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Bhutan Lake Burst: भूटान में शिंताफू झील फटने से हड़कंप! असम और उत्तर बंगाल में बाढ़ का रेड अलर्ट

Bhutan Lake Burst: भूटान के गासा जिले में गुरुवार शाम एक ग्लेशियल झील के फटने से अचानक बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। शिंताफू झील से निकला पानी मो छू नदी के रास्ते नीचे की ओर बढ़ रहा है और भारत में संकोश नदी के जरिए असम तथा पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी करते हुए निचले इलाकों के लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। स्थिति पर नजर रखने के लिए आपदा प्रबंधन टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।

भूटान में अब तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहां के अधिकारियों ने इलाके को पहले ही खाली करा दिया था। हालांकि भारत की तरफ से एहतियाती कदम बड़े पैमाने पर उठाए जा रहे हैं क्योंकि पानी के साथ मलबा, लकड़ी और अन्य सामग्री भी बहकर आने की संभावना है।

भूटान में क्या हुआ?

घटना गुरुवार शाम भूटान के गासा जिले में वकिला पर्वत के नीचे स्थित शिंताफू झील में हुई। यह झील मो छू नदी के उद्गम क्षेत्र में है और भूटान की संभावित खतरनाक ग्लेशियल झीलों में शामिल मानी जाती है। झील फटने से लगभग 7.4 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी अचानक बाहर निकल आया।

तेज बहाव ने गासा त्साछू नामक प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत पर बनी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया। कुछ बेली ब्रिज बह जाने और लाया गांव जाने वाली सड़क का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की खबरें हैं। एक सोलर सिंचाई परियोजना को भी आंशिक नुकसान पहुंचा। भूटान की मीडिया और अधिकारियों के अनुसार, पानी के तेज बहाव और अंधेरे के कारण नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है। इलाके को समय रहते खाली कर दिए जाने से जान का नुकसान नहीं हुआ।

भारत में किन इलाकों में खतरा है?

भारत सरकार ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। संकोश नदी प्रणाली पर रेड अलर्ट है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग की पहाड़ियों तथा तराई-डुआर्स क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। असम के धुबरी जिले को भी संभावित प्रभावित क्षेत्र बताया गया है।

राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने कहा कि झील से निकला पानी मो छू नदी के रास्ते संकोश की ओर बढ़ रहा है और अगले कुछ घंटों में मैदानी इलाकों तक पहुंच सकता है। वन मंत्री मनोज कुमार उरांव ने भी नदी किनारे के गांवों और चाय बागानों के लोगों को तुरंत ऊंचे स्थानों पर जाने की अपील की। अधिकारियों का कहना है कि पानी के साथ मरी मछलियां, बड़े लकड़ी के टुकड़े और कंक्रीट का मलबा भी आ सकता है, जिससे नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?

अलीपुरद्वार और आसपास के जिला प्रशासन ने रातभर मुनादी और सायरन के जरिए लोगों को सतर्क किया। पुलिस, जिलाधिकारी, ब्लॉक स्तर के अधिकारी और भूटान के अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन टीम सक्रिय है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं या पहुंच रही हैं। सिविल डिफेंस स्वयंसेवकों को भी राहत कार्यों में लगाया गया है।

अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ ने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताते हुए कहा कि प्रशासन पूरी तरह तैयार है। नदी के जलस्तर और बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाद में बहाव की तीव्रता में थोड़ी कमी आने की खबर भी मिली, लेकिन प्रशासन ने अलर्ट नहीं हटाया है।

कितने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया?

अलीपुरद्वार जिले में 10 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इनमें से करीब 4 से 5 हजार लोग स्कूल भवनों में बनाए गए राहत शिविरों में ठहरे हुए हैं। बाकी लोगों को अन्य सुरक्षित इलाकों में भेजा गया। शिविरों में सूखा राशन, पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।

अधिकारियों ने कहा कि नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्राथमिकता दी गई। प्रशासन ने अफवाहों से बचने और केवल सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) क्या होता है?

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ ऊंचे पहाड़ी इलाकों में होने वाली एक अचानक और खतरनाक बाढ़ है। ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलों का पानी प्राकृतिक बांध या मोरेन के पीछे रुका रहता है। जब यह बांध टूटता है या उसमें दरार आती है, तो बड़ी मात्रा में पानी तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहने लगता है। यह पानी अपने साथ चट्टानें, मिट्टी, पेड़ और मलबा बहाकर ले जाता है। हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ा है। भूटान में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए वहां की कई झीलों की निगरानी की जाती है।

फिलहाल दोनों देशों के अधिकारी मिलकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। भारत में आपदा प्रबंधन की टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। जलस्तर में कोई अचानक बढ़ोतरी होने पर और कदम उठाए जाएंगे। लोगों से अपील है कि वे नदी और निचले इलाकों से दूर रहें तथा स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। स्थिति लगातार अपडेट हो रही है और आगे की जानकारी आने वाले घंटों में स्पष्ट हो सकती है।

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Author: Sanjna Gupta

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