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Jharkhand Forest Department: सेवा खत्म होने के बाद भी रेंजर-ACF से काम! चतरा मामले में PCCF ने मांगा जवाब

  • झारखंड वन विभाग में सेवा खत्म होने के बाद भी काम!
  • चतरा मामले में अधिकारियों से जवाब तलब

Ranchi: झारखंड वन विभाग में सेवानिवृत्ति के बाद भी अधिकारियों से काम लिए जाने और बिना सक्षम आदेश के वन क्षेत्र पदाधिकारियों को अतिरिक्त प्रक्षेत्र का जिम्मा दिए जाने के मामले ने विभागीय स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चतरा वन प्रमंडल से जुड़े मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) ने क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।

विभागीय पत्र के मुताबिक चतरा उत्तरी वन प्रमंडल के राजपुर, कुंदा, चतरा वनरोपण और हंटरगंज वनरोपण प्रक्षेत्र में संबंधित वन क्षेत्र पदाधिकारी का पदस्थापन नहीं है। इसके बावजूद इन क्षेत्रों में काम जारी रहने की बात सामने आई है। विभाग ने पूछा है कि सक्षम प्राधिकार के आदेश के बिना दूसरे अधिकारियों से उनके निर्धारित क्षेत्र से बाहर काम क्यों कराया जा रहा है।

Photo-AI

वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल पर भी निगरानी

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू वित्तीय अधिकारों से जुड़ा है। विभाग को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि सेवा अवधि पूरी कर चुके सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षकों (एसीएफ) और रेंजरों से भी काम लिया जा रहा है। शिकायतों में वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल की बात भी कही गई है।

पीसीसीएफ ने वन अग्रिम के माध्यम से राशि उपलब्ध कराने को लेकर भी जानकारी मांगी है। पत्र में उल्लेख है कि प्रतापपुर और हंटरगंज वन प्रक्षेत्र को वन अग्रिम के जरिए राशि उपलब्ध कराई गई। विभाग ने पूछा है कि जब इस संबंध में सक्षम स्तर से प्रस्ताव या आदेश नहीं था, तो राशि किस आधार पर जारी की गई।

पूरे राज्य में जांच के निर्देश

विभागीय सचिव के निर्देश के बाद ऐसे मामलों की पहचान करने और सेवा समाप्त होने के बाद अधिकारियों से काम लेने की व्यवस्था पर रोक लगाने को कहा गया है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों के विपरीत वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल की स्थिति में सरकारी धन के दुरुपयोग और अन्य अनियमितताओं की आशंका की जांच जरूरी है।

वन विभाग में रेंजर और एसीएफ की कमी के कारण पहले सेवानिवृत्त अधिकारियों को छह-छह महीने का सेवा विस्तार दिया जाता था। हालांकि अब ऐसा सेवा विस्तार बंद है। इसके बावजूद काम लिए जाने की शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यही मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में दायर एक पीआईएल में भी उठाया गया है।

Manpreet Singh
Author: Manpreet Singh

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