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Delhi Building Height Rules: दिल्ली में कितनी मंजिल तक बना सकते हैं मकान, जानें ऊंचाई से जुड़े नियम-कानून और नक्शा पास कराने की जरूरी शर्तें

Delhi Building Height Rules: दिल्ली के सत्यनिकेतन में हुए दर्दनाक हादसे के बाद राजधानी में मकानों की ऊंचाई और निर्माण नियमों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। दरअसल रविवार को सत्यनिकेतन में एक पांच मंजिला हॉस्टल की बिल्डिंग अचानक ढह गई थी, जिसमें अब तक 7 छात्रों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य का अस्पताल में इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त बिल्डिंग के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था, और यह इमारत पूरी तरह अवैध तरीके से बनाई गई थी। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि दिल्ली में असल में कितनी मंजिल तक मकान बनाने की कानूनी अनुमति है और इसके लिए किन नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

Delhi Building Height Rules: 50 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर कितनी मंजिल की इजाजत

दिल्ली के मौजूदा भवन निर्माण नियमों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के पास 50 वर्ग मीटर से बड़ा प्लॉट है, तो वह अधिकतम पांच मंजिल तक का मकान बनवा सकता है। हालांकि इसके लिए एक जरूरी शर्त भी तय की गई है, ग्राउंड फ्लोर पर स्टिल्ट पार्किंग बनाना अनिवार्य होता है। अगर मकान मालिक स्टिल्ट पार्किंग नहीं बनवाता है, तो उसे अधिकतम चार मंजिल तक ही निर्माण की अनुमति मिलती है। इसके साथ ही मकान की कुल ऊंचाई 17.5 मीटर यानी करीब 57.4 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

छोटे प्लॉट के लिए अलग हैं नियम-कानून

जिन लोगों के पास 50 वर्ग मीटर से कम जमीन है, उनके लिए नियम थोड़े अलग और सख्त हैं। ऐसे प्लॉट पर ग्राउंड फ्लोर सहित अधिकतम तीन मंजिल यानी ग्राउंड प्लस दो तक का ही निर्माण किया जा सकता है। छोटे प्लॉट पर ज्यादा मंजिलें बनाना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है, और ऐसा निर्माण अवैध की श्रेणी में आ जाता है। यही वजह है कि प्रशासन प्लॉट के आकार के हिसाब से ही निर्माण की सीमा तय करता है।

MCD से नक्शा पास कराना क्यों है जरूरी

दिल्ली में किसी भी तरह का मकान बनवाने से पहले MCD यानी नगर निगम से नक्शा पास कराना अनिवार्य होता है। अगर कोई व्यक्ति बिना नक्शा पास कराए निर्माण कार्य करता है, तो वह मकान पूरी तरह अवैध माना जाता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन उस भवन पर ध्वस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई भी कर सकता है। इसके अलावा घर बनवाने के लिए DDA यानी दिल्ली विकास प्राधिकरण से भी अनुमति लेना जरूरी होता है, जो पूरी निर्माण प्रक्रिया को कानूनी दायरे में लाता है।

फायर NOC और डस्ट कंट्रोल रजिस्ट्रेशन भी जरूरी

केवल नक्शा पास कराना ही काफी नहीं होता, कुछ खास मामलों में निर्माण से पहले फायर डिपार्टमेंट से भी NOC लेना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही निर्माण कार्य के दौरान होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए Dust Control पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना भी जरूरी है। ये सभी प्रक्रियाएं इसलिए बनाई गई हैं ताकि निर्माण कार्य सुरक्षित तरीके से हो और आसपास रहने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।

Delhi Building Height Rules: सत्यनिकेतन हादसे में अब तक 12 छात्र बचाए गए

सत्यनिकेतन में हुए इस हादसे में राहत टीमों ने अब तक 12 छात्रों को सुरक्षित रेस्क्यू किया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद घटनास्थल पर मौजूद रहकर हालात का जायजा ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले में जिन भी अधिकारियों की लापरवाही या संलिप्तता सामने आएगी, उन सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर दिखाता है कि नियमों की अनदेखी करके किया गया निर्माण किस तरह बड़ी जनहानि का कारण बन सकता है।

कुल मिलाकर सत्यनिकेतन हादसे ने दिल्ली में भवन निर्माण नियमों की अहमियत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। प्लॉट के आकार के अनुसार तय मंजिलों की सीमा, स्टिल्ट पार्किंग की अनिवार्यता और MCD से नक्शा पास कराने जैसी शर्तें सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने वाला जरूरी कदम हैं। जब भी इन नियमों की अनदेखी होती है, तो नतीजा सत्यनिकेतन जैसे दर्दनाक हादसों के रूप में सामने आता है। ऐसे में जरूरी है कि मकान मालिक और बिल्डर दोनों निर्माण से पहले सभी जरूरी अनुमतियां और NOC लेकर ही काम शुरू करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके।

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Sanjna Gupta
Author: Sanjna Gupta

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