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Independence Day Historical Places: इस 15 अगस्त घूम आएं भारत की आजादी से जुड़ी ये 17 ऐतिहासिक जगहें

Independence Day Historical Places: हर साल 15 अगस्त का दिन भारत के हर नागरिक के दिल में एक खास जगह रखता है, और इस स्वतंत्रता दिवस पर अगर घर बैठकर जश्न मनाने के बजाय कहीं घूमने की योजना बनाई जाए तो यह अनुभव और भी यादगार बन सकता है। देश में ऐसी कई ऐतिहासिक जगहें मौजूद हैं, जो न सिर्फ घूमने के लिहाज से खास हैं बल्कि आजादी की लड़ाई और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष की गवाह भी रही हैं। इन जगहों की यात्रा करते हुए न केवल इतिहास को करीब से महसूस किया जा सकता है, बल्कि देशभक्ति की भावना भी और गहरी होती है। आइए जानते हैं भारत की ऐसी 17 ऐतिहासिक और देशभक्ति से भरपूर जगहों के बारे में, जिनका दौरा इस इंडिपेंडेंस डे को खास बना सकता है।

Independence Day Historical Places: दिल्ली और अमृतसर से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत

राजधानी दिल्ली का लाल किला आजादी के जश्न का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है, क्योंकि हर साल 15 अगस्त को यहीं से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं। इस ऐतिहासिक किले पर पहुंचकर स्वतंत्रता दिवस का माहौल और भी खास महसूस होता है। वहीं अमृतसर का जलियांवाला बाग देश के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक की याद दिलाता है, जहां 13 अप्रैल 1919 को निहत्थे लोगों पर ब्रिटिश सैनिकों ने गोलियां चलाई थीं। आज यह स्थान शहीदों की याद में बने स्मारक के रूप में मौजूद है और आजादी की कीमत को याद दिलाता है।

अंडमान की सेल्युलर जेल और गांधीजी से जुड़े आश्रम

अगर आजादी की लड़ाई को गहराई से समझना है तो अंडमान की सेल्युलर जेल की यात्रा जरूर करनी चाहिए। ‘काला पानी’ के नाम से मशहूर इस जेल में अंग्रेजों ने कई स्वतंत्रता सेनानियों को कैद रखा था, और आज यह राष्ट्रीय स्मारक के रूप में उस संघर्ष की कहानी सुनाता है। इसके अलावा अहमदाबाद का साबरमती आश्रम भी स्वतंत्रता आंदोलन की महत्वपूर्ण जगहों में शामिल है, क्योंकि यहीं से महात्मा गांधी ने 1930 में ऐतिहासिक दांडी मार्च की शुरुआत की थी। यहां गांधीजी के जीवन, सत्याग्रह और स्वदेशी आंदोलन से जुड़ी कई बातें करीब से देखी जा सकती हैं।

दांडी से लेकर अगस्त क्रांति मैदान तक का सफर

गुजरात का दांडी गांधीजी की ऐतिहासिक नमक यात्रा का आखिरी पड़ाव था, और यहां मौजूद नेशनल साल्ट सत्याग्रह मेमोरियल 1930 के दांडी मार्च और नमक कानून के खिलाफ हुए आंदोलन की गाथा बयां करता है। दूसरी ओर मुंबई का अगस्त क्रांति मैदान 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ा हुआ है, जहां पहुंचकर उस दौर को महसूस किया जा सकता है जब अंग्रेजों के खिलाफ ‘करो या मरो’ का नारा पूरे देश में गूंज उठा था। इसी कड़ी में पुणे का आगा खान पैलेस भी आजादी के आंदोलन से जुड़ी अहम जगह है, जहां भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी समेत कई नेताओं को नजरबंद रखा गया था।

झांसी के किले से काकोरी तक क्रांति की गाथा

उत्तर प्रदेश का झांसी किला वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी की कहानी के बिना अधूरा है, क्योंकि 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ उनका संघर्ष आज भी लोगों को प्रेरित करता है। इसी राज्य का काकोरी 1925 की काकोरी ट्रेन एक्शन घटना से जुड़ा है, जिसने क्रांतिकारियों के आंदोलन को ब्रिटिश शासन के खिलाफ नई पहचान दी थी। वहीं बिहार का चंपारण महात्मा गांधी के शुरुआती बड़े आंदोलनों में शामिल रहा, जहां किसानों की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ चंपारण सत्याग्रह आगे चलकर आजादी की लड़ाई में गांधीवादी आंदोलन की ताकत का उदाहरण बना।

बैरकपुर, चौरी चौरा और मुंबई की गांधीवादी विरासत

पश्चिम बंगाल का बैरकपुर 1857 के विद्रोह से जुड़ा हुआ है, जहां मंगल पांडे के विद्रोह ने इस जगह को भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में खास स्थान दिलाया। उत्तर प्रदेश की चौरी चौरा घटना ने 1922 में असहयोग आंदोलन की दिशा ही बदल दी थी, और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह जगह उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने का शानदार अवसर देती है। मुंबई का मणि भवन भी महात्मा गांधी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जगह है, जहां गांधीजी के मुंबई प्रवास और उनके आंदोलनों का इतिहास करीब से समझा जा सकता है।

सेवाग्राम आश्रम से राजघाट तक गांधीजी की छाप

महाराष्ट्र के वर्धा में स्थित सेवाग्राम आश्रम गांधीजी के जीवन और विचारों से गहराई से जुड़ा रहा है, जहां उनके सादगी भरे जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। दिल्ली का राजघाट महात्मा गांधी की समाधि स्थल है, और यह शांत वातावरण वाली जगह गांधीजी के सत्य और अहिंसा के विचारों को याद करने का अवसर देती है। इन दोनों जगहों की यात्रा गांधीजी के जीवन दर्शन को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Independence Day Historical Places: आनंद भवन और नेताजी भवन की ऐतिहासिक कहानी

प्रयागराज का आनंद भवन नेहरू परिवार और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है, जहां जाकर उस दौर के राजनीतिक माहौल और स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ी कई यादों को करीब से जाना जा सकता है। वहीं कोलकाता का नेताजी भवन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और उनके संघर्ष से जुड़ा है। जिन लोगों को नेताजी की कहानी और आजाद हिंद फौज के इतिहास में गहरी दिलचस्पी है, उनके लिए यह जगह ट्रैवल लिस्ट में शामिल करने लायक है।

इस स्वतंत्रता दिवस पर देश की इन ऐतिहासिक जगहों की यात्रा न सिर्फ घूमने-फिरने का एक बेहतरीन मौका देती है, बल्कि आजादी की लड़ाई में शामिल स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष को करीब से महसूस करने का जरिया भी बनती है। लाल किले से लेकर सेल्युलर जेल, साबरमती आश्रम से लेकर राजघाट तक, हर जगह अपने आप में एक अलग कहानी समेटे हुए है। इन जगहों पर जाकर न केवल इतिहास की गहराई को समझा जा सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक आजादी के महत्व को पहुंचाने में भी मदद मिलती है। इस 15 अगस्त परिवार के साथ इनमें से किसी एक जगह की यात्रा जरूर करनी चाहिए।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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