BRICS Pay: ब्रिक्स देश डॉलर और स्विफ्ट पर निर्भरता घटाने के लिए ब्रिक्स पे नाम का डिजिटल भुगतान नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। यह कोई नई वैश्विक मुद्रा नहीं है। यह भारत के यूपीआई जैसी राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों को जोड़ने वाला तकनीकी पुल है। इससे सदस्य देश अपनी स्थानीय मुद्रा में सीधा लेनदेन कर सकेंगे। अगस्त में भारत की अध्यक्षता में जयपुर बैठक के बाद योजना तेज हुई है।
दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच यह चर्चा में है। पर्यटकों, छात्रों और कंपनियों को क्यूआर कोड से भुगतान आसान बनाने का लक्ष्य है।ब्रिक्स पे क्या है, बीआरआईसीएस पेमेंट सिस्टम, स्थानीय मुद्रा व्यापार, स्विफ्ट विकल्प ब्रिक्स, यूपीआई ब्रिक्स पे
BRICS Pay: ब्रिक्स पे मौजूदा बैंकिंग से कैसे अलग है
अंतरराष्ट्रीय लेनदेन आज भी काफी हद तक स्विफ्ट नेटवर्क और अमेरिकी डॉलर पर चलते हैं। भू-राजनीतिक तनाव में स्विफ्ट से बाहर कर प्रतिबंध लगाना संभव हो जाता है। ब्रिक्स पे स्थानीय मुद्राओं में सीधे भुगतान का विकल्प देता है जिससे बीच में डॉलर की जरूरत घट सकती है। यह सदस्य देशों की मौजूदा प्रणालियों को जोड़ता है, अलग सिक्का जारी नहीं करता।
यात्रियों और कारोबारियों को क्या फायदा
शुरुआत में प्लेटफॉर्म पर्यटकों, छात्रों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वाली कंपनियों पर केंद्रित रहेगा। क्यूआर कोड से विदेशी यात्रा के दौरान स्थानीय मुद्रा में भुगतान संभव बनाने की बात कही गई है। इससे लेनदेन तेज होने और करेंसी कन्वर्जन के शुल्क बचने की उम्मीद जताई गई है। टीवी ब्रिक्स अफ्रीका की मेलिसा हॉलो ने इसे ग्लोबल साउथ की जरूरत बताया।
BRICS Pay: डी-डॉलराइजेशन और वित्तीय स्वायत्तता
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था बदलाव के मोड़ पर है। ब्रिक्स पे का उद्देश्य वित्तीय संप्रभुता बढ़ाना और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बाहरी झटकों से बचाना बताया गया है। राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल से घरेलू ढांचा मजबूत करने की बात कही गई है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।
क्या यह स्विफ्ट की जगह लेगा
ब्रिक्स पे को स्विफ्ट का पूरा विकल्प या स्थान लेने वाला सिस्टम नहीं कहा गया है। इसे सदस्य देशों की राष्ट्रीय भुगतान व्यवस्थाओं के बीच पूरक ब्रिज के रूप में विकसित किया जा रहा है। यानी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के साथ एक अतिरिक्त रास्ता खोलने की कोशिश है। पूरी तरह बदलाव का दावा स्रोत में नहीं है।
BRICS Pay: आम सवालों के जवाब
ब्रिक्स पे नई डिजिटल करेंसी नहीं है। यह विभिन्न देशों के डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म को जोड़ने वाला नेटवर्क है। पर्यटक बार-बार डॉलर खरीदने की जगह क्यूआर से अपनी मुद्रा में भुगतान कर सकेंगे, ऐसी योजना है। आम उपयोग कब शुरू होगा इसकी अंतिम तारीख दी गई जानकारी में नहीं है। व्यापार और पर्यटन दोनों क्षेत्रों में इसे आजमाने की बात कही गई है।
ब्रिक्स पे सदस्य देशों की यूपीआई जैसी प्रणालियों को जोड़कर स्थानीय मुद्रा में भुगतान आसान बनाने की पहल है। यह नई मुद्रा नहीं बल्कि डिजिटल पुल है जिसका मकसद डॉलर और स्विफ्ट पर निर्भरता कम करना बताया गया है।
पर्यटकों और कंपनियों को क्यूआर भुगतान और कम कन्वर्जन शुल्क का लाभ मिलने की उम्मीद है। स्विफ्ट की पूरी जगह लेने का दावा नहीं किया गया। दिल्ली सम्मेलन के बीच यह योजना चर्चा में है और क्रियान्वयन धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा।
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