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जनसुराज दिल्ली में कब होगा लॉन्च? प्रशांत किशोर ने साफ किया- छह महीने चर्चा, 50 बैठकों के बाद ही होगा फैसला

Jan Suraaj Party: बिहार की राजनीति में पहचान बना चुकी जनसुराज पार्टी क्या अब देश की राजधानी का रुख करने जा रही है? पिछले कुछ दिनों से यह सवाल सियासी गलियारों और मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने अब इस पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जनसुराज की यूनिट खोलने का कोई फैसला अभी नहीं हुआ है।

दिल्ली में समर्थकों के साथ अहम बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने बताया कि अगले कम से कम छह महीने तक इस मुद्दे पर सिर्फ चर्चा होगी। इसके बाद पार्टी अपना विजन तैयार करेगी और उसी के आधार पर दिल्ली या किसी दूसरे राज्य में विस्तार पर विचार करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राज्य में पार्टी तभी उतरेगी, जब वहां की समस्याओं का ठोस ब्लूप्रिंट, भरोसेमंद लोग, समय और संसाधन मौजूद हों।

समर्थकों के साथ बैठक के बाद क्यों उठा सवाल

अटकलों की शुरुआत प्रशांत किशोर की दिल्ली में हुई बैठक से हुई। जनसुराज के समर्थकों के साथ हुई इस मुलाकात के बाद कई मीडिया रिपोर्ट में कहा जाने लगा कि पार्टी दिल्ली में अपना संगठन खड़ा करने की तैयारी में है। इसी पृष्ठभूमि में जब प्रशांत किशोर मीडिया के सामने आए, तो पत्रकारों ने सबसे पहले यही सवाल पूछा।

प्रशांत किशोर ने माना कि उन्होंने भी इस तरह की खबरें देखी हैं। उनके मुताबिक बिहार के बाहर जनसुराज को पसंद करने वाले और उससे जुड़े लोग सबसे ज्यादा दिल्ली में हैं। ये लोग समय-समय पर उनसे मिलते रहते हैं और बातचीत का सिलसिला चलता रहता है। कई दिनों से इन लोगों का आग्रह था कि वे खुद दिल्ली आकर सबसे मुलाकात करें। इसी आग्रह पर वे राजधानी पहुंचे थे।

बैठक में किस बात पर हुई चर्चा

प्रशांत किशोर के अनुसार, बैठक का मकसद पार्टी का विस्तार तय करना नहीं था। चर्चा का केंद्र यह रहा कि दिल्ली में जनसुराज से जुड़े लोगों की आगे क्या भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि इन लोगों को एकजुट करने के लिए पहले ही एक मंच तैयार किया गया है, जिसका नाम एनआरबी यानी नॉन रेसिडेंट बिहारी रखा गया है।

एनआरबी का पहला चैप्टर दिल्ली में बना। दिलचस्प बात यह है कि इसमें सिर्फ बिहार के लोग नहीं हैं। दूसरे राज्यों के कई लोग भी इससे जुड़ चुके हैं। बैठक में इसी बात पर मंथन हुआ कि इतने अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को कैसे संगठित किया जाए और उनकी ऊर्जा का सही इस्तेमाल कैसे हो।

लंबी तैयारी के बाद ही दिल्ली आने का इरादा

प्रशांत किशोर ने साफ शब्दों में कहा कि दिल्ली में जनसुराज पार्टी के विस्तार को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने अपने काम करने के तरीके का हवाला देते हुए कहा कि अगर कभी दिल्ली में उतरना भी पड़ा, तो उससे पहले लंबी तैयारी होगी और लोगों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

इसके लिए उन्होंने कम से कम छह महीने का समय तय किया है। इस दौरान दिल्ली में जनसुराज से जुड़े लोगों से बातचीत होगी। पार्टी यह समझने की कोशिश करेगी कि दिल्ली के लिए किस तरह के लोग उसके पास हों, राजधानी की समस्याओं के समाधान का क्या विजन हो और उसे जमीन पर उतारने के लिए समय और संसाधन कहां से आएंगे। प्रशांत किशोर के मुताबिक इन सभी बिंदुओं पर संतोषजनक जवाब मिलने के बाद ही आगे का कदम तय होगा।

बिहार पर फोकस, दूसरे राज्यों में यूनिट खोलने की सोच नहीं

प्रशांत किशोर ने यह भी स्पष्ट किया कि जनसुराज मूल रूप से बिहार के लिए है। उनके शब्दों का आशय यह था कि सिर्फ इसलिए किसी दूसरे राज्य में जाकर यूनिट शुरू कर देना, क्योंकि जनसुराज बिहार में सक्रिय है, पार्टी की सोच नहीं रही है और आगे भी नहीं होगी।

इस बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व जल्दबाजी में राष्ट्रीय विस्तार के पक्ष में नहीं है। वह पहले यह देखना चाहता है कि किसी राज्य में उसके पास कहने और करने के लिए वाकई कुछ ठोस है या नहीं।

खाली जगह या समस्याएं विस्तार की वजह नहीं

बातचीत के दौरान पत्रकारों ने पूछा कि क्या दिल्ली को लेकर विकल्प खुला है, या नगर निगम चुनाव को ध्यान में रखकर यह कवायद चल रही है। इस पर प्रशांत किशोर ने कहा कि विकल्प तो पूरे देश में खुला है। उनका तर्क था कि किसी जगह पर राजनीतिक शून्यता हो या समस्याएं मौजूद हों, सिर्फ इसी आधार पर किसी दल का विस्तार नहीं होना चाहिए।

उनके मुताबिक जनसुराज को दिल्ली में तभी आना चाहिए, जब राजधानी की समस्याओं के लिए उसके पास कोई बेहतर विजन हो। यानी पार्टी के लिए अवसर से ज्यादा अहम यह है कि उसके पास जनता को देने के लिए क्या है।

बिहार का ब्लूप्रिंट बना मानक

अपनी बात रखते हुए प्रशांत किशोर ने बिहार का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां लोग वोट दें या न दें, पार्टी को भरोसा है कि वह जनता के सामने बेहतर ब्लूप्रिंट रख रही है। लोग उसे कब और कितना स्वीकार करेंगे, इसमें कितना समय लगेगा, यह अलग सवाल है। लेकिन बिहार को बेहतर बनाने का खाका पार्टी ने सामने रख दिया है।

इसी कसौटी को उन्होंने दूसरे राज्यों पर भी लागू किया। उनके अनुसार दिल्ली या किसी अन्य राज्य में यूनिट तभी खुल सकती है, जब वहां की समस्याओं को हल करने और उस जगह को बेहतर बनाने का ठोस ब्लूप्रिंट तैयार हो। साथ ही उस ब्लूप्रिंट पर ईमानदारी से काम करने वाले लोग हों और सबको एक साथ लाने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन भी उपलब्ध हों।

कम से कम 50 बैठकों के बाद होगा अंतिम निर्णय

दिल्ली को लेकर पार्टी ने चर्चा की शुरुआत कर दी है, लेकिन प्रशांत किशोर ने इसे फैसले की प्रक्रिया का पहला पड़ाव ही बताया। उन्होंने कहा कि कम से कम 50 बैठकों के बाद ही वे तय कर पाएंगे कि दिल्ली में जनसुराज को कोई प्रयास करना चाहिए या नहीं।

यानी अगले छह महीने पार्टी के लिए संवाद और आकलन का दौर रहेगा। इस अवधि में दिल्ली के समर्थकों से मिलने वाले सुझाव, संभावित विजन और उपलब्ध संसाधन तय करेंगे कि पार्टी आगे बढ़ेगी या नहीं। तब तक दिल्ली में जनसुराज की यूनिट को लेकर चल रही चर्चाएं अटकल से ज्यादा कुछ नहीं हैं।

कुल मिलाकर प्रशांत किशोर ने दिल्ली में जनसुराज के लॉन्च की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया है। उन्होंने साफ किया कि हाल की बैठक समर्थकों से मुलाकात और एनआरबी जैसे मंच को व्यवस्थित करने पर केंद्रित थी, पार्टी के विस्तार की घोषणा नहीं। अगले छह महीने में कम से कम 50 बैठकें होंगी, जिनके बाद ही पार्टी तय करेगी कि दिल्ली उसकी प्राथमिकता में है या नहीं। कसौटी वही रहेगी, जो बिहार में अपनाई गई है: पहले समस्याओं का ठोस ब्लूप्रिंट, फिर उसे अमल में लाने वाले लोग और संसाधन। जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, जनसुराज बिहार पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखेगा और दिल्ली में उतरने का सवाल खुला रहेगा।

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Author: Sanjna Gupta

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