचारिक समिति में भी उनकी भागीदारी रही। वर्ष 1998-99 में उन्होंने ऊर्जा समिति और उसकी विद्युत उपसमिति-I में काम किया। साथ ही कोयला मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति में भी उनकी भागीदारी रही।

वर्ष 2000 से 2004 के बीच वह परिवहन एवं पर्यटन समिति के सदस्य रहे। इसके अलावा रेल मंत्रालय की सलाहकार समिति में स्थायी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में भी उन्होंने योगदान दिया।

झारखंड के लिए क्यों खास है यह नियुक्ति

ब्रजमोहन राम का राज्यपाल बनना पलामू और झारखंड के लिए भी चर्चा का विषय है। ग्रामीण परिवेश और चंदवा जैसे कस्बे से निकलकर वे अब एक राज्य के संवैधानिक प्रमुख के पद तक पहुंचे हैं।

उनका सफर विधानसभा से लेकर संसद और अब राजभवन यानी लोकभवन तक का रहा है। हालांकि राज्यपाल के रूप में उनकी प्राथमिकताओं या आगे की योजनाओं को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

ओडिशा के 28वें राज्यपाल के रूप में ब्रजमोहन राम का शपथ ग्रहण राज्य के संवैधानिक इतिहास में नया अध्याय है। पलामू से तीन बार सांसद रहे राम को विधानसभा और संसद दोनों का लंबा अनुभव है। उन्होंने हरि बाबू कंभमपति की जगह ली है। चंदवा के ग्रामीण परिवेश से निकला उनका सफर अब भुवनेश्वर के लोकभवन तक पहुंचा है। अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल कैसा रहता है और राज्य सरकार के साथ उनका तालमेल किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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Author: Sanjna Gupta

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