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ब्लड शुगर नॉर्मल फिर भी खतरा? पेट की ये दिक्कतें हो सकती हैं डायबिटीज का पहला लक्षण, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

डेस्क: डायबिटीज को आमतौर पर एक ऐसी बीमारी माना जाता है जिसमें सबसे पहले ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है। यही वजह है कि अधिकतर लोग इस बीमारी की शुरुआत सिर्फ रिपोर्ट और ब्लड टेस्ट में आए बदलाव से पहचानते हैं। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह हमेशा जरूरी नहीं कि शुगर रिपोर्ट ही पहला संकेत दे। कई मामलों में डायबिटीज की शुरुआत ऐसे लक्षणों से होती है, जिन्हें लोग आम बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें पेट से जुड़ी परेशानियां सबसे ज्यादा देखी जाती हैं। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट का कहना है कि पेट संबंधी समस्याएं टाइप-2 डायबिटीज का शुरुआती संकेत हो सकती हैं, जिन्हें समय रहते समझना बहुत जरूरी है।

पेट की दिक्कतें गम्भीर अलार्म हो सकती हैं

चिकित्सकों की मानें तो अगर किसी व्यक्ति को लगातार पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी, भूख में कमी, उल्टी जैसा महसूस होना या खाना पचने में दिक्कत हो रही है, तो यह केवल पाचन प्रणाली की खराबी नहीं बल्कि डायबिटीज का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि डायबिटीज के कारण शरीर की नसों पर असर पड़ता है, विशेष रूप से वागस नर्व कमजोर होने लगती है, जिससे पाचन तंत्र की गति धीमी हो जाती है और खाना पेट में लंबे समय तक रुकने लगता है। इस स्थिति को गैस्ट्रोपेरेसिस कहा जाता है और यह डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों में शामिल है।

गैस्ट्रोपेरेसिस: शुगर कंट्रोल सिस्टम का शुरुआती बिगड़ना

गैस्ट्रोपेरेसिस में पेट की मांसपेशियां सही तरह से काम नहीं करतीं और भोजन समय से पचता नहीं है। इसका असर सीधे पेट पर दिखाई देता है और मरीज को लगातार गैस, डकार, उल्टी जैसा महसूस होना, थोड़ी सी खुराक में ही पेट भर जाने जैसा लगना और कभी-कभी कब्ज या दस्त की समस्या का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति तब पैदा होती है जब ब्लड शुगर बढ़ने के कारण नसें प्रभावित होती हैं, इसलिए यह डायबिटीज का एक गंभीर संकेत है जिसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।

डॉक्टरों की चेतावनी: इन संकेतों को हल्के में न लेंImage result for डायबिटीज

दिल्ली के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट बताते हैं कि कई मरीज लंबे समय तक पेट दर्द या एसिडिटी की दवा लेते रहते हैं, जबकि उन्हें डायबिटीज हो चुकी होती है। डॉक्टरों के अनुसार अगर पेट की समस्या 3 से 4 सप्ताह तक बनी रहती है और परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या व्यक्ति मोटापे से ग्रस्त है, तो तुरंत ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट करवाना जरूरी है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि पेट की chronic समस्याओं को केवल गैस या एसिडिटी मानकर इलाज करने से बीमारी बढ़ सकती है, इसलिए जड़ कारण जानना सबसे जरूरी कदम है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार पेट से जुड़े लक्षणों के रूप में डायबिटीज के आने का खतरा खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा होता है, जो 40 वर्ष से ऊपर हैं, मोटापे से पीड़ित हैं, थायरॉइड, PCOD, हाई बीपी या परिवार में पहले से डायबिटीज का इतिहास रखते हैं। इसके अलावा जो लोग ज्यादा तली-भुनी चीजों का सेवन करते हैं, फिजिकल एक्टिविटी कम है, धूम्रपान या शराब लेते हैं, उनमें यह समस्या और तेजी से विकसित हो सकती है।

कैसे पहचानें कि दिक्कत डायबिटीज से जुड़ी है?

अगर किसी व्यक्ति को अचानक खाना पचने में दिक्कत होने लगे, भूख कम हो जाए या पेट फूलने लगे, तो यह समय पर चेतावनी हो सकती है। इस स्थिति में मरीज को निम्न टेस्ट करवाने चाहिए — फास्टिंग शुगर, पोस्ट प्रांडियल शुगर, और HbA1c टेस्ट। इनमें विशेष रूप से HbA1c टेस्ट सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह पिछले तीन महीनों का औसत शुगर स्तर बताता है। अगर HbA1c की रिपोर्ट 6.5% या उससे अधिक आती है, तो डायबिटीज की पुष्टि मानी जाती है।

पेट की दिक्कतों से बचने के लिए क्या करें?

अगर शुरुआती स्तर पर ही पेट की समस्या को पहचान लिया जाए तो स्थिति को संभाला जा सकता है। इसके लिए हेल्थ एक्सपर्ट्स कुछ महत्वपूर्ण सुझाव देते हैं —
हल्का और सादा भोजन करें, ज्यादा मसालेदार और तली हुई चीजों से दूरी बनाएं, दिन में छोटी-छोटी मात्रा में कई बार भोजन करें, रात को सोने से 2-3 घंटे पहले खाना खाएं, रोज कम से कम 30 मिनट की वॉक करें और वजन को नियंत्रित रखें। इसके अलावा तनाव को कम करने और नींद पूरी करने की आदत भी पाचन तंत्र और शुगर लेवल दोनों को मैनेज करने में मदद करती है।

निष्कर्ष: 

डॉक्टर साफ कहते हैं कि डायबिटीज हमेशा ब्लड टेस्ट से ही नहीं, बल्कि शरीर के अंदर के बदलावों से भी अपनी मौजूदगी का एहसास कराती है। पेट की असामान्य तकलीफें, जो लंबे समय तक चलें, डायबिटीज का पहला लक्षण हो सकती हैं। इसलिए यदि पेट से जुड़ी समस्या बार-बार परेशान करे, तो इसे मामूली गैस या एसिडिटी समझकर अनदेखा न करें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि समय रहते जांच करवा लेना ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि डायबिटीज जितनी जल्दी पकड़ में आ जाए, उसका नियंत्रण उतना ही आसान हो जाता है।

PRAGATI DIXIT
Author: PRAGATI DIXIT

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