वाराणसी –ईरान की सेना ने ओमान की खाड़ी में एक विदेशी तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। इस जहाज पर करीब 60 लाख लीटर डीजल भरा हुआ था, जिसे ईरान ने तस्करी का माल बताया है। जहाज पर सवार 18 क्रू मेंबर भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश के नागरिक हैं। यह घटना क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दिखाती है।
घटना कैसे हुई?
ईरानी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई 12 दिसंबर की रात को हुई। फार्स न्यूज एजेंसी ने होर्मोजगान प्रांत के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि टैंकर ने अपनी नेविगेशन सिस्टम बंद कर रखी थी। इससे शक हुआ और ईरानी फोर्सेस ने जहाज को रोक लिया। अधिकारी ने कहा, “ओमान सागर के तट से दूर एक तेल टैंकर को पकड़ा गया, जिसमें 60 लाख लीटर अवैध डीजल था।”ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) अक्सर ऐसी कार्रवाइयां करती है। वे कहते हैं कि यह ईंधन की तस्करी रोकने के लिए जरूरी है। टैंकर को ईतु अब ईरानी बंदरगाह पर ले जाया गया है, जहां जांच चल रही है।
जहाज पर सवार क्रू मेंबर
टैंकर पर कुल 18 क्रू मेंबर थे। इनमें भारतीय, श्रीलंकाई और बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों ने कैप्टन समेत सभी को हिरासत में ले लिया है। अभी तक क्रू की सटीक संख्या देशवार नहीं बताई गई, लेकिन सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं।भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश के दूतावास इस मामले पर नजर रख रहे हैं। इन देशों के विदेश मंत्रालय जल्द ही बयान जारी कर सकते हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर क्रू को जल्द रिहा कर दिया जाता है, लेकिन जांच पूरी होने तक इंतजार करना पड़ता है।
क्यों होती है ईंधन की तस्करी?
ईरान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं। सरकार भारी सब्सिडी देती है, जिससे ईंधन सस्ता हो जाता है। पड़ोसी देशों में कीमतें ऊंची होने से तस्करी का धंधा फलता-फूलता है।समुद्र के रास्ते भी ईंधन को गल्फ देशों या दूसरे जगहों पर ले जाया जाता है, जहां अच्छा मुनाफा मिलता है। ईरान की करेंसी की कीमत गिरने से भी यह समस्या बढ़ी है। ईरानी सेना लगातार ऐसी कोशिशों को रोकने का दावा करती है। पिछले महीने भी एक टैंकर पकड़ा गया था।
क्षेत्र में तनाव की वजह
ओमान की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते हैं। यहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पुराना है। अमेरिका ईरान पर प्रतिबंध लगाता है, तो ईरान ऐसी कार्रवाइयों से जवाब देता है।हाल ही में अमेरिका ने भी कुछ जहाजों को रोका है, जिसे ईरान बदले की कार्रवाई मान सकता है। लेकिन ईरानी अधिकारी कहते हैं कि यह सिर्फ तस्करी रोकने के लिए है, किसी देश के खिलाफ नहीं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अभी तक अमेरिका या दूसरे बड़े देशों से कोई बड़ा बयान नहीं आया है। निजी समुद्री सुरक्षा कंपनियां इस क्षेत्र में जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि हजारों भारतीय समुद्री क्षेत्र में काम करते हैं।
निष्कर्ष:
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि ओमान की खाड़ी जैसे क्षेत्र में कितना जोखिम है। ईंधन तस्करी एक बड़ी समस्या है, जो अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दोनों को प्रभावित करती है। क्रू मेंबरों की जल्द रिहाई की उम्मीद है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में ऐसा होता है। लेकिन क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हो रहा। दुनिया को शांतिपूर्ण समुद्री व्यापार के लिए बातचीत बढ़ानी चाहिए, ताकि आम लोग और क्रू मेंबर सुरक्षित रहें। यह घटना हमें याद दिलाती है कि छोटी-छोटी कार्रवाइयां बड़े तनाव को जन्म दे सकती हैं। उम्मीद है कि जल्द ही मामला सुलझ जाए।



