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Female Wrestlers Sexual Harassment Case: बृजभूषण सिंह यौन उत्पीड़न केस, सेशंस कोर्ट ने नोटिस जारी किया, 9 अक्टूबर सुनवाई

28 सितंबर 2026
Female Wrestlers Sexual Harassment Case
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Female Wrestlers Sexual Harassment Case:दिल्ली की राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया है। नोटिस मजिस्ट्रेट कोर्ट के बरी किए जाने वाले फैसले के खिलाफ महिला पहलवानों की अपील पर आया है।

सेशंस कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर तय हुई है। इसी साल 3 अगस्त को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व डब्ल्यूएफआई असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को इस मामले में बरी कर दिया था। उस फैसले को पहलवानों ने चुनौती दी है।

अपील स्वीकार होने के बाद अब दोनों आरोपियों से जवाब मांगा गया है। 9 अक्टूबर की सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। मामला यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ा है। आरोप सिद्ध या अंतिम रूप से खारिज होना अभी अपील के चरण में है। मजिस्ट्रेट स्तर पर बरी होना अंतिम फैसला नहीं रह गया क्योंकि सेशंस कोर्ट में चुनौती चल रही है।

सेशंस कोर्ट ने नोटिस क्यों जारी किया?

महिला पहलवानों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को सेशंस कोर्ट में चुनौती दी जिसमें बृजभूषण शरण सिंह को राहत मिली थी। सेशंस कोर्ट ने अपील पर गौर करते हुए आरोपियों को नोटिस भेजा। नोटिस का मतलब है कि अदालत पक्षकारों से लिखित जवाब चाहती है।

कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा है। इसमें अभियुक्त और अपील करने वाले दोनों शामिल माने जाते हैं। तारीख 9 अक्टूबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उसी दिन आगे की प्रक्रिया तय होगी। प्रक्रिया में अपील स्वीकार कर सुनवाई जारी रखना या अन्य कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं। स्रोत के अनुसार यही तय होना है।

मजिस्ट्रेट के फैसले के बाद पहलवानों को झटका लगा था। अब उसी फैसले की समीक्षा ऊपरी अदालत करेगी। सेशंस कोर्ट मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अपील सुनती है। नोटिस जारी होना बताता है कि अदालत ने अपील को विचार योग्य माना और विपक्षी पक्ष को बुलाने का कदम उठाया।

यह विकास आरोप की पुष्टि नहीं है। यह बरी होने को अंतिम मान लेने से रोकता है जब तक अपील का निपटारा न हो। पाठक को दोनों स्तरों का फर्क समझना चाहिए। निचली अदालत ने बरी किया। ऊपरी अदालत ने नोटिस देकर जवाब मांगा। फैसला अभी 9 अक्टूबर के बाद की प्रक्रिया पर टिका है।

3 अगस्त को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?

3 अगस्त को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया। विनोद तोमर पूर्व में डब्ल्यूएफआई असिस्टेंट सेक्रेटरी रहे हैं। दोनों को राहत एक साथ मिली।

बरी करने का अर्थ यह है कि उस स्तर पर अदालत ने आरोपों के आधार पर सजा का आदेश नहीं दिया। पहलवानों के लिए यह फैसला झटका बताया गया। इसीलिए उन्होंने सेशंस कोर्ट का रुख किया। अपील में वही बरी वाला आदेश केंद्र में है।

मजिस्ट्रेट का फैसला कानूनी दृष्टि से निचली अदालत का निष्कर्ष था। अपील होने पर वह निष्कर्ष दोबारा परखा जाता है। सेशंस कोर्ट नोटिस देकर यही प्रक्रिया शुरू कर रही है। 9 अक्टूबर से पहले जवाब दाखिल करने का अवसर पक्षों को मिला है।

मामले का विषय महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। आरोपों का विस्तृत ब्योरा स्रोत में नहीं दिया गया। इसलिए विस्तार से घटनाक्रम गढ़ना उचित नहीं। उपलब्ध तथ्य इतने हैं कि आरोप थे मजिस्ट्रेट ने बरी किया और अब अपील पर नोटिस जारी है।

महिला पहलवानों ने अपील क्यों की?

पहलवानों का कदम मजिस्ट्रेट के बरी आदेश से असहमति दिखाता है। उन्होंने सेशंस कोर्ट में अपील दाखिल की। अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर से जवाब मांगा। स्वीकार करने का अर्थ है कि अपील खारिज नहीं हुई बल्कि सुनवाई की राह खुली।

9 अक्टूबर की तारीख तय होने से मामला ठंडे बस्ते में नहीं गया। तय समय पर अगला पड़ाव आएगा। उस दिन अदालत देखेगी कि आगे कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाए। जवाब मिलने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि साक्ष्य दोबारा देखे जाएंगे या अन्य दिशा तय होगी। स्रोत यही कहता है कि आगे की प्रक्रिया उसी सुनवाई में तय होगी।

बृजभूषण सिंह डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद हैं। पद और राजनीतिक पहचान मामले को सार्वजनिक चर्चा में रखती है। अदालत का काम आरोप और बचाव दोनों पर कानून से फैसला करना है। फिलहाल नया मोड़ अपील और नोटिस है बरी को रद्द करना नहीं। रद्द या कायम रखना बाद का चरण है।

पहलवानों की अपील कानूनी अधिकार का प्रयोग है। मजिस्ट्रेट का बरी करना भी अदालती आदेश था। दोनों तथ्य साथ रखे बिना तस्वीर अधूरी रहती है। सेशंस कोर्ट अब बीच की कड़ी है।

9 अक्टूबर की सुनवाई क्यों मायने रखती है?

अगली तारीख 9 अक्टूबर है। उस दिन पक्ष जवाब के साथ अदालत के सामने होंगे। कोर्ट तय करेगी कि मामला किस रास्ते जाए। यह सुनवाई न तो दोष सिद्ध करती है न बरी को अपने आप रद्द करती है। यह प्रक्रिया का अगला पड़ाव है।

नोटिस मिलने के बाद आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। पहलवानों को अपील पर अदालत का ध्यान मिला। दोनों बातें संतुलन का हिस्सा हैं। यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील विषय में यही संतुलन जरूरी है। आरोप गंभीर हैं। बरी भी अदालती निष्कर्ष था। अपील तीसरा अध्याय है।

पाठकों के लिए व्यावहारिक अर्थ यह है कि अगस्त वाला फैसला अब अकेला अंतिम शब्द नहीं रहा। सेशंस कोर्ट ने हस्तक्षेप की पहली सीढ़ी चढ़ाई है। 9 अक्टूबर के बाद ही पता चलेगा कि सुनवाई लंबी चलेगी या कोई और आदेश आएगा। उससे पहले निष्कर्ष निकालना तथ्यों से आगे बढ़ना होगा।

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत इस मामले की वर्तमान मंजिल है। नोटिस जारी होना प्रक्रिया का औपचारिक कदम है। जवाब मांगना दोनों पक्षों को समान अवसर देने का तरीका है। तारीख तय करना अनिश्चितता कम करता है। ये तीन कदम ही इस अपडेट की खबर हैं।

इस कानूनी मोड़ को कैसे समझें?

बृजभूषण सिंह यौन उत्पीड़न केस में नया मोड़ अपील पर नोटिस है। मजिस्ट्रेट ने 3 अगस्त को बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी किया। महिला पहलवानों ने सेशंस कोर्ट में चुनौती दी। राउज एवेन्यू सेशंस कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अगली सुनवाई 9 अक्टूबर है। उस दिन आगे की प्रक्रिया तय होगी।

यह क्रम साफ रखता है कि कौन सा फैसला किस अदालत का है। निचली अदालत की राहत पर ऊपरी अदालत विचार कर रही है। आरोपों को सिद्ध या असत्य ठहराना इस खबर का काम नहीं। काम इतना है कि कानूनी स्थिति बदली है। बरी के बाद भी मामला पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता जब तक अपील चले।

संवेदनशील विषय होने के कारण विवरण सीमित रखना जरूरी है। स्रोत में घटनाओं का चित्रण नहीं है केवल अदालती कदम हैं। उसी सीमा में खबर लिखी जानी चाहिए। विनेश फोगाट का नाम फोटो कैप्शन में आया है लेकिन अपील से जुड़े नए तथ्यों में अलग भूमिका का विस्तार नहीं दिया गया। इसलिए सामान्य रूप से महिला पहलवानों की अपील ही केंद्र रहे।

पूर्व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष और पूर्व सांसद होने से मामला सार्वजनिक है। अदालतें पद देखकर नहीं प्रक्रिया देखकर चलती हैं। नोटिस उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। 9 अक्टूबर को पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे। उसके बाद जो आदेश आएगा वही अगली खबर बनेगा। फिलहाल पुष्ट बातें नोटिस जवाब की मांग और तारीख हैं।

पहलवानों को मजिस्ट्रेट फैसले से झटका लगा यह स्रोत का वर्णन है। सेशंस कोर्ट ने अपील पर आगे बढ़ाया यह दूसरा वर्णन है। दोनों को मिलाकर समझ बनती है। एक पक्ष राहत पा चुका था। दूसरा पक्ष उस राहत से संतुष्ट नहीं। अदालत ने दोनों को 9 अक्टूबर के लिए बुलाया। यहीं वर्तमान स्थिति खत्म होती है।

आगे अनुमान लगाना कि दोष सिद्ध होगा या बरी कायम रहेगा स्रोत से बाहर है। इसलिए ऐसा दावा नहीं किया जा सकता। कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अपील लंबित है। नोटिस तामील और जवाब का चरण शुरू हुआ है। यही जिम्मेदार रिपोर्टिंग है।

बृजभूषण सिंह यौन उत्पीड़न केस अब सेशंस कोर्ट के एजेंडे पर है। 3 अगस्त वाला अध्याय अपील में चला गया है। 9 अक्टूबर नया अध्याय खोलेगा। पाठक को इतना जानना काफी है कि मामला खत्म नहीं हुआ और अदालत ने दोनों पक्षों को फिर बुलाया है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran

Netsha Singh

News Media Kiran के लिए लिखते हैं।

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