Jharkhand News: झारखंड के साहिबगंज जिले में 1250 करोड़ रुपये के अवैध पत्थर खनन और परिवहन से जुड़े बहुचर्चित घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अपनी कार्रवाई को नया आयाम दे दिया है। अब सीबीआई केवल पत्थर माफिया के पीछे ही नहीं, बल्कि उन सरकारी अधिकारियों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है जिन पर इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने का संदेह है। जांच एजेंसी पुख्ता साक्ष्य एकत्रित करने में जुटी है और बहुत जल्द अदालत में ठोस सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।
दिसंबर 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई को साहिबगंज जिले में नींबू पहाड़ स्थित अवैध पत्थर खनन मामले की पूर्ण स्वतंत्रता के साथ जांच करने का आदेश दिया था। जस्टिस आलोक राठे और जस्टिस संजय कुमार की दो सदस्यीय पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई को जो जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी, वह पूरी तरह उचित है और एजेंसी इस मामले की गंभीरता से जांच करे। इस आदेश के बाद से सीबीआई की टीम लगातार साहिबगंज क्षेत्र में सक्रिय है।
कैसे शुरू हुआ यह मामला?

इस पूरे प्रकरण की जड़ें साहिबगंज के नींबू पहाड़ पर हुए अवैध पत्थर खनन से जुड़ी हैं। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी पहले से इस मामले में मनी लांड्रिंग के तहत जांच कर रही थी। मामले में अहम गवाह विजय हांसदा के अपनी गवाही से मुकर जाने के बाद यह प्रकरण झारखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा था। हाईकोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। इसके बाद नवंबर 2023 में सीबीआई ने प्राथमिकी दर्ज की और तब से लेकर अब तक जांच जारी है।
ईडी की पूर्व जांच के दौरान एकत्र किए गए तथ्य और दस्तावेज अब सीबीआई की जांच को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जांच एजेंसी इन तथ्यों का उपयोग करके अपने अनुसंधान को आगे बढ़ा रही है और नए सुरागों तक पहुंच रही है। पूर्व में की गई छापेमारी में बरामद दस्तावेजों और आरोपितों के बयानों को भी क्रमबद्ध तरीके से संकलित किया जा रहा है ताकि अदालत में आरोपितों के पास बचने का कोई रास्ता न रहे।
सीबीआई की बड़ी बरामदगियां
पिछले दो वर्षों के दौरान सीबीआई ने इस मामले में लगातार छापेमारी अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। लगभग 60 लाख रुपये की नकद राशि बरामद की गई। एक किलोग्राम सोना और 1.2 किलोग्राम सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए गए। इसके अलावा 61 कारतूस, चल-अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज और शेल कंपनियों में निवेश से जुड़े कागजात भी बरामद हुए हैं।
ये बरामदगियां इस बात की ओर इशारा करती हैं कि यह घोटाला केवल पत्थर खनन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार मनी लांड्रिंग और अवैध हथियारों तक भी फैले हुए थे। शेल कंपनियों के माध्यम से अवैध धन की हेराफेरी का पूरा जाल बिछाया गया था, जिसे सीबीआई अब एक-एक करके सुलझा रही हैं।
जनवरी 2026 में जांच को मिली नई गति
सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद जनवरी 2026 में सीबीआई ने अपनी जांच को और अधिक तेज कर दिया। एजेंसी की टीम लगातार साहिबगंज क्षेत्र में कैंप करती रही और विभिन्न स्थानों पर जाकर जांच को आगे बढ़ाती रही। सीबीआई की टीम सीधे नींबू पहाड़ पहुंची और मौके का विस्तृत निरीक्षण किया। पहाड़ी इलाके में अवैध खनन की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया गया और साक्ष्य एकत्रित किए गए।
साहिबगंज के जिला खनन कार्यालय में भी सीबीआई ने गहन छानबीन की। कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई। इसके अलावा एजेंसी की टीम साहिबगंज के मिर्जा चौकी और कोटालपोखर भी गई। ईडी ने अवैध पत्थर खनन और परिवहन मामले में मनी लांड्रिंग के तहत जिस जहाज को जब्त किया था, उसका भी सीबीआई ने विस्तृत मुआयना किया।
सकरीगली के गदवा पहाड़ स्थित संजय यादव की खदान के बारे में भी जांच एजेंसी ने वहां मौजूद जिला खनन पदाधिकारी केके किस्कू से सामने अहम जानकारियां एकत्रित कीं। इन सभी स्थानों पर की गई जांच से मामले की पूरी तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट होती जा रही है।
अफसरों पर कड़ी नजर
इस घोटाले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सीबीआई अब केवल बाहरी माफिया पर नहीं, बल्कि उन सरकारी अधिकारियों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है जो इस अवैध कारोबार को संभव बनाने में सहायक रहे होंगे। बिना प्रशासनिक मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन संभव नहीं हो सकता था। सीबीआई यह जानने की कोशिश कर रही है कि किन अधिकारियों ने किस स्तर पर इस अवैध गतिविधि को संरक्षण दिया और उसके बदले में क्या लाभ लिया।
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, खनन विभाग, प्रशासन और परिवहन से जुड़े कुछ अधिकारी जांच के दायरे में आ चुके हैं। उनके बैंक खातों, संपत्तियों और आय के स्रोतों की गहन जांच की जा रही है। इस जांच में ईडी द्वारा पहले से एकत्रित साक्ष्य बेहद काम आ रहे हैं।
Jharkhand News: चार्जशीट की तैयारी
सीबीआई जल्द ही इस मामले में अदालत में चार्जशीट दाखिल करने वाली है। जांच एजेंसी यह सुनिश्चित करने में लगी है कि चार्जशीट में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी साक्ष्य इतने मजबूत और अकाट्य हों कि किसी भी आरोपित के पास बचने का कोई रास्ता न बचे। इसके लिए पूर्व की छापेमारी में बरामद सभी दस्तावेजों, आरोपितों के बयानों और तकनीकी साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से संकलित किया जा रहा है।
यह मामला झारखंड के खनन उद्योग में व्याप्त भ्रष्टाचार और माफिया राज का एक प्रतिनिधि उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों और सीबीआई की सक्रिय जांच से उम्मीद है कि इस घोटाले में शामिल सभी दोषी व्यक्तियों को जल्द ही न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।



