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बड़ा खुलासा: कोडीन सिरप तस्करी में आरोपी पप्पन यादव कोर्ट में आत्मसमर्पण, SIT की जांच में चौंकाने वाले तथ्य

डेस्क – उत्तर प्रदेश में कोडीन युक्त कफ सीरप की अवैध तस्करी का मामला लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। इस बड़े सिंडिकेट में शामिल एक मुख्य आरोपी पप्पन यादव ने हाल ही में कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस की गिरफ्त से बचने की कोशिश कर रहे पप्पन पर फर्जी फर्म बनाकर सिरप की तस्करी करने के गंभीर आरोप हैं। इस मामले की जांच अब विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है, जो बांग्लादेश तक फैले नेटवर्क की गहराई तक जा रही है।

मामला क्या है?

यह पूरा मामला कोडीन आधारित कफ सीरप जैसे फेंसेडिल, स्कैफ और ऑनेरेक्स की अवैध तस्करी से जुड़ा है। ये सिरप नशे के लिए इस्तेमाल होते हैं और भारत से बांग्लादेश तथा नेपाल भेजे जाते हैं। तस्कर फर्जी फर्में बनाते हैं, झूठे बिल तैयार करते हैं और ई-वे बिल का दुरुपयोग कर सिरप को दूसरे राज्यों से होते हुए सीमा पार पहुंचाते हैं। जांच में पता चला है कि इस धंधे से करोड़ों रुपये की कमाई हो रही थी।

पप्पन यादव की भूमिका

पप्पन यादव इस सिंडिकेट का महत्वपूर्ण हिस्सा था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि दिल्ली में एवी फार्मास्यूटिकल्स नाम की फर्म उसके और उसके साथियों के नाम पर बनाई गई थी। इस फर्म के जरिए सिरप मंगवाया जाता था और उत्तराखंड में बनी 65 फर्जी फर्मों के कागजों पर बिक्री दिखाकर तस्करी की जाती थी। पप्पन के साथी सौरभ त्यागी, विभोर राणा और विशाल सिंह जैसे लोग इस नेटवर्क को चलाते थे। पुलिस के दबाव बढ़ने पर पप्पन ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया, ताकि गिरफ्तारी से पहले कानूनी राहत की कोशिश कर सके।

SIT की जांच और नए खुलासेImage result for कोडीन सिरप तस्करी में आरोपी पप्पन यादव कोर्ट में आत्मसमर्पण,

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर SIT का गठन किया है। SIT में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के लोग शामिल हैं। जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और त्रिपुरा होते हुए बांग्लादेश तक फैला हुआ है। कुछ मामलों में हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन और यहां तक कि टेरर फंडिंग से जुड़े संकेत भी मिले हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इसकी जांच कर रहा है। अब तक पुलिस ने सैकड़ों बोतलें जब्त की हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये है। कई आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि मुख्य सरगना शुभम जायसवाल जैसे लोग अभी फरार हैं। उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

तस्करी कैसे होती थी?

तस्कर आसान तरीके अपनाते थे। पहले फार्मा कंपनियों से बड़ा ऑर्डर मंगवाते, फिर फर्जी फर्मों के नाम पर बिल बनाकर सिरप को दूसरे राज्यों में भेजते। वहां से ट्रक या अन्य साधनों से सीमा पार पहुंचाया जाता। बांग्लादेश में इन सिरप की कीमत भारत से कई गुना ज्यादा होती है, क्योंकि वहां शराब पर प्रतिबंध है और लोग नशे के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। एक बोतल भारत में 200 रुपये की होती है, लेकिन बांग्लादेश में हजारों में बिकती है।

राजनीतिक विवाद

यह मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि कई आरोपियों के तार विपक्षी दलों से जुड़े हैं। वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार बड़े लोगों को बचा रही है और जांच निष्पक्ष नहीं है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।

कानूनी कार्रवाई

कोर्ट में कई आरोपियों ने जमानत की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर याचिकाएं खारिज हो गईं। अदालत ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय रैकेट है, इसलिए जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। पप्पन यादव के सरेंडर के बाद अब SIT उससे पूछताछ कर नेटवर्क के बाकी लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

निष्कर्ष :

कफ सीरप तस्करी का यह मामला सिर्फ नशे का धंधा नहीं है, बल्कि इससे युवाओं की सेहत को खतरा है और देश की सुरक्षा से भी जुड़े सवाल उठते हैं। पप्पन यादव का सरेंडर और SIT की जांच से उम्मीद है कि पूरा नेटवर्क जल्द बेनकाब हो जाएगा। सरकार की सख्ती से ऐसे गिरोहों पर लगाम लग सकती है, लेकिन इसके लिए सभी स्तर पर सतर्कता जरूरी है। आम लोग भी सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें। इससे न केवल अपराध रुकेगा, बल्कि समाज स्वस्थ और सुरक्षित बनेगा।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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