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बंगाल में राजनीतिक हिंसा के पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी, दस्तावेज जुटाना बना बड़ी चुनौती

2 घंटे पहले
Bengal Political Violence Victims
Bengal Political Violence Victims

Bengal Political Violence Victims: पश्चिम बंगाल सरकार ने पिछले 25 वर्षों में राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने की योजना अधिसूचित की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की घोषणा के बाद 30 अक्टूबर को जारी अधिसूचना के मुताबिक एक जनवरी 2001 या उसके बाद हुई घटनाओं में मारे गए व्यक्ति के एक पात्र आश्रित को ग्रुप डी पद पर नियुक्ति का मौका मिलेगा। योजना का मकसद उन परिवारों को आर्थिक सहारा देना है जिन्होंने हिंसा में कमाने वाला सदस्य खो दिया। हालांकि 25 साल पुराने मामलों के दस्तावेज जुटाना और मौत को राजनीतिक हिंसा से जोड़ना सबसे बड़ी बाधा बन सकती है।

योजना क्या है और किसे लाभ मिलेगा?

अधिसूचना के अनुसार योजना का नाम “वेस्ट बंगाल स्कीम फॉर प्रोवाइडिंग गवर्नमेंट एम्प्लॉयमेंट (ग्रुप डी पोस्ट) टू वन एलिजिबल फैमिली मेंबर ऑफ विक्टिम्स किल्ड इन पॉलिटिकल वायलेंस, 2026” है। यह एक बार का अपवाद है और अतिरिक्त पद बनाए जा सकते हैं। पात्र आश्रित में मृतक का जीवनसाथी, बेटा, बेटी या तीसरा लिंग का बच्चा शामिल है। अगर पीड़ित अविवाहित था तो निर्भर भाई या बहन भी आवेदन कर सकते हैं। हर परिवार से सिर्फ एक सदस्य को लाभ मिलेगा। परिवार की मासिक आय 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और कोई सदस्य नियमित सरकारी नौकरी में या आयकर दाता नहीं होना चाहिए। आवेदक भारतीय नागरिक और बंगाल का निवासी होना चाहिए। आमतौर पर 8वीं पास और 1 जनवरी 2026 को कम से कम 18 वर्ष का होना जरूरी है। सामान्य वर्ग के लिए उम्र की ऊपरी सीमा 45 और एससी/एसटी के लिए 50 वर्ष है। कुछ मामलों में छूट पर विचार हो सकता है।

आवेदन कैसे और कहां करना होगा?

आवेदक को घटना वाले जिले के जिलाधिकारी के पास आवेदन देना होगा। साथ में मृत्यु प्रमाणपत्र, मृतक से रिश्ते का सबूत, एफआईआर, आरोपपत्र और अदालत में आरोप तय होने से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे। जिला स्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी (जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में) आवेदन की जांच करेगी और 90 दिनों के अंदर फैसला करेगी। कमेटी यह प्रमाणित करेगी कि मौत राजनीतिक हिंसा के कारण हुई। मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिलाधिकारी के पास आवेदन करें, ग्रुप डी नौकरी दी जाएगी।

दस्तावेज जुटाना क्यों मुश्किल होगा?

25 साल पुराने मामलों में सबसे बड़ी समस्या दस्तावेजों की है। कई पुरानी एफआईआर, आरोपपत्र या अदालती रिकॉर्ड अब आसानी से उपलब्ध नहीं हो सकते। कुछ मामलों में जांच अधूरी रही होगी या मुकदमा लंबित हो सकता है। कई परिवारों के पास मृत्यु प्रमाणपत्र तो होगा, लेकिन यह साबित करना कठिन हो सकता है कि मौत राजनीतिक संघर्ष में हुई। अलग-अलग दलों के आरोप-प्रत्यारोप के कारण कुल मृतकों की कोई आधिकारिक संख्या भी उपलब्ध नहीं है। अनुमानों में वाममोर्चा और तृणमूल शासनकाल दोनों के दौरान सैकड़ों मौतें बताई जाती हैं, लेकिन सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं हुआ है। ऐसे में हर मामले को समान आधार पर प्रमाणित करना चुनौतीपूर्ण होगा।

उम्र और योग्यता की शर्तें कैसे प्रभावित कर सकती हैं?

पुराने मामलों में कई परिवारों के बच्चे अब बड़े हो चुके होंगे। उम्र की ऊपरी सीमा और शैक्षणिक योग्यता (8वीं पास) कई आवेदकों के लिए बाधा बन सकती है। जिन परिवारों ने 15-20 साल पहले कमाने वाला सदस्य खोया, उनके आश्रित अब योजना की शर्तों में फिट न बैठें। इसलिए दस्तावेजों के साथ-साथ परिवार की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति का आकलन भी जरूरी माना जा रहा है। योजना का मानवीय पक्ष यह है कि लंबे समय से संघर्ष कर रहे परिवारों को सहारा मिले, लेकिन प्रशासनिक शर्तें इसे सीमित कर सकती हैं।

योजना को निष्पक्ष कैसे लागू किया जाए?

सबसे बड़ी कसौटी यह होगी कि योजना राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर लागू हो। वाममोर्चा काल में मारे गए तृणमूल या कांग्रेस कार्यकर्ताओं के परिवार हों या तृणमूल शासन में मारे गए माकपा-भाजपा समर्थक, सभी पर एक जैसे मापदंड लागू होने चाहिए। दस्तावेज, पात्रता और वास्तविक जरूरत को आधार बनाना होगा। बंगाल में राजनीतिक हिंसा लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। सत्ता बदलने के बावजूद हिंसा का सिलसिला जारी रहा। यह योजना पीड़ित परिवारों को राहत देने की कोशिश है, लेकिन दस्तावेज और निष्पक्षता दोनों पर इसकी सफलता निर्भर करेगी। आगे जिला स्तर पर आवेदन कैसे प्रोसेस होते हैं और कितने परिवारों को लाभ मिलता है, यह देखने वाली बात होगी।

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Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

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कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

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