Bihar Flood Alert: बिहार में इस वक्त बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य के 18 जिलों में पानी घुस चुका है और 6.65 लाख से ज्यादा लोगों की जिंदगी इससे सीधे प्रभावित हुई है। पटना में गंगा और पुनपुन नदी का जलस्तर जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। सबसे हैरानी की बात यह है कि पुनपुन नदी के जो हालात अभी बन रहे हैं, वे 1976 की भयावह बाढ़ की याद दिला रहे हैं। आखिर उस साल क्या हुआ था और अभी क्यों जताई जा रही है वैसी ही आशंका, यह जानना दिलचस्प होगा।
गंगा नदी की रफ्तार भले ही कुछ इलाकों में थोड़ी धीमी पड़ी हो, लेकिन राहत की बात अभी दूर की कौड़ी लगती है। राज्य के सात गेज प्वाइंट पर गंगा का पानी खतरे के लाल निशान को पार कर चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ेंगे।
Bihar Flood Alert: पुनपुन ने बढ़ाई पटना वालों की टेंशन
पटना के लिए इस समय सबसे ज्यादा चिंता की वजह बनी है पुनपुन नदी। पिछले 24 घंटे में इस नदी का जलस्तर 28 सेंटीमीटर बढ़ चुका है। श्रीपालपुर इलाके में तो यह खतरे के निशान से करीब 2.57 मीटर ऊपर पहुंच गया है, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है।
फिलहाल पुनपुन का जलस्तर 53.16 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि खतरे का निशान महज 50.60 मीटर है। यानी तय सीमा से करीब ढाई मीटर ज्यादा पानी बह रहा है। नदी के इस रुख ने लोगों को 1976 की बाढ़ की याद दिला दी है, जब पुनपुन का जलस्तर 91 मीटर के ऊंचे स्तर तक जा पहुंचा था।
पुनपुन प्रखंड के निचले इलाकों में हालात सबसे खराब बताए जा रहे हैं। कई गांव चारों ओर से पानी से घिर चुके हैं और ग्रामीणों का सामान्य आना-जाना लगभग बंद हो गया है। ऐसे में लोगों के सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना भी अब चुनौती बन गया है।
गंगा सात जगहों पर लाल निशान के पार
बिहार बाढ़ की बात करें तो गंगा नदी राज्य के सात गेज प्वाइंट पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। भागलपुर में हालात खासतौर पर संवेदनशील बने हुए हैं, यहां नदी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। इसका सीधा असर राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर पड़ रहा है, जहां दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
जल संसाधन विभाग के मुताबिक भागलपुर में बीते 24 घंटे में गंगा का जलस्तर 46 सेंटीमीटर तक बढ़ चुका है। यह पहला मौका है जब यहां नदी खतरे के निशान से 32 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची है। कहलगांव में भी गंगा का पानी लाल निशान से काफी ऊपर बह रहा है।
बक्सर में गंगा 19 सेंटीमीटर ऊपर है, दीघा में यह आंकड़ा 127 सेंटीमीटर तक पहुंच गया है। गांधी घाट पर स्थिति और गंभीर है, जहां नदी खतरे के निशान से 178 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। हाथीदह में 153 सेंटीमीटर, मुंगेर में 9 सेंटीमीटर और कहलगांव में 82 सेंटीमीटर की बढ़त दर्ज की गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने और आवागमन के लिए राज्यभर में 693 सरकारी नावें उतारी जा चुकी हैं।
दरधा और सोन नदी में भी दिख रहा असर
सिर्फ गंगा और पुनपुन ही नहीं, पुनपुन की सहायक नदी दरधा भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इससे पटना के निचले इलाकों में रहने वालों की परेशानी और बढ़ गई है।
सोन नदी में भी पानी का दबाव देखने को मिल रहा है। इंद्रपुरी बराज से पानी छोड़ने की मात्रा बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को यहां से करीब 5.18 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो सामान्य से काफी ज्यादा माना जा रहा है।
उत्तर बिहार भी बाढ़ की चपेट में
बिहार में बाढ़ का असर सिर्फ पटना और भागलपुर तक सीमित नहीं है। उत्तर बिहार की चार बड़ी नदियां भी इस समय खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक और घाघरा नदी शामिल हैं।
कोसी नदी खगड़िया के बलतारा में 124 सेंटीमीटर और कटिहार के कुरसेला में 80 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। गंडक नदी गोपालगंज के डुमरिया में 75 सेंटीमीटर और हाजीपुर में 9 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुकी है। बूढ़ी गंडक खगड़िया में 111 सेंटीमीटर ऊपर है, जबकि घाघरा नदी सीवान के दरौली में 32 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
तटबंधों पर नजर, रिसाव के बाद अलर्ट जारी
गंगा और पुनपुन के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने निगरानी और सख्त कर दी है। इंजीनियरों को साफ निर्देश दिया गया है कि वे 24 घंटे तटबंधों पर नजर बनाए रखें। भागलपुर के राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध की निगरानी के लिए पटना मुख्यालय से वरीय इंजीनियरों की एक टीम भी भेजी गई है, ताकि मरम्मत कार्य पर लगातार नजर रखी जा सके।
इसी बीच पुनपुन नदी के रिंग बांध में रिसाव की सूचना मिलने के बाद अलर्ट का स्तर और बढ़ गया है। कार्यपालक अभियंता को जरूरी सामान और मजदूरों के साथ हर वक्त तैयार रहने को कहा गया है, ताकि रिसाव मिलते ही तुरंत मरम्मत की जा सके।
देखने पर लगता है कि प्रशासन इस बार कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखना चाहता। जानकार बताते हैं कि पुनपुन का बायां तटबंध और दरधा का बायां तटबंध सीधे पटना शहर की ओर है, इसलिए यहां रिसाव होने पर शहर के लिए खतरा और बड़ा हो सकता है। वहीं दाहिनी तरफ रिसाव होने की स्थिति में आसपास के गांवों और खेतों की फसलों को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है।
Bihar Flood Alert: किस जिले में कितने लोग प्रभावित
बाढ़ का पानी जिन जिलों में फैला है, वहां हजारों की तादाद में लोग प्रभावित हुए हैं। अरवल में करीब 32 हजार, बक्सर में 10 हजार, बेगूसराय में 21 हजार 700, समस्तीपुर में 11 हजार 800, खगड़िया में 85 हजार, मुंगेर में 38 हजार और कटिहार में करीब 36 हजार लोगों पर सीधा असर पड़ा है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि बाढ़ का दायरा कितना बड़ा हो चुका है और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी किस कदर प्रभावित हो रही है।
कुल मिलाकर बिहार बाढ़ की यह तस्वीर बताती है कि खतरा अभी टला नहीं है। गंगा, पुनपुन, कोसी, गंडक जैसी नदियां लगातार खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई हैं और तटबंधों पर दबाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। प्रशासन की तरफ से निगरानी और राहत कार्य दोनों तेज किए गए हैं, लेकिन नदियों का मिजाज अगले कुछ दिनों में क्या रुख अख्तियार करता है, यह देखना अहम होगा। अभी सबकी नजर मौसम और जलस्तर पर बनी हुई है, क्योंकि आगे की स्थिति इसी पर तय होगी।
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Sanjana Gupta
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