Jharkhand Student Protest 2026: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को यह विरोध प्रदर्शन लगातार 19वें दिन भी जारी रहा, जिसमें आंदोलनकारी छात्र जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग पर अड़े हुए हैं। छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन किसी भी सूरत में खत्म नहीं होगा। इस बीच भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। सरकार और छात्रों के बीच अब तक हुई कई दौर की बातचीत भी अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
Jharkhand Student Protest 2026: धरना स्थल पर लाइट बंद होने से बढ़ी आशंका
आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के मुताबिक मंगलवार देर रात जिला उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धरना स्थल के आसपास गश्त करते हुए नजर आए। छात्रों का आरोप है कि इस दौरान कुछ समय के लिए मैदान और आसपास की सड़क की स्ट्रीट लाइट अचानक बंद हो गई, जिससे उनके मन में यह आशंका पैदा हुई कि प्रशासन विधानसभा घेराव के दौरान अपनाए गए तरीके की तरह ही लाइट बंद कर आंदोलन को समाप्त कराने की कोशिश कर सकता है। हालांकि छात्रों ने यह भी बताया कि उनके टेंट के भीतर लाइट और पंखे लगातार चलते रहे, जिससे स्थिति को लेकर तनाव तो बना रहा, लेकिन कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई।
भूख हड़ताल से बिगड़ी दो छात्रों की सेहत
आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सेहत को लेकर भी चिंताजनक खबरें सामने आ रही हैं। छात्रों के अनुसार सबसे पहले भूख हड़ताल पर बैठे राहुल की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके कुछ समय बाद छात्रा अबीबा की भी हालत बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा। फिलहाल रूपेश और सविता अब भी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं और आज उनकी भूख हड़ताल का नौवां दिन है। छात्रों का दावा है कि दोनों केवल पानी पीकर अपना विरोध जारी रखे हुए हैं, जो उनकी मांगों को लेकर उनकी दृढ़ता को दर्शाता है।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की हालत पर नजर
आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो करीब 10 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन बार-बार की गई अपीलों के बावजूद उन्होंने कुछ भी खाने से साफ इनकार कर दिया है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की निगरानी कर रही है। प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि सरकार की ओर से अब तक उनके प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए कोई औपचारिक न्योता नहीं भेजा गया है, जिससे छात्रों में सरकार के रवैये को लेकर नाराजगी और बढ़ गई है।
लाठीचार्ज के विरोध में एकदिवसीय भूख हड़ताल का ऐलान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ‘झारखंड छात्र न्याय’ के बैनर तले आंदोलनरत छात्रों ने सोमवार को विधानसभा की ओर मार्च के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में एकदिवसीय भूख हड़ताल और काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारों के साथ-साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए, वहीं दूसरी ओर रांची पुलिस का कहना है कि इस झड़प में उसके 14 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
लाठीचार्ज के बाद राजनीतिक घमासान तेज
छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई। पार्टी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा नीत सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि वह प्रदर्शनकारी युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। इसके साथ ही पार्टी ने आधी रात के आसपास धरना स्थल का दौरा करने वाले सरकारी अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी मंगलवार को विधानसभा की ओर एक अलग मार्च निकालकर अपना समर्थन जाहिर किया।
मौन जुलूस से जताया गया विरोध
‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच’ की ओर से मंगलवार शाम रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक मौन जुलूस निकाला गया। संगठन के नेताओं ने साफ किया कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और जल्द ही विरोध प्रदर्शन को और तेज करने के लिए नई रणनीति की घोषणा की जाएगी। आंदोलन के तहत फिलहाल छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिनमें से दो को तबीयत बिगड़ने के बाद रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। यह स्थिति दिखाती है कि छात्र अपनी मांगों को लेकर किसी भी तरह पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
Jharkhand Student Protest 2026: छठे दौर की वार्ता भी रही बेनतीजा
सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को छठे दौर की बातचीत हुई, लेकिन इसके बावजूद गतिरोध पूरी तरह बरकरार रहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीरता की कमी बरतने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बार फिर दोहराया है कि उनकी सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को यह आश्वासन भी दिया कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। हालांकि साथ ही उन्होंने भाजपा पर छात्रों के इस आंदोलन को राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया है।
झारखंड में चल रहा यह छात्र आंदोलन अब सिर्फ भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की राजनीति का भी अहम हिस्सा बन चुका है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की बिगड़ती सेहत, सरकार और छात्रों के बीच बनी दूरी और लगातार तेज होता राजनीतिक टकराव, यह सभी संकेत इस बात के हैं कि मामला जल्द सुलझने वाला नहीं है। छात्रों की मुख्य मांग सीबीआई जांच और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने की है, जबकि सरकार अब तक सीमित रियायतों की पेशकश तक ही सीमित रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों पक्षों के बीच यह गतिरोध किस तरह समाप्त होता है।
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