
मालेगांव बम धमाके से जुड़े बहुचर्चित केस में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि सबूतों के अभाव में यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले के बाद सियासी हलकों में प्रतिक्रिया का दौर शुरू हो गया है।
अखिलेश यादव ने जताई नाराजगी, जोड़े मीडिया मैनेजमेंट से सवाल
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने अभी तक पूरी रिपोर्ट नहीं पढ़ी है, लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि अगर कोई इतने बड़े हादसे में शामिल था, तो उसे सजा मिलनी चाहिए।”
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “अमेरिका में टैरिफ को लेकर जो हुआ, उस पर सोचिए। कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी खबर को दबाने के लिए दूसरी खबरें चलाई जा रही हों। आज का जमाना न्यूज से न्यूज को ढकने का है।”
उन्होंने आगे कहा कि चीन भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन गया है। “चीन न सिर्फ हमारी जमीन ले रहा है बल्कि हमारे कारोबार पर भी कब्जा कर रहा है। सरकार को इससे सतर्क रहना चाहिए,” अखिलेश ने जोड़ा।
इमरान मसूद का तंज – “तो आखिर किया किसने?”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “तो फिर यह सब किया किसने? पुलिस ने इस केस में सारे लिंक जोड़कर जांच एजेंसियों को सौंपे थे, फिर अब सवाल उठता है कि धमाका किसने किया?”
हालांकि मसूद ने न्यायपालिका पर सीधे टिप्पणी से इनकार किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि “मालेगांव में धमाका हुआ था, इसमें कोई शक नहीं। अदालतों को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।”
हिंदू-मुस्लिम एंगल पर भी प्रतिक्रिया
हिंदू आतंकवाद की धारणा पर इमरान मसूद ने कहा, “आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद होता है। इसे किसी भी धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए – चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम।”
18 साल बाद आया फैसला
मालेगांव ब्लास्ट केस में फैसला 18 साल बाद आया है। इस केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित, रमेश उपाध्याय, समीर कुलकर्णी और सुधाकर द्विवेदी जैसे हाई-प्रोफाइल नाम आरोपी थे। जज ए.के. लाहोटी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इन सभी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, इसलिए सभी को बरी किया जाता है।
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