DGCA New Update: अगर आप हवाई जहाज से सफर करते हैं या करने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी AERA ने देश के सभी प्रमुख हवाई अड्डों पर घरेलू उड़ानों के लिए लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 प्रतिशत की कटौती कर दी है। यह फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और अगले तीन महीने तक जारी रहेगा। इस फैसले से एयरलाइंस को बड़ी राहत मिली है और उम्मीद जताई जा रही है कि इसका असर आगे चलकर हवाई टिकट की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
AERA का यह फैसला आया क्यों और क्या है इसका मतलब?
पिछले कुछ महीनों से भारतीय एविएशन सेक्टर कई तरह की मुश्किलों से जूझ रहा था। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव की वजह से एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतें 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं। इससे एयरलाइंस का खर्च काफी बढ़ गया था। ऊपर से लैंडिंग और पार्किंग चार्ज जैसे बुनियादी खर्च अलग से थे। कई एयरलाइंस पहले ही घाटे में चल रही थीं और यह बोझ उनके लिए और भारी हो गया था।
इन्हीं हालात को देखते हुए AERA ने एविएशन मंत्रालय और एयरलाइंस के लंबे समय से चले आ रहे अनुरोध को मानते हुए यह राहत देने का फैसला किया। AERA ने साफ किया है कि यह राहत तीन महीने के लिए है और उसके बाद बाजार की स्थिति, एयरलाइंस की वित्तीय हालत और ईंधन की कीमतों को देखते हुए आगे का फैसला किया जाएगा।
लैंडिंग और पार्किंग चार्ज क्या होता है और यह कितना अहम है?

आम लोग अक्सर यह नहीं जानते कि जब कोई विमान किसी हवाई अड्डे पर उतरता है या खड़ा रहता है, तो उसके लिए एयरलाइंस को हवाई अड्डे को एक तय शुल्क देना पड़ता है। इसे ही लैंडिंग चार्ज और पार्किंग चार्ज कहा जाता है। विमान जितना बड़ा होगा और जितनी देर खड़ा रहेगा, शुल्क उतना ज्यादा होगा।
जानकारों के अनुसार यह शुल्क एयरलाइंस के कुल खर्च का करीब 8 से 12 प्रतिशत हिस्सा होता है। यानी हर उड़ान पर हजारों रुपये का यह खर्च होता है। जब एयरलाइंस रोजाना सैकड़ों उड़ानें भरती हैं तो यह रकम करोड़ों में पहुँच जाती है। ऐसे में 25 प्रतिशत की कटौती से हर उड़ान पर काफी बचत होगी।
किन एयरलाइंस को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस फैसले का फायदा सभी घरेलू एयरलाइंस को मिलेगा लेकिन जिन कंपनियों के पास बड़े बेड़े हैं और जो रोजाना सबसे ज्यादा उड़ानें भरती हैं, उन्हें सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी बड़ी एयरलाइंस के लिए यह फैसला बड़ी सांस की तरह है।
इसके अलावा छोटी और मध्यम एयरलाइंस जो मुख्य रूप से घरेलू रूटों पर चलती हैं, उन्हें भी इस राहत से काफी मदद मिलेगी। खासतौर पर वे एयरलाइंस जो टियर-2 और टियर-3 शहरों तक सेवाएं देती हैं, उनके लिए यह और भी जरूरी था क्योंकि इन रूटों पर मार्जिन वैसे भी कम होता है।
क्या सच में सस्ता होगा हवाई टिकट?
यह सवाल सबके मन में है और इसका जवाब पूरी तरह साफ नहीं है। AERA ने एयरलाइंस पर यह बाध्यता नहीं लगाई है कि वे इस राहत का फायदा टिकट की कीमत घटाकर यात्रियों तक पहुँचाएं। यह पूरी तरह एयरलाइंस के अपने फैसले पर निर्भर करेगा।
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के दबाव में कई एयरलाइंस टिकट की कीमतें कम कर सकती हैं। खासकर कम दूरी की घरेलू उड़ानों पर 5 से 10 प्रतिशत तक सस्ते टिकट मिल सकते हैं। पर्यटन के लिहाज से मशहूर जगहों जैसे गोवा, केरल, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की उड़ानों पर इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
वहीं कुछ जानकार यह भी कहते हैं कि एयरलाइंस पहले अपना घाटा पूरा करने की कोशिश करेंगी और इसके बाद ही यात्रियों को फायदा पहुँचाने के बारे में सोचेंगी। बड़े शहरों के बीच की व्यस्त उड़ानों पर टिकट की कीमत में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा।
यात्री संगठनों ने क्या कहा?
यात्री कल्याण संगठनों ने AERA के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह राहत एयरलाइंस तक ही नहीं रुकनी चाहिए बल्कि आम यात्री तक भी पहुँचनी चाहिए। कई संगठनों ने एयरलाइंस से सीधी अपील की है कि वे टिकट की कीमतें घटाएं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग हवाई सफर कर सकें।
उनका तर्क है कि अगर यह राहत सिर्फ एयरलाइंस के मुनाफे को बढ़ाने के काम आई और यात्रियों को कोई फायदा नहीं मिला तो यह फैसला आधा-अधूरा माना जाएगा। जनता के लिहाज से सस्ती हवाई यात्रा ही इस फैसले की असली सफलता होगी।
विशेषज्ञों की राय क्या है?
एविएशन सेक्टर के जानकार कपिल कौशिक के अनुसार AERA का यह फैसला तुरंत राहत देने वाला जरूर है लेकिन तीन महीने बाद जो समीक्षा होगी वह बेहद अहम होगी। अगर ATF यानी एविएशन ईंधन की कीमतें अगले कुछ महीनों में स्थिर रहीं तो एयरलाइंस के पास टिकट सस्ते करने की गुंजाइश बनेगी।
वहीं एविएशन विशेषज्ञ डॉ. रवि मेहता का कहना है कि इस राहत से घरेलू यात्री संख्या बढ़ सकती है। जब टिकट सस्ते होंगे तो ज्यादा लोग हवाई सफर करेंगे जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को फायदा होगा। हालाँकि कुछ जानकार यह भी चेता रहे हैं कि अगर तीन महीने बाद शुल्क फिर बढ़ा दिए गए तो एयरलाइंस पर एक बार फिर दबाव आ जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर क्या होगा असर?
यह ध्यान देने वाली बात है कि AERA का यह फैसला सिर्फ घरेलू उड़ानों पर लागू है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अभी कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी अगर आप विदेश जाने की योजना बना रहे हैं तो इस कटौती का सीधा फायदा आपको नहीं मिलेगा।
घरेलू रूट खासकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों के बीच की उड़ानों पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही छोटे शहरों को बड़े शहरों से जोड़ने वाले रूटों पर भी यह राहत कारगर साबित हो सकती है।
तीन महीने बाद क्या होगा?
AERA ने साफ कर दिया है कि तीन महीने बाद पूरी समीक्षा की जाएगी। उस समय बाजार की स्थिति, ईंधन की कीमतें, एयरलाइंस का वित्तीय हाल और यात्री संख्या के आंकड़ों को देखते हुए आगे का फैसला होगा। अगर हालात सुधरे तो राहत जारी रह सकती है या और बढ़ाई जा सकती है। अगर स्थिति नहीं सुधरी तो शुल्क फिर से बढ़ाए भी जा सकते हैं।
एविएशन मंत्रालय इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और लंबे समय में हवाई अड्डों के विकास और एयरलाइंस दोनों को ध्यान में रखते हुए नीति बनाई जाएगी।
निष्कर्ष
AERA का यह फैसला एविएशन सेक्टर के लिए एक जरूरी और समय पर उठाया गया कदम है। एयरलाइंस को इससे बड़ी राहत मिली है और उम्मीद है कि इसका असर धीरे-धीरे आम यात्री तक भी पहुँचेगा। अगर एयरलाइंस इस राहत का फायदा टिकट की कीमतें घटाकर देती हैं तो यह हवाई सफर को और ज्यादा लोगों की पहुँच में लाने में मदद करेगा। फिलहाल तो यह खबर उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो सस्ते हवाई टिकट का इंतजार कर रहे थे।
Read More Here:-



