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Anti-defection law India: सुप्रीम कोर्ट के बाद अब लोकसभा अध्यक्ष का एक्शन, NCP के 20 सांसदों को थमाया नोटिस, सिर्फ 7 दिन की मोहलत

Anti-defection law India: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को जिस मामले की सुनवाई चल रही थी, ठीक उसी दिन दिल्ली में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आ गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एनसीपी के 20 सांसदों को नोटिस भेज दिया है। यह कार्रवाई तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की याचिका पर हुई है। सवाल यह उठता है कि आखिर स्पीकर कार्यालय ने इतनी फुर्ती से यह कदम क्यों उठाया, और इसका असर आने वाले दिनों में एनसीपी के इन सांसदों की सदस्यता पर क्या पड़ सकता है।

नई दिल्ली और कोलकाता, दोनों जगहों से इस खबर को लेकर हलचल तेज हो गई है। दरअसल तृणमूल कांग्रेस ने खुद इस नोटिस की एक प्रति जारी करते हुए पूरे मामले को सार्वजनिक कर दिया। पार्टी का कहना है कि यह नोटिस मंगलवार को ही भेजा गया था, यानी ठीक उसी दिन जब सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर सुनवाई हो रही थी। अध्यक्ष कार्यालय ने एनसीपी के इन सभी 20 सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए सात दिन का वक्त दिया है।

Anti-defection law India: स्पीकर कार्यालय की सक्रियता से हैरानी

मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के सामने यह जानकारी रखी। उन्होंने बताया कि उन्हें स्पीकर कार्यालय से सूचना मिली है कि अभिषेक बनर्जी के आवेदन के आधार पर नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है। यह बयान सुनते ही अदालत में मौजूद लोगों के बीच हलचल मच गई, क्योंकि यह जानकारी उसी वक्त सामने आई जब मामला अदालत में विचाराधीन था।

हालांकि तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल ने इस पर अलग रुख अपनाया। पार्टी की ओर से कहा गया कि उन्हें ऐसे किसी नोटिस की जानकारी नहीं थी। यानी एक तरफ सॉलिसिटर जनरल अदालत में नोटिस जारी होने की बात कह रहे थे, दूसरी तरफ याचिकाकर्ता पार्टी खुद इससे अनजान बता रही थी। दोपहर तक भी एनसीपी के सांसदों की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

बुधवार को सामने आई नोटिस की असली तस्वीर

जानकार बताते हैं कि असली स्पष्टता बुधवार सुबह आई, जब तृणमूल कांग्रेस ने खुद पत्र की एक प्रति जारी कर दी। इस पत्र से साफ हुआ कि स्पीकर का कार्यालय 25 सितंबर को सक्रिय हुआ था, यानी ठीक उसी दिन जब सुप्रीम कोर्ट में यह मामला सुना जा रहा था। उसी दिन स्पीकर कार्यालय की तरफ से 20 सांसदों को अलग-अलग पत्र भेजे गए।

यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि अदालत में सुनवाई और स्पीकर कार्यालय की कार्रवाई के बीच का यह तालमेल महज इत्तेफाक नहीं लगता। मामला कुछ इस तरह से आगे बढ़ा कि पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, फिर उसी दिन नोटिस जारी होने की बात सामने आई, और अगले दिन उसकी पुष्टि भी हो गई।

Anti-defection law India: दलबदल विरोधी कानून के तहत मांगा जवाब

अब बात करते हैं इस पूरे मामले की जड़ की। अभिषेक बनर्जी ने दलबदल विरोधी अधिनियम के तहत एनसीपी के इन 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। इसी आवेदन के जवाब में स्पीकर कार्यालय ने इन सांसदों को नोटिस भेजा है। सभी 20 सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना-अपना पक्ष अलग-अलग रखना होगा।

यह प्रक्रिया आम आदमी को भले ही जटिल कानूनी दांवपेच जैसी लगे, लेकिन इसका सीधा असर संसद में सीटों के गणित और पार्टी की मान्यता पर पड़ सकता है। अगर किसी सांसद की सदस्यता रद्द होती है, तो उसका असर सिर्फ उस सांसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे दल की संसदीय ताकत पर भी दिखेगा।

Anti-defection law India: आगे क्या हो सकता है असर

देखने पर लगता है कि यह मामला अभी शुरुआती दौर में ही है। सात दिन की समय सीमा खत्म होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि एनसीपी के सांसद अपने बचाव में क्या दलील देते हैं। तृणमूल कांग्रेस की ओर से जिस तरह याचिका को आगे बढ़ाया गया है, उससे साफ है कि पार्टी इस मसले को लेकर काफी गंभीर है।

सुप्रीम कोर्ट में भी यह मामला अभी लंबित बताया जा रहा है, इसलिए स्पीकर कार्यालय की कार्रवाई और अदालत की सुनवाई, दोनों साथ-साथ चलती नजर आ रही हैं। यह स्थिति राजनीतिक गलियारों में भी खासी चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता रद्द होना किसी भी सांसद के लिए बड़ा झटका माना जाता है।

कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और लोकसभा अध्यक्ष की कार्रवाई, दोनों एक ही धागे से जुड़े नजर आ रहे हैं। एनसीपी के 20 सांसदों के पास अब सिर्फ सात दिन का वक्त है, और इसी दौरान उन्हें अपनी सदस्यता बचाने के लिए ठोस जवाब देना होगा। तृणमूल कांग्रेस की याचिका और स्पीकर कार्यालय की तेजी ने इस पूरे मसले को और दिलचस्प बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सात दिन बाद स्पीकर कार्यालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

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Author: Sanjna Gupta

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