बुधवार, 4 नवंबर 2026
लाइव देखें
हॉट टॉपिक्स
ब्रेकिंग

Bihar News: सड़क निर्माण में होगा नदी की गाद का इस्तेमाल, केंद्र-राज्य ने मिलाया हाथ

मुख्य बातें

  • बिहार और केंद्र के बीच गाद उपयोग को लेकर क्या समझौता हुआ?
  • नीतीश कुमार की पुरानी मांग क्या थी और अब उसे कैसे गति मिली?
  • गाद से सड़क बनाने से बाढ़ नियंत्रण और खेती को क्या फायदा होगा?
  • सड़क निर्माण में गाद के इस्तेमाल से निर्माण लागत और कृषि भूमि पर क्या असर पड़ेगा?
2 घंटे पहले
Bihar News
Bihar News

Bihar News: बिहार में हर साल बाढ़ से जूझने वाले इलाकों के लिए नदियों की गाद अब सिर्फ समस्या नहीं, बल्कि विकास का संसाधन बन सकती है। केंद्र सरकार और बिहार सरकार के बीच नदियों व जलस्रोतों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालकर उसका उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में करने का समझौता हुआ है। दिल्ली में मंगलवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इसे जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनकी पुरानी मांग को सराहा।

बिहार और केंद्र के बीच गाद उपयोग को लेकर क्या समझौता हुआ?

मंगलवार को दिल्ली में हुए समझौते के तहत नदियों, जलाशयों और अन्य जलस्रोतों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकाली जाएगी और उसे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। इस पहल के तहत 16 निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में करीब 243 लाख घनमीटर उपयुक्त गाद का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा 27 प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए 835 लाख घनमीटर गाद के उपयोग की योजना है। भविष्य की परियोजनाओं में इसका इस्तेमाल तकनीकी उपयुक्तता और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार लंबे समय से गाद प्रबंधन की जरूरत उठाते रहे हैं और अब केंद्र के सहयोग से इस दिशा में ठोस पहल हुई है।

नीतीश कुमार की पुरानी मांग क्या थी और अब उसे कैसे गति मिली?

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से नदियों की गाद निकालने और उसका उपयोगी इस्तेमाल करने की मांग करते रहे हैं। बिहार में गंगा, कोसी, गंडक जैसी नदियों में हर साल बड़ी मात्रा में गाद जमा होती है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता है और जल धारण क्षमता घटती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को नीतीश कुमार से मुलाकात की और इस मांग को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें सराहा। समझौते के बाद अब गाद को वैज्ञानिक जांच के बाद सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे एक ओर जलस्रोतों की सफाई होगी, वहीं दूसरी ओर निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने इसे बिहार के जल प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।

गाद से सड़क बनाने से बाढ़ नियंत्रण और खेती को क्या फायदा होगा?

नदियों, जलाशयों और अन्य जलस्रोतों में जमा गाद से उनकी जलवहन और जलधारण क्षमता प्रभावित होती है। वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने से जलप्रवाह और जलनिकासी में सुधार की उम्मीद है। इससे बाढ़ के जोखिम को कम करने, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने और भूजल रिचार्ज में मदद मिल सकती है। समझौते के तहत गाद निकालने का काम तकनीकी जांच के बाद चिन्हित स्थानों पर ही किया जाएगा। निकाली गई सामग्री की गुणवत्ता जांचने के बाद ही उसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकेगा। नदी के पारिस्थितिकी तंत्र, तटबंधों, पुलों और दूसरे ढांचों को नुकसान से बचाने के लिए निगरानी और डिजिटल रिकॉर्ड की व्यवस्था भी रखी गई है।

सड़क निर्माण में गाद के इस्तेमाल से निर्माण लागत और कृषि भूमि पर क्या असर पड़ेगा?

इस पहल से एक ओर जलस्रोतों की सफाई और बाढ़ प्रबंधन को मजबूती मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण के लिए मिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे कृषि भूमि की उपजाऊ मिट्टी पर निर्भरता कम करने और निर्माण लागत घटाने में भी मदद मिल सकती है। बिहार में सड़क परियोजनाओं के लिए अक्सर खेतों से मिट्टी ली जाती है, जिससे खेती पर असर पड़ता है। गाद का इस्तेमाल होने से यह दबाव कम हो सकता है। हालांकि, भविष्य की परियोजनाओं में इसका इस्तेमाल तकनीकी उपयुक्तता और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा। अब सबसे अहम चुनौती इस योजना को जमीन पर प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से लागू करने की होगी।

इस समझौते के क्रियान्वयन में किन सावधानियों का ध्यान रखा जाएगा?

समझौते में स्पष्ट प्रावधान है कि गाद निकालने का काम केवल तकनीकी जांच के बाद चिन्हित स्थानों पर ही होगा। निकाली गई गाद की गुणवत्ता की जांच के बाद ही उसे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकेगा। नदी के पारिस्थितिकी तंत्र, तटबंधों, पुलों और अन्य ढांचों को नुकसान से बचाने के लिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। डिजिटल रिकॉर्ड भी रखे जाएंगे ताकि काम पारदर्शी रहे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह पहल बिहार के विकास के लिए दोहरी उपयोगिता रखती है। एक तरफ बाढ़ नियंत्रण और जल प्रबंधन मजबूत होगा, दूसरी तरफ सड़क निर्माण में मदद मिलेगी। आगे देखना होगा कि यह योजना कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू होती है।

यह समझौता बिहार के लिए बाढ़ प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास दोनों दिशाओं में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नीतीश कुमार की पुरानी मांग को केंद्र के सहयोग से नई रफ्तार मिली है। अब क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।

Read More Here:- 

Odisha News: ओडिशा में तैयार हो रही हॉकी की नई पौध, 17 जिलों में 33 ग्रासरूट सेंटरों से संवर रहा भविष्य

अभय कुमार चतुर्वेदी बने झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष, प्रशांत सिंह फिर बीसीआई सदस्य

Rama Ekadashi Rashifal 5 November: मेष से मीन तक किस राशि को मिलेगा भाग्य का साथ, जानें पूरा भविष्यफल

Odisha News: ओडिशा पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कार से डेढ़ क्विंटल गांजा बरामद; तीन तस्कर गिरफ्तार

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

Sanjana Gupta Hindi Content Writer | New Media Kiran Sanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

कवरेज: Sanjna Gupta, News Media Kiran

Sanjna Gupta

Sanjana GuptaHindi Content Writer | New Media KiranSanjana Gupta is a Hindi Content Writer at New Media Kiran, creating accurate, engaging, and reader-friendly news and web content for digital platforms. She specializes in well-researched Hindi articles that keep audiences informed and interested.

अपनी राय दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *