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Religious

Grand conclusion of the musical Shrimad Bhagwat Katha:जमशेदपुर में संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन,कथा ने गृहस्थ जीवन, त्याग, प्रेम, भक्ति और सत्य की महत्वपूर्ण दी शिक्षाएँ

मशेदपुर। साकची स्थित रामलीला मैदान में श्री श्री रामलीला उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आज पूर्णाहुति के साथ भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भागवत कथा के अंतिम दिवस पर राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता आचार्य श्री राजेश कृष्ण जी महाराज वृंदावन ने श्रीकृष्ण की द्वारिका लीला का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। वहीं इस सात दिवसीय संगीतमय कथा ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद और आत्मशांति प्रदान की, बल्कि उन्हें गृहस्थ जीवन, त्याग, प्रेम, भक्ति और सत्य की महत्वपूर्ण शिक्षाएँ भी दीं।

श्रीकृष्ण के गृहस्थ जीवन से मिले सीख
अपने सप्तम दिवस के कथा प्रसंग में आचार्य राजेश कृष्ण जी महाराज ने श्रीकृष्ण के गृहस्थ जीवन का आदर्श रूप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन कैसा हो, यह श्रीकृष्ण से सीखा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि—
“स्नानदं, सदनम सुतास्तु, सुधिय, कांता प्रिया लापिनी”
अर्थात,
गृहस्थ में सभी सुधी जन (बुद्धिमान और संस्कारी व्यक्ति) हों।
प्रिय बोलने वाली सुलक्षणा स्त्री (पत्नी) हो।
बच्चे आज्ञाकारी हों।
घर में प्रभु का मंदिर हो और उसमें नियमित पूजा-अर्चना हो।
अतिथि का सदैव सम्मान किया जाए।
सत्यनारायण व्रत कथा हर पूर्णिमा को हो।
बड़ों का सम्मान किया जाए और बच्चों को मोबाइल से दूर रखकर गीता-रामायण से परिचित कराया जाए।

उन्होंने कृष्ण के 16,108 पटरानियों और 1,61,080 बच्चों के साथ प्रेम और समर्पण से भरे गृहस्थ जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन में त्याग और प्रेम सर्वोपरि होता है। यदि प्रेम और त्याग होगा तो गृहस्थ जीवन वृंदावन बन सकता है, अन्यथा यह कुरुक्षेत्र का युद्धभूमि भी बन सकता है।
सुदामा चरित्र से मिला धैर्य और भक्ति का संदेश
आचार्य श्री राजेश कृष्ण जी महाराज ने कथा में सुदामा चरित्र का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा ने अपने जीवन में अत्यधिक गरीबी और कष्ट झेले, लेकिन धैर्य और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखा। इसी कारण अंततः उन्हें अपार वैभव की प्राप्ति हुई।
उन्होंने सुदामा की कथा से जीवन का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया—
दुख में तड़पो मत, सुख में फूलो मत, प्राण जाए मगर नाम भूलो मत।
अपने रथ को सुमार्ग पर लगाते चलो, कृष्ण गोविंद गोपाल गाते चलो।
इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि भक्ति और श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाती। जो व्यक्ति सच्चे मन से श्रीकृष्ण का स्मरण करता है, उसे जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं रहता।

 

भागवत कथा का समापन पूर्णाहुति यज्ञ और श्री शुकदेव पूजन के साथ किया गया। आचार्य श्री राजेश कृष्ण जी महाराज ने अपनी 566वीं कथा का विश्राम किया। इस पावन अवसर पर श्रोताओं ने मंत्रोच्चार के साथ हवन में आहुति दी। कथा स्थल पर जयकारों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया।
कथा के दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था कि स्वयं देवी-देवता और भगवान श्रीकृष्ण अपनी सूक्ष्म उपस्थिति से भक्तों पर कृपा वर्षा कर रहे हों। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन हो गए।

जजमानों ने किया विशेष पूजन
आज के विशेष जजमान पवन कुमार साहू और उनके परिवार ने पूरे श्रद्धाभाव से पूजा में भाग लिया। वहीं, कई श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति अर्पित की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा स्थल के आसपास का वातावरण अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया, जिससे श्रद्धालुओं ने ऐसा अनुभव किया कि मानो भगवान स्वयं वहां उपस्थित होकर भक्तों पर असीम कृपा बरसा रहे हैं।

भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
कथा के समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों भक्तों और श्रद्धालुओं ने भक्तिपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे की व्यवस्था समिति के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने मिलकर की, जिससे सभी श्रद्धालु आनंद और संतोष से प्रसाद ग्रहण कर सके।

श्रीमद् भागवत कथा का महत्व
आचार्य श्री राजेश कृष्ण जी महाराज ने कथा के अंत में कहा कि—
“श्रीमद् भागवत महापुराण स्वयं श्रीकृष्ण का स्वरूप है। जो इसे श्रद्धा से श्रवण करता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।”

श्रद्धालु हुए भावविभोर, भक्ति में डूबा माहौल
कथा के समापन पर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और पूरे कथा स्थल पर श्रीकृष्ण और भागवत महापुराण के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी।
“हरे कृष्ण, हरे राम” के भक्तिमय नारों से पूरा पंडाल गुंजायमान हो गया।
इस आयोजन में सुभाष चंद्र शाह, रामगोपाल चौधरी, गया प्रसाद चौधरी, पवन अग्रहरि, रोहित मिश्रा, डॉक्टर डीपी शुक्ला, शंकर लाल सिंघल, राम केवल मिश्र, अवधेश मिश्रा, दिलीप तिवारी, मगन पांडे, मनोज कुमार मिश्रा, मनोज तिवारी, गौरी शंकर बसंत आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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Author: newsmedia kiran.com

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