DIY Self Watering Pot: घर की बोतल और सूती कपड़े से बनाएं सेल्फ वॉटरिंग पॉट, पौधों को रोज पानी देने की झंझट घटेगी

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DIY Self Watering Pot: घर में पौधे रखना पसंद है, लेकिन रोज पानी देना हर बार संभव नहीं होता। गर्मी में मिट्टी जल्दी सूखती है और दो चार दिन बाहर निकलना हो तो पौधों की चिंता सताने लगती है। महंगा ऑटोमैटिक प्लांटर खरीदना जरूरी नहीं। खाली प्लास्टिक बोतल, छेद वाला गमला और सूती कपड़े की पट्टी से घर पर सेल्फ वॉटरिंग पॉट बनाया जा सकता है।

यह तरीका पानी को एक साथ ढेर में डालने की बजाय धीरे धीरे मिट्टी तक पहुंचाता है। कपड़े का एक सिरा पानी में रहता है, दूसरा मिट्टी में दबा रहता है। सूती कपड़ा नमी सोखता है और पौधे तक पहुंचाता है। रफ्तार कपड़े की मोटाई और पौधे की जरूरत पर निर्भर करती है। सही तरीके और थोड़े ट्रायल से गैरमौजूदगी में देखभाल कुछ आसान हो सकती है।

DIY Self Watering Pot:  सेल्फ वॉटरिंग पॉट कैसे काम करता है

पानी एक बोतल या छोटे कंटेनर में रखा जाता है। सूती पट्टी का एक सिरा उसी पानी में डूबा रहता है। दूसरा सिरा गमले की मिट्टी में जाता है। कपड़ा पानी सोखकर धीरे धीरे नमी पहुंचाता है। पौधे को एक साथ ज्यादा पानी नहीं मिलता।

बनाने के लिए घर का सामान काफी

नीचे पानी निकलने वाले छेद वाला गमला चाहिए। साफ प्लास्टिक बोतल या छोटा पानी का बर्तन लें। करीब 20 से 30 सेंटीमीटर लंबी सूती पट्टी चाहिए। उपयुक्त मिट्टी भी रखें। पुराना सूती कपड़ा चल सकता है, बशर्ते साफ हो और साबुन का अवशेष न हो।

पट्टी को सही जगह लगाएं

पट्टी का एक सिरा पानी भरी बोतल में डालें। दूसरा सिरा मिट्टी में करीब पांच से सात सेंटीमीटर अंदर दबाएं। कपड़े को पौधे के तने से सटाकर न रखें। थोड़ी दूरी पर मिट्टी में लगाना बेहतर बताया गया है।

DIY Self Watering Pot: बोतल को संभालकर रखें

पानी वाली बोतल गमले के पास ऐसी जगह रखें जहां आसानी से न उल्टे। कुछ देर बाद कपड़ा पानी सोखने लगता है और नमी मिट्टी तक पहुंचती है। बड़े पौधे या बड़े गमले के लिए कंटेनर भी बड़ा रख सकते हैं।

कितने दिन चलेगा यह तरीका

कोई तय समय नहीं है। यह पौधे की किस्म, गमले का आकार, मिट्टी, मौसम और कमरे या बालकनी के तापमान पर निर्भर करता है। गर्मी और सूखे में पानी जल्दी खत्म हो सकता है। ठंड या ज्यादा नमी में पानी धीरे घटता है।

DIY Self Watering Pot: किन पौधों में आजमाएं

कई छोटे पौधों और सामान्य इंडोर प्लांट्स के लिए यह सुविधाजनक हो सकता है। खासकर जिन्हें मिट्टी में हल्की नमी पसंद होती है। हर पौधे की प्यास एक जैसी नहीं होती। कुछ पौधे ज्यादा गीली मिट्टी बर्दाश्त नहीं करते।

जड़ों को ज्यादा गीला न करें

मिट्टी लगातार बहुत गीली नहीं रहनी चाहिए। कपड़ा जरूरत से ज्यादा पानी पहुंचाए तो नमी बढ़ सकती है। पहली बार लगाने के बाद मिट्टी नियमित जांचें। ज्यादा गीली लगे तो पट्टी पतली या छोटी करके देखें।

गमले में छेद जरूरी है

गमले में पानी बाहर निकलने का सही ड्रेनेज होल होना चाहिए। बिना छेद के पानी अंदर ठहर सकता है। इससे जड़ों को नुकसान हो सकता है। सेल्फ वॉटरिंग पॉट तभी ठीक काम करता है जब अतिरिक्त पानी निकल सके।

DIY Self Watering Pot: घर से निकलने से पहले ट्रायल करें

दो तीन दिन की यात्रा से ठीक पहले पहली बार यह सिस्टम न लगाएं। पहले घर पर एक दो दिन आजमाएं। देखें कि कपड़ा कितनी तेजी से पानी पहुंचा रहा है। उसी हिसाब से पट्टी की लंबाई और बर्तन का आकार तय करें।

घर की आम चीजों से बना सेल्फ वॉटरिंग पॉट पौधों की रोजमर्रा सिंचाई को थोड़ा आसान बना सकता है। खाली बोतल, छेद वाला गमला और साफ सूती कपड़ा काफी हैं। नमी धीरे धीरे मिट्टी तक पहुंचती है, लेकिन हर पौधे के लिए एक जैसा नतीजा नहीं मिलेगा। ज्यादा गीली मिट्टी से बचें, ड्रेनेज रखें और यात्रा से पहले ट्रायल जरूर करें। सही समायोजन के बाद यह आसान तरीका गैरहाजिरी में पौधों की चिंता कुछ कम कर सकता है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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