नई दिल्ली – बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और एक युवक की बेरहम हत्या के खिलाफ भारत में गुस्सा भड़क उठा है। मंगलवार को दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अन्य हिंदू संगठनों ने बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर बड़ा प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की, जिससे पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। उधर, ढाका में भारतीय उच्चायोग के बाहर बांग्लादेशी सेना ने बख्तरबंद गाड़ियां तैनात कर दी हैं। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।
बांग्लादेश में क्या हुआ जो भारत में प्रदर्शन की वजह बना?
बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में 18 दिसंबर को एक 27 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। आरोप था कि उसने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। भीड़ ने उसे फैक्टरी से बाहर घसीटा, मार डाला और फिर शव को पेड़ पर लटकाकर आग लगा दी। यह घटना बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की लंबी फेहरिस्त में एक और दर्दनाक मामला है। 2024 में शेख हसीना सरकार गिरने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगस्त 2024 से अब तक सैकड़ों मंदिरों, घरों और दुकानों पर हमले हुए हैं। कई हिंदू परिवारों को जान बचाकर भागना पड़ा है। दीपू की हत्या ने भारत में हिंदू संगठनों को भड़का दिया। वे कह रहे हैं कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा नहीं कर रही।
दिल्ली में प्रदर्शन कैसे हुआ?
मंगलवार सुबह से ही VHP, बजरंग दल और अन्य संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में बांग्लादेश उच्चायोग के पास जुटने लगे। दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन के पास से उन्होंने मार्च शुरू किया। हाथों में तख्तियां और भगवा झंडे थे। नारे लग रहे थे – “यूनुस सरकार होश में आओ”, “हिंदुओं पर अत्याचार बंद करो” और हनुमान चालीसा का पाठ भी हो रहा था। पुलिस ने पहले से ही तीन लेयर की बैरिकेडिंग लगा रखी थी और भारी संख्या में पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स तैनात थी। लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश में बैरिकेड तोड़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोका, तो धक्का-मुक्की हुई। कुछ प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश सरकार का पुतला भी जलाया। VHP के नेता बार-बार कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे। प्रदर्शन कई घंटे चला, लेकिन पुलिस ने स्थिति को काबू में रखा। कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदू भाइयों को मारा जा रहा है, उनके घर जलाए जा रहे हैं। हम चुप नहीं बैठ सकते। भारत सरकार को सख्त कदम उठाना चाहिए।”
ढाका में भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?
दिल्ली में प्रदर्शन की खबरें बांग्लादेश पहुंचते ही वहां तनाव बढ़ गया। बांग्लादेश सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया और अपने मिशनों की सुरक्षा पर चिंता जताई। इसके जवाब में ढाका में भारतीय उच्चायोग के बाहर भारी सुरक्षा लगा दी गई। बख्तरबंद गाड़ियां, सशस्त्र पुलिस और सेना के जवान तैनात हैं। बांग्लादेश ने दिल्ली और अगरतला में अपने मिशनों पर हमलों का हवाला देते हुए वीजा सेवाएं भी कुछ समय के लिए बंद कर दी हैं। बांग्लादेश का कहना है कि भारत में उनके दूतावासों पर प्रदर्शन हिंसा में बदल सकते हैं, जो कूटनीतिक नियमों के खिलाफ है। लेकिन भारत का पक्ष है कि प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण थे और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग के लिए थे।
दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर?
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते पहले से ही तनाव में हैं। 2024 में हसीना सरकार गिरने के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमलों के मामले भारत ने कई बार उठाए हैं। अब दीपू की हत्या ने आग में घी डाल दिया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश से कहा है कि वह अपने नागरिकों, खासकर हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उधर, बांग्लादेश भारत से अपने मिशनों की बेहतर सुरक्षा मांग रहा है।
निष्कर्ष :
यह घटना दिखाती है कि पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले रुकने चाहिए, ताकि वहां शांति बनी रहे। भारत में प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इसे शांतिपूर्ण रखना जरूरी है। दोनों देशों को बातचीत से समस्या सुलझानी चाहिए, वरना रिश्ते और खराब होंगे। अल्पसंख्यकों की रक्षा हर देश की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य हो और दोनों तरफ शांति कायम रहे।


