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Bihar Election News: बिहार NDA में सीट बंटवारे का फार्मूला तय! चिराग पासवान की 40 सीटों की मांग पर ब्रेक, 20-22 सीटों पर करना होगा संतोष

Bihar Election News: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बजने में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों का दौर जारी है और सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीटों का बंटवारा कैसे होगा? सूत्रों के हवाले से जो खबर सामने आ रही है, वह बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल कर सकती है, खासकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के लिए। खबर है कि एनडीए ने सीट बंटवारे का एक आंतरिक फार्मूला लगभग तैयार कर लिया है, जिसमें चिराग पासवान की 40 सीटों की मांग को दरकिनार करते हुए उन्हें 20 से 22 सीटों का प्रस्ताव दिया जा सकता है।

क्या है NDA का ‘मिशन 2025’ सीट फार्मूला?

लोकसभा चुनाव 2024 में मिली शानदार सफलता के बाद अब एनडीए का पूरा ध्यान बिहार विधानसभा चुनाव पर केंद्रित है। गठबंधन के दो सबसे बड़े दल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU), इस बार कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों के अनुसार, 243 विधानसभा सीटों वाले बिहार में बीजेपी और जेडीयू लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हो गए हैं।

बीजेपी-जेडीयू का दबदबा: बताया जा रहा है कि दोनों बड़े दल 100-105 सीटों के आसपास चुनाव लड़ सकते हैं। इसका मतलब है कि लगभग 205 से 210 सीटें सीधे तौर पर बीजेपी और जेडीयू के खाते में जाएंगी।

सहयोगियों के लिए बची सीटें: इसके बाद बाकी बची 33 से 38 सीटें ही सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी, जिनमें चिराग पासवान की लोजपा (आर), जीतन राम मांझी की ‘हम’ और उपेंद्र कुशवाहा की ‘आरएलएम’ शामिल हैं।

चिराग पासवान की बढ़ी मुश्किलें, 40 की मांग पर 20 का ऑफर क्यों?

लोकसभा चुनाव में 100% स्ट्राइक रेट के साथ 5 सीटें जीतने के बाद चिराग पासवान का राजनीतिक कद काफी बढ़ा है। वह खुद को बिहार में एनडीए का एक मजबूत स्तंभ मान रहे हैं और इसी आधार पर उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए 40 सीटों की मांग रखी थी। लेकिन एनडीए के बड़े नेता 2020 के विधानसभा चुनाव को नहीं भूले हैं।

Bihar Election News: 2020 का सबक

याद दिला दें कि 2020 में चिराग पासवान एनडीए से अलग होकर लड़े थे और उन्होंने मुख्य रूप से जेडीयू के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसका सीधा नुकसान नीतीश कुमार को हुआ और उनकी पार्टी महज 43 सीटों पर सिमट गई, जबकि बीजेपी 74 सीटें जीतकर बड़े भाई की भूमिका में आ गई थी। बीजेपी और जेडीयू इस बार उस गलती को दोहराना नहीं चाहते और यही कारण है कि चिराग की मांग पर लगाम कसी जा रही है।

एनडीए के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “चिराग पासवान गठबंधन के अहम साथी हैं और लोकसभा में उनके प्रदर्शन का सम्मान किया जाएगा, लेकिन विधानसभा की जमीनी हकीकत अलग है। 40 सीटों की मांग अव्यावहारिक है। उन्हें एक सम्मानजनक संख्या (लगभग 20-22) दी जाएगी।

मांझी और कुशवाहा के लिए क्या है प्रस्ताव?

इस नए फार्मूले के तहत, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ (HAM) को 5 से 7 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 4 से 5 सीटें मिल सकती हैं। इन दोनों नेताओं ने लोकसभा चुनाव में भी एनडीए के साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया था और गठबंधन उन्हें भी साधना चाहता है।

क्यों अहम है यह सीट बंटवारा?

यह सीट बंटवारा फार्मूला सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि बिहार में एनडीए के भविष्य की रणनीति का संकेत है।

नीतीश कुमार का नेतृत्व: जेडीयू को लगभग बराबर सीटें देना यह दर्शाता है कि बीजेपी अभी भी नीतीश कुमार के चेहरे और उनके वोट बैंक को महत्व दे रही है।

नियंत्रण की राजनीति: चिराग पासवान को उनकी मांग से आधी सीटें ऑफर कर एनडीए यह संदेश देना चाहता है कि गठबंधन में कोई भी दल अपनी शर्तों पर राजनीति नहीं कर सकता।

संतुलन की कोशिश: सभी छोटे दलों को कुछ न कुछ सीटें देकर गठबंधन को एकजुट रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि विपक्ष को कोई मौका न मिले।

हालांकि इस फार्मूले पर अभी तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि बातचीत अंतिम दौर में है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या ‘मोदी के हनुमान’ कहे जाने वाले चिराग पासवान 20-22 सीटों के इस प्रस्ताव पर संतुष्ट होते हैं या फिर वे एक बार फिर कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठाकर सबको चौंका देंगे। बिहार की राजनीति का अगला अध्याय इसी सीट बंटवारे के नतीजे पर टिका है।

Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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