गुरुवार, 5 नवंबर 2026
लाइव देखें
हॉट टॉपिक्स
ब्रेकिंग

Chhath Puja 2026: छठ की इन 5 परंपराओं के पीछे छिपी है खास मान्यता, जानें ऐसा क्यों किया जाता है?

1 मिनट पहले
Chhath Puja 2026
Chhath Puja 2026

Chhath Puja 2026: छठ पूजा बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की सबसे पावन लोक परंपराओं में से एक है। इस महापर्व में कई रस्में ऐसी हैं जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं।इन परंपराओं के पीछे धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति, कृषि और परिवार की खुशहाली की मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। कोसी भरना, गन्ने का मंडप, बांस का सूप, मिट्टी के हाथी और दीपक जलाना जैसी रस्में छठ को खास बनाती हैं।

छठ पूजा में कोसी भरने की परंपरा क्यों है?

छठ पूजा में कोसी भरने की रस्म का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यह छठ महापर्व की सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक मानी जाती है। व्रती के घर या आंगन में गन्ने के सहारे एक सुंदर मंडप तैयार किया जाता है। इस मंडप के नीचे मिट्टी के हाथी, दीपक, फल, ठेकुआ और पूजा की अन्य सामग्री रखी जाती है। दीप जलाकर छठी मैया और भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। कई जगहों पर कोसी में पांच, सात या ग्यारह गन्नों का इस्तेमाल होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कोसी भरने से छठी मैया प्रसन्न होती हैं और परिवार पर कृपा बनाए रखती हैं। इसे घर में सुख-समृद्धि, खुशहाली और संतान की मंगलकामना से जोड़ा जाता है।

गन्ने का मंडप बनाने की क्या मान्यता है?

छठ पूजा में गन्ने के चार डंडों की मदद से मंडप बनाने की विशेष परंपरा है। इस मंडप को कोसी भरने की रस्म का अहम हिस्सा माना जाता है। गन्ने को मिठास, खुशहाली, समृद्धि और अच्छी फसल का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में गन्ना किसानों की आजीविका और कृषि से जुड़ा हुआ है। इसलिए छठ में गन्ने का इस्तेमाल प्रकृति और अन्न के प्रति आभार जताने का तरीका माना जाता है। मान्यता है कि गन्ने के मंडप के नीचे दीप जलाकर छठी मैया और सूर्य देव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। यह परंपरा लोक आस्था, प्रकृति और कृषि संस्कृति के आपसी संबंध को भी दर्शाती है। गन्ने की मिठास जीवन में माधुर्य और समृद्धि लाने का प्रतीक मानी जाती है।

बांस के सूप का ही इस्तेमाल क्यों होता है?

छठ पूजा में बांस से बने सूप और डलिया का विशेष महत्व होता है। इसी सूप में ठेकुआ, नारियल, केला, मौसमी फल और पूजा की अन्य सामग्री सजाकर रखी जाती है। व्रती इसी सूप के माध्यम से भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। बांस को पारंपरिक रूप से पवित्र और शुभ माना जाता है। इसका इस्तेमाल बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की पुरानी लोक परंपरा से जुड़ा है। पहले के समय में बांस से ही घरों में सूप, टोकरी और डलिया बनाई जाती थी, इसलिए पूजा में भी इनका विशेष स्थान बना रहा। बांस से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल प्रकृति के करीब रहने और स्थानीय परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रतीक माना जाता है। इस तरह छठ में बांस का सूप सिर्फ सामग्री रखने का साधन नहीं, बल्कि लोक आस्था और संस्कृति का अहम हिस्सा है।

मिट्टी के हाथी रखने का क्या महत्व है?

छठ पूजा में कोसी भरने के दौरान मिट्टी के हाथी रखने का भी विशेष महत्व होता है। कई परिवारों में मिट्टी के हाथी को शुभता, सुख-समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है। कोसी के मंडप के नीचे मिट्टी के हाथियों को दीपक और पूजा सामग्री के साथ सजाकर रखा जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार हाथी को शक्ति, वैभव और ऐश्वर्य से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए छठ में मिट्टी के हाथी को शामिल करना परिवार की खुशहाली और सुख-शांति की कामना से जुड़ा है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसे रखने की संख्या और तरीका अलग हो सकता है। यह रस्म छठ महापर्व की पारंपरिक लोक संस्कृति और आस्था को दर्शाती है। मिट्टी के हाथी घर में समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माने जाते हैं।

कोसी के नीचे दीपक क्यों जलाए जाते हैं?

छठ पूजा में कोसी भरने के दौरान गन्ने के मंडप के नीचे दीपक जलाने की विशेष परंपरा है। इस अवसर पर मिट्टी के दीपकों में घी या तेल डालकर उन्हें जलाया जाता है। छठी मैया और भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दीपक की रोशनी अंधकार को दूर कर जीवन में प्रकाश, सुख और सकारात्मकता लाने का प्रतीक है। कोसी के नीचे जलते दीपक पूरे पूजा स्थल को भक्तिमय बना देते हैं। कई परिवारों में इस दौरान महिलाएं पारंपरिक छठ गीत गाती हैं। परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की खुशहाली और मंगलकामना के लिए प्रार्थना की जाती है। इस तरह कोसी के नीचे दीपक जलाना छठ पूजा की आस्था, श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा का सुंदर हिस्सा है।

इन परंपराओं का कुल मिलाकर क्या महत्व है?

छठ पूजा की ये पांच प्रमुख परंपराएं सिर्फ रस्में नहीं हैं, बल्कि आस्था और संस्कृति का जीवंत रूप हैं। कोसी भरना, गन्ने का मंडप, बांस का सूप, मिट्टी के हाथी और दीपक जलाना—ये सभी प्रकृति, कृषि और परिवार की खुशहाली से जुड़े हैं। ये रस्में पीढ़ियों से चली आ रही लोक आस्था को जीवित रखती हैं। छठ महापर्व में इन परंपराओं को श्रद्धा के साथ निभाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का माहौल बनता है। व्रती और परिवार इनके माध्यम से छठी मैया और सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

छठ पूजा 2026 में इन पारंपरिक रस्मों को समझकर और श्रद्धा के साथ निभाने से पर्व और भी पावन बन जाता है। ये परंपराएं न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती हैं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति को भी सहेजती हैं।

News Desk Declaration / Disclaimer

घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। पूजा के मुहूर्त में शहर और स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। पाठकों से अनुरोध है कि पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी किसी भी विशेष जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

Read More Here

Netsha Singh
Author: Netsha Singh

वोटिंग जानकारी लोड हो रही है...

कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran

टॉपिक्स: Chhath Festival Chhath Puja Hindu Traditions Indian Festivals Religious Beliefs

Netsha Singh

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

अपनी राय दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *