West Bengal News: कोलकाता के बेहला इलाके के सरसुना थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़के, उसके पिता और दोस्त को कथित रूप से नग्न अवस्था में गली में घुमाने और मारपीट करने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मंगलवार को पुलिस ने इन्हीं आरोपियों को बिना शर्ट, शॉर्ट्स पहने, नंगे पैर और कमर में रस्सी बांधकर उसी इलाके में ले जाकर घटना का पुनर्निर्माण कराया। कुछ स्थानीय लोगों ने इसे त्वरित कार्रवाई बताया, जबकि पुलिस का कहना है कि यह क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन का हिस्सा था। पूरा मामला एक प्रेम संबंध से शुरू हुआ था और अब गंभीर धाराओं में जांच चल रही है।
बेहला सरसुना कांड की शुरुआत कैसे हुई?
घटना रविवार शाम की बताई जा रही है। सरसुना थाना क्षेत्र के खुदीराम पल्ली या खालपार मैदान के पास एक 17-18 वर्षीय लड़का अपने लगभग 19 वर्षीय दोस्त के साथ अपनी 13 वर्षीय प्रेमिका से मिलने गया था। दोनों के बीच नजदीकी या चुंबन की बात किसी ने देख ली और लड़की के परिवार को सूचना दे दी। लड़की के मामा और उनके सहयोगी मौके पर पहुंचे। उन्होंने लड़के और उसके दोस्त को जबरन घर या पास की जगह ले जाकर बंधक बना लिया और कथित तौर पर मारपीट की। आरोप है कि कांच की बोतलों से भी पीटा गया। बाद में लड़के के पिता को बुलाया गया और उनके साथ भी मारपीट की गई।
पीड़ितों को नग्न घुमाने की धमकी कैसे दी गई?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि लड़की के मामा ने बंदूक दिखाकर पिता से कहा कि वे अपने बेटे को गोली मार दें, नहीं तो तीनों नग्न होकर सड़क पर घूमें। जान का खतरा बताते हुए विकल्प दिया गया। डर के मारे पीड़ितों ने नग्न होकर चलना चुना। उन्हें घर के बाहर गली में करीब 50 मीटर तक नग्न अवस्था में घुमाया गया। आसपास मौजूद लोगों ने वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर फैल गया। लड़के की मां के साथ भी कथित मारपीट का आरोप है और उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की और किन्हें गिरफ्तार किया?
वीडियो वायरल होने और शिकायत मिलने पर सरसुना थाने में भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इनमें हत्या के प्रयास, सामूहिक मारपीट, गंभीर चोट, अवैध बंधक, आपराधिक धमकी, अपहरण और आर्म्स एक्ट की धाराएं शामिल हैं। पुलिस ने लड़की के पिता, मामा और एक अन्य रिश्तेदार या सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया। मां को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। गिरफ्तारों में प्रदीप सरकार और राहुल बर्मन (भुलू) जैसे नाम सामने आए हैं। पुलिस अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है, जिनमें वीडियो बनाने वाले और बंदूक उपलब्ध कराने वाले शामिल हो सकते हैं।
पुलिस ने आरोपियों को बिना शर्ट क्यों घुमाया?
मंगलवार को पुलिस आरोपियों को उसी इलाके में लेकर पहुंची। तीनों को शॉर्ट्स पहनाकर, बिना शर्ट, नंगे पैर और कमर में रस्सी बांधकर सड़क पर चलाया गया। भारी पुलिस और अर्धसैनिक बल की मौजूदगी रही। कुछ रिपोर्टों के अनुसार स्थानीय लोग इकट्ठा हो गए और फिल्मांकन किया। पुलिस का आधिकारिक रुख यह है कि यह घटनास्थल का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रिक्रिएशन) था, ताकि आरोपी बता सकें कि क्या और कैसे हुआ। एक अधिकारी ने कहा कि भीड़ में फरार होने से रोकने के लिए बिना शर्ट रखा गया, ताकि आसानी से पहचाने जा सकें। कुछ लोगों ने इसे ऑन द स्पॉट इंसाफ बताया, लेकिन कानूनी रूप से यह विवादास्पद माना जा रहा है।
मामले में क्या आरोप और जांच की स्थिति है?
पीड़ितों का कहना है कि बंदूक की धमकी के कारण उन्होंने अपमान सहन किया। पुलिस बंदूक के इस्तेमाल की जांच कर रही है और अब तक हथियार बरामद होने की पुष्टि नहीं हुई है। लड़के की मां का भी मेडिकल किया गया। अतिरिक्त आरोपियों की तलाश जारी है। स्थानीय स्तर पर गुस्सा है और कुछ लोगों ने लड़की के घर पर हमला भी किया था। पुलिस का दावा है कि गिरफ्तारी तुरंत की गई और जांच आगे बढ़ रही है। अदालत में पेशी भी हुई है और हिरासत बढ़ाई गई है।
इस तरह की घटनाओं का सामाजिक पहलू क्या है?
ऐसे मामले अक्सर पारिवारिक सम्मान, नाबालिगों के रिश्तों और भीड़ न्याय की प्रवृत्ति से जुड़े होते हैं। 13 वर्षीय लड़की के साथ संबंध होने पर परिवार का गुस्सा समझा जा सकता है, लेकिन नग्न घुमाना और बंदूक की धमकी कानून के दायरे से बाहर है। वीडियो वायरल होने से दबाव बढ़ा और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में कानून की प्रक्रिया का पालन जरूरी है। पुलिस द्वारा आरोपियों को भी उसी तरह घुमाना कई लोगों को न्याय लग सकता है, लेकिन यह कानूनी प्रक्रिया की जगह नहीं ले सकता।
आगे क्या हो सकता है और लोगों की प्रतिक्रिया क्या है?
जांच जारी है और और लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है। पीड़ितों की सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत जुटाने पर फोकस है। सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं कुछ इसे त्वरित न्याय मान रहे हैं तो कुछ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि क्राइम रिकंस्ट्रक्शन सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन अर्धनग्न हालत में घुमाना अनावश्यक अपमान लग सकता है। पूरा मामला अदालत में तय होगा। फिलहाल पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की जांच हो रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
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Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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