Daya Nayak Promoted ACP: मुंबई पुलिस के चर्चित ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक दया नायक को मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के पद पर पदोन्नत किया गया। महाराष्ट्र गृह विभाग के आदेश से उनके साथ वरिष्ठ निरीक्षक जीवन खरात, दीपक दलवी और पांडुरंग पवार को भी एसीपी बनाया गया है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, यह पदोन्नति उनके सेवानिवृत्त होने से ठीक दो दिन पहले हुई, क्योंकि वे गुरुवार को रिटायर होने वाले थे।
दया नायक को Promoted to Assistant Commissioner Rank
मुख्य बातें
- चार अधिकारियों को मिली पदोन्नति
- 1995 में मुंबई पुलिस में हुए थे शामिल
- ‘अब तक छप्पन’ से जुड़ा नाम
- विवादों से भी रहा नाता

चार अधिकारियों को मिली पदोन्नति
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट, जिसे हिंदुस्तान टाइम्स ने प्रकाशित किया, के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया कि गृह विभाग के आदेश से कुल चार वरिष्ठ निरीक्षकों को एसीपी रैंक दी गई है:
- दया नायक
- जीवन खरात
- दीपक दलवी
- पांडुरंग पवार
पदोन्नति के समय दया नायक मुंबई पुलिस की अपराध शाखा की बांद्रा यूनिट में तैनात थे।
1995 में मुंबई पुलिस में हुए थे शामिल
दया नायक 1995 में मुंबई पुलिस में शामिल हुए थे। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उनकी पहली पोस्टिंग जुहू थाने में हुई थी। 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में वे उन पुलिस अधिकारियों में शामिल रहे, जिन्होंने कथित ‘एनकाउंटर’ में कई गैंगस्टरों को मार गिराया। रिपोर्ट के मुताबिक उनका पहला एनकाउंटर दिसंबर 1996 में हुआ था, जिसमें छोटा राजन गिरोह के दो सदस्य मारे गए थे। रिपोर्ट्स में उन्हें 84 एनकाउंटर से जुड़ा बताया गया है।
‘अब तक छप्पन’ से जुड़ा नाम
दया नायक का नाम अक्सर नाना पाटेकर अभिनीत फिल्म ‘अब तक छप्पन’ के साथ जोड़ा जाता है। पीटीआई के अनुसार उन पर एक फिल्म भी बनी थी। मुंबई में दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन गिरोह से जुड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वे लंबे समय तक सुर्खियों में रहे।
विवादों से भी रहा नाता
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 2006 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इसी मामले में उन्हें 2006 में निलंबित किया गया था और 2011 में बहाल किया गया। इसके बाद उन्हें अंबोली थाने में तैनात किया गया, जहां उन्होंने कई ड्रग सप्लायरों को पकड़ा। बाद में उनका तबादला अपराध शाखा में हुआ।
एटीएस और बड़े मामलों की जांच
दया नायक ने महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) में भी काम किया। वे उस टीम का हिस्सा थे, जिसने 2021 में अंबानी आवास के बाहर सुरक्षा से जुड़े मामले और उसके बाद ठाणे के कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले को सुलझाया था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अपराध शाखा की यूनिट-9 के प्रमुख के तौर पर वे हाल के कई चर्चित मामलों की जांच से भी जुड़े रहे, जिनमें अभिनेता सलमान खान के घर पर फायरिंग, एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या और अभिनेता सैफ अली खान पर हमले का मामला शामिल है।
सेवानिवृत्ति से पहले मिला सम्मान
करीब तीन दशक की सेवा के बाद रिटायरमेंट से ठीक पहले मिली यह पदोन्नति उनके करियर का अहम पड़ाव मानी जा रही है। गृह विभाग के आदेश के साथ ही चारों अधिकारियों की एसीपी पद पर पदोन्नति लागू हो गई। 1995 में भर्ती से लेकर 2025 में सेवानिवृत्ति तक दया नायक का करियर सफलताओं और विवादों, दोनों के कारण चर्चा में रहा। एक ओर उन्हें गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई और बड़े मामलों की जांच के लिए जाना गया, तो दूसरी ओर आय से अधिक संपत्ति के मामले ने भी उन्हें लंबे समय तक सुर्खियों में रखा, जिसमें बाद में उन्हें राहत मिली।
एसीपी का पद पुलिस निरीक्षक से ऊपर का पद है। मुंबई में एसीपी आमतौर पर किसी डिवीजन या विशेष शाखा की जिम्मेदारी संभालते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
दया नायक को किस पद पर पदोन्नत किया गया?
उन्हें वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक से सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के पद पर पदोन्नत किया गया।
पदोन्नति कब हुई?
महाराष्ट्र गृह विभाग का आदेश मंगलवार, 29 जुलाई 2025 को आया।
दया नायक के साथ और किन्हें एसीपी बनाया गया?
जीवन खरात, दीपक दलवी और पांडुरंग पवार को भी एसीपी बनाया गया।
दया नायक मुंबई पुलिस में कब शामिल हुए थे?
वे 1995 में मुंबई पुलिस में शामिल हुए थे।
क्या उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज हुआ था?
2006 में एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई।

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