Health Tips: दिल्ली एनसीआर में एक बार फिर प्रदूषण बढ़ने लगा है। कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 के पार पहुंच चुका है। दिवाली के आसपास स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।बढ़ता प्रदूषण सिर्फ सांस की बीमारियों तक सीमित नहीं रहता। इससे हार्ट अटैक का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि हाई AQI दिल पर कैसे असर डालता है।
Health Tips: प्रदूषण बढ़ने पर क्यों बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा, डॉक्टर ने बताया असर

प्रदूषण दिल पर कैसे असर डालता है?
डॉक्टर अजय फड़के (एमडी, पैथोलॉजी और डायरेक्टर एजिलस डायग्नोस्टिक्स) के अनुसार वायु प्रदूषण केवल फेफड़ों की समस्या नहीं है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5) फेफड़ों से होते हुए खून में पहुंच जाते हैं। ये सांस के रास्ते में सूजन पैदा करते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं और खून के थक्के जमने का खतरा बढ़ा देते हैं। कई रिसर्च में पाया गया है कि जब AQI का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो उसके कुछ दिनों बाद हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मामले भी बढ़ने लगते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
प्रदूषण का कोई भी स्तर पूरी तरह सुरक्षित नहीं होता। संवेदनशील लोगों को मीडियम AQI स्तर पर भी नुकसान हो सकता है। खासतौर से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, धूम्रपान करने वालों और अस्थमा, सीओपीडी, दिल की बीमारी या डायबिटीज से पीड़ित लोगों को पूरे मौसम के दौरान सावधान रहने की जरूरत है। इन लोगों को प्रदूषण से बचने के लिए सबसे ज्यादा एहतियात बरतनी चाहिए।
कौन से लक्षण दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं?
अगर खांसी दो-तीन सप्ताह से ज्यादा बनी रहे या सांस लेते समय घड़घड़ाहट हो, सांस फूलने लगे, सीने में बेचैनी हो या आराम की स्थिति में ऑक्सीजन का स्तर 94 प्रतिशत से कम हो जाए, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। खुद से एंटीबायोटिक्स या स्टेरॉयड जैसी दवाएं न लें। लक्षणों को नजरअंदाज करने से समस्या बढ़ सकती है।
डॉक्टर किन जांचों की सलाह दे सकते हैं?
लक्षणों के आधार पर डॉक्टर सीबीसी, सीआरपी, इओसिनोफिल काउंट, आईजीई, स्पाइरोमेट्री या चेस्ट एक्स-रे कराने की सलाह दे सकते हैं। हार्ट पेशेंट्स को ईसीजी, लिपिड प्रोफाइल, एचबीए1सी और एचएस-सीआरपी जांच की भी जरूरत पड़ सकती है। मौसम शुरू होने से पहले अपनी एक बेसलाइन जांच करवा लें। अगर लक्षणों में बदलाव दिखे तो दोबारा जांच कराएं। समय रहते पता चलने पर नुकसान को अच्छी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।
प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें?
हाई AQI वाले दिनों में घर के अंदर रहें और बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर जाना जरूरी हो तो एन95 मास्क पहनें। घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल मददगार हो सकता है। दिल और सांस के मरीज अपनी दवाइयां समय पर लें और डॉक्टर से नियमित संपर्क में रहें। धूम्रपान पूरी तरह बंद करें। स्वस्थ आहार और हल्की एक्सरसाइज से इम्यूनिटी मजबूत रखने में मदद मिलती है।
दिल्ली एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण दिल के मरीजों के लिए अतिरिक्त खतरा पैदा कर रहा है। पीएम 2.5 कण खून में पहुंचकर सूजन, हाई ब्लड प्रेशर और थक्के का जोखिम बढ़ाते हैं। संवेदनशील लोगों को खास सतर्कता बरतनी चाहिए। लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लें और नियमित जांच करवाएं। समय पर ध्यान देने से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।
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कवरेज: Netsha Singh, News Media Kiran
