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Child Safety Tips: ‘तुम्हारे मम्मी-पापा तुम्हें समझते नहीं’… बच्चों को सिखाएं वो 5 बातें जिन पर कभी नहीं करना चाहिए भरोसा, वरना उठा सकता है कोई भी फायदा

Child Safety Tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते क्राइम के ग्राफ के बीच बच्चों की सुरक्षा हर माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है। बच्चे स्वभाव से बेहद मासूम और सीधे होते हैं, जिसके कारण उन्हें सही और गलत इंसान की नीयत का फर्क समझ में नहीं आता। इसी मासूमियत का फायदा उठाकर कई बार कुछ चालाक या गलत इरादे वाले लोग उन्हें अपनी बातों में फंसा लेते हैं। सोमवार, 25 मई 2026 को पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, माता-पिता को आज के समय में अपने बच्चों से खुलकर बात करनी चाहिए और उन्हें कुछ ऐसी बातें सिखानी चाहिए जो उनकी सुरक्षा के लिए कवच का काम करेंगी। अगर कोई बाहरी व्यक्ति, रिश्तेदार या दोस्त बच्चों से कुछ खास तरह की बातें करता है, तो बच्चों को उन पर बिल्कुल भरोसा नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं कि वे कौन सी 5 बातें हैं, जिन्हें लेकर बच्चों को अलर्ट करना बेहद जरूरी है।

1. Child Safety Tips: ‘तुम्हारे माता-पिता तो तुम्हें समझते ही नहीं, हमेशा गुस्सा करते हैं’

अक्सर कुछ लोग बच्चों की हमदर्दी जीतने के लिए उनके सामने पैरेंट्स की बुराई करने लगते हैं। वे बच्चों से कहते हैं कि तुम्हारे मम्मी-पापा बहुत सख्त हैं, वे तुम्हें समझ नहीं पाते या तुम पर बेवजह रोक-टोक लगाते हैं।

बच्चों को बचपन से ही यह बात अच्छी तरह समझाएं कि माता-पिता कभी भी अपने बच्चे का बुरा नहीं सोच सकते। अगर वे किसी चीज के लिए मना कर रहे हैं या डांट रहे हैं, तो उसके पीछे बच्चे की भलाई और सुरक्षा छिपी होती है। बच्चों को सिखाएं कि कोई भी व्यक्ति कितना भी करीबी क्यों न हो, उसकी ऐसी बातों में आकर अपने माता-पिता से दूरी न बनाएं और न ही उन पर शक करें।

2. ‘यह हमारे बीच का सीक्रेट है, यह बात घर में किसी को मत बताना’

आजकल बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में एक बात बहुत कॉमन देखी गई है कि अपराधी बच्चों को डराकर या बहलाकर बातें छुपाने को कहते हैं। अगर कोई भी बड़ा या हमउम्र बच्चा आपके बच्चे से कहे कि ‘यह बात मम्मी-पापा से छुपाना’ या ‘उन्हें मत बताना’, तो यह खतरे की पहली घंटी है।

बच्चों को यह भरोसा दिलाएं कि घर में ऐसी कोई बात नहीं होनी चाहिए जो उनके और पैरेंट्स के बीच सीक्रेट हो। उन्हें सिखाएं कि अगर कोई भी उन्हें किसी बात को छुपाने के लिए मजबूर करता है या डराता है, तो वे बिना किसी डर के तुरंत आकर अपने माता-पिता को पूरी बात बताएं। पैरेंट्स को भी घर में ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां बच्चा बिना झिझक सब कुछ शेयर कर सके।

3. ‘अगर तुम मेरे सच्चे दोस्त हो, तो तुम्हें मेरी यह बात माननी ही पड़ेगी’

बच्चों के ग्रुप में अक्सर ‘पियर प्रेशर’ यानी दोस्तों का दबाव बहुत ज्यादा देखा जाता है। कई बार गलत संगत के बच्चे आपके बच्चे को इमोशनली ब्लैकमेल करने की कोशिश करते हैं। वे कहते हैं कि ‘अगर तुमने यह काम नहीं किया, तो हमारी दोस्ती आज से खत्म’ या ‘सच्चे दोस्त कभी मना नहीं करते’।

अपने बच्चों को सच्चे और झूठे दोस्त का फर्क समझाना बहुत जरूरी है। उन्हें बताएं कि जो दोस्त आपको किसी गलत काम, नियम तोड़ने या माता-पिता से झूठ बोलने के लिए उकसाए, वह कभी सच्चा दोस्त नहीं हो सकता। बच्चों में यह आत्मविश्वास जगाएं कि वे ऐसे किसी भी दबाव के सामने मजबूती से ‘ना’ कह सकें और इसकी जानकारी आपको दें।

4. ‘तुम अपनी उम्र के बाकी बच्चों से बहुत ज्यादा मेच्योर और समझदार हो’

चापलूसी या जरूरत से ज्यादा तारीफ करना भी गलत इरादे वाले लोगों का एक बड़ा हथियार होता है। जब कोई व्यक्ति किसी बच्चे की बहुत ज्यादा तारीफ करने लगता है, तो बच्चा आसानी से उस पर भरोसा करने लगता है और उसकी हर बात मानने को तैयार हो जाता है।

बच्चों को सिखाएं कि हर तारीफ के पीछे अच्छी नीयत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर कोई अनजान या कम जान-पहचान वाला व्यक्ति उन्हें बार-बार गिफ्ट देता है, उनकी जरूरत से ज्यादा तारीफ करता है या उन्हें प्रभावित करने की कोशिश करता है, तो उन्हें सतर्क हो जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चों को उस व्यक्ति से दूरी बना लेनी चाहिए और फौरन माता-पिता को बताना चाहिए।

5. ‘चलो, हम दोनों कहीं अकेले में चलकर कोई मजेदार गेम खेलते हैं’

यह एक बेहद संवेदनशील और गंभीर बात है जिसे हर बच्चे को सिखाया जाना चाहिए। चाहे घर का कोई कार्यक्रम हो, स्कूल हो या कोई पार्क, अगर कोई भी व्यक्ति (चाहे वह परिचित ही क्यों न हो) बच्चे को किसी सुनसान जगह, बंद कमरे या अकेले में ले जाकर खेलने या बात करने का लालच देता है, तो बच्चे को वहां तुरंत जाने से मना कर देना चाहिए।

बच्चों के मन में यह नियम पक्का कर दें कि वे अपने माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े की मर्जी और जानकारी के बिना किसी के भी साथ अकेले कहीं नहीं जाएंगे। बाहर जाने या किसी के साथ खेलने की हर बात उन्हें पहले अपने पैरेंट्स को बतानी होगी और उनकी इजाजत के बाद ही कदम आगे बढ़ाना होगा।

Child Safety Tips: बच्चों के सबसे अच्छे दोस्त बनें

इन 5 बातों को सिखाने के साथ-साथ माता-पिता को खुद भी अपने व्यवहार में थोड़ा बदलाव करना होगा। बच्चों को सिर्फ डांटने या उन पर हुक्म चलाने के बजाय उनके साथ एक दोस्ताना रिश्ता कायम करें। जब बच्चों को यह विश्वास होगा कि उनके माता-पिता हर परिस्थिति में उनकी बात सुनेंगे और उन पर भरोसा करेंगे, तो वे बाहरी दुनिया के किसी भी बहकावे में नहीं आएंगे। रोजाना रात को सोने से पहले अपने बच्चों से उनके पूरे दिन की गतिविधि के बारे में प्यार से पूछें। आपकी थोड़ी सी सतर्कता और बच्चों के साथ खुला संवाद उन्हें हर बड़े खतरे से हमेशा सुरक्षित रख सकता है।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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