
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के पाडर इलाके के चशोटी गांव में गुरुवार को भीषण बादल फटने की घटना हुई, जिसमें कई लोगों के मारे जाने और लापता होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के समय हजारों श्रद्धालु मचैल माता यात्रा पर पहुंचे थे, और यह घटना यात्रा के पहले पड़ाव पर ही घटी।
तेज बहाव में मंदिर परिसर के बाहर लंगर के लिए लगाए गए कई टेंट बह गए और सड़क का एक हिस्सा भी ध्वस्त हो गया। स्थानीय विधायक के अनुसार, उस समय वहां एक हजार से ज्यादा श्रद्धालु मौजूद थे। तेज बारिश और मलबे में कई लोग फंस गए, जबकि नदी किनारे खड़े वाहन और सामान भी बाढ़ में बह गए। बीजेपी नेता और विधायक सुनील शर्मा ने बताया कि अब तक 12 से अधिक लोगों के हताहत होने की आशंका है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
केंद्रीय मंत्री का निर्देश
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ के डीसी पंकज कुमार शर्मा से फोन पर बात कर तत्काल राहत-बचाव कार्य शुरू करने को कहा। उन्होंने बताया कि प्रशासन अलर्ट मोड पर है और मेडिकल व रेस्क्यू टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हो चुकी हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बताया कि यह गांव पहाड़ों के भीतर बसा बड़ा इलाका है, जहां स्थानीय निवासियों के साथ बड़ी संख्या में यात्री भी मौजूद थे।
रेस्क्यू में मुश्किलें, सेना और एनडीआरएफ तैनात
जानकारी के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्र की आधी से ज्यादा बस्ती पानी और मलबे में दब गई है। गांव के रास्ते क्षतिग्रस्त होने से रेस्क्यू टीमों को मौके तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। पिछले 15 दिनों से पुंछ, राजौरी और डोडा जैसे पहाड़ी जिलों में लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे मचैल यात्रा मार्ग भी प्रभावित हुआ है। हालात को देखते हुए सेना की डेल्टा फोर्स, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को राहत कार्य में लगाया गया है।
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