Dehra, Kangra] | हिमाचल प्रदेश के देहरा स्थित फैमिली कोर्ट ने एक 19 साल पुराने विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया है।
एडिशनल प्रिंसिपल जज सपना पांडेय ने क्रूरता और परित्याग को आधार मानते हुए 58 वर्षीय पति की याचिका स्वीकार कर ली और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की डिक्री पारित की।
क्या था पूरा मामला?
1. 2007 में हुआ था विवाह
दोनों का विवाह 2007 में हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। दंपती की कोई संतान नहीं है।
2. 2010 से अलगाव
पति ने याचिका में आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ही पत्नी का व्यवहार बदल गया।
- परिवार के साथ दुर्व्यवहार
- वैवाहिक जिम्मेदारियां नहीं निभाना बिना बताए घर से चले जाना
- 2010* में पत्नी घर छोड़कर चली गई और दोबारा साथ रहने से इनकार कर दिया।
3. समझौते के प्रयास फेल
पति ने बताया कि पंचायत स्तर पर कई बार समझौते की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद उन्होंने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की।
कोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान पत्नी लगातार कोर्ट में उपस्थित नहीं हुई, जिसके कारण मामला एकतरफा (एक्स-पार्टी) चला।
कोर्ट ने माना कि:
- पति ने क्रूरता और परित्याग के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य दिए
- पत्नी की ओर से कोई प्रतिवाद नहीं किया गया
- 2010 से अलग रह रहे हैं, इसलिए वैवाहिक संबंध सामान्य होने की संभावना नहीं बची
इन आधारों पर कोर्ट ने विवाह विच्छेद की डिक्री दे दी।
निष्कर्ष:
यह फैसला दिखाता है कि लंबे समय तक अलगाव और क्रूरता साबित होने पर कोर्ट विवाह तोड़ने का फैसला ले सकता है, चाहे शादी को कितने भी साल क्यों न हो गए हों।
स्रोत: फैमिली कोर्ट देहरा, कांगड़ा



