Jharkhand News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन को रविवार को उनके घर पर नजरबंद कर दिया गया। यह कार्रवाई आदिवासी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के कारण की गई है। ये संगठन राज्य सरकार द्वारा एक बड़े अस्पताल के लिए जमीन लेने के खिलाफ हैं। पुलिस ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन और उनके कुछ समर्थकों को भी हिरासत में लिया गया, जब वे रांची जा रहे थे।
Jharkhand News: क्या है RIMS-2 जमीन विवाद?
यह मामला रांची के कांके इलाके में प्रस्तावित RIMS-2 अस्पताल से जुड़ा है। यह एक हजार करोड़ रुपये की परियोजना है। आदिवासी संगठन और स्थानीय किसान कहते हैं कि सरकार उनकी जमीन जबरन ले रही है। चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासियों की जमीन हड़प रही है। उन्होंने कहा कि जमीन मालिकों को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही मुआवजा। सोरेन ने दावा किया कि अस्पताल बनाने के लिए बहुत सी बंजर जमीन उपलब्ध है, लेकिन सरकार आदिवासियों की उपजाऊ जमीन पर नजर रखे है।
चंपई सोरेन का विरोध और प्रतिक्रिया
चंपई सोरेन ने कहा कि वे 24 अगस्त को किसानों के ‘हल जोतो, रोपा रोपो’ विरोध में शामिल होने वाले थे। लेकिन प्रशासन ने उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया। सोरेन ने इस कदम को अलोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा, “जब डीएसपी आए और बोले कि मुझे बाहर नहीं जाना है, तो मैं समझ गया कि मुझे रोका जा रहा है।” वे बोले कि अगर सरकार ने फैसला कर लिया है, तो हम उसका पालन करेंगे, लेकिन यह आदिवासियों के अधिकारों पर हमला है।
प्रशासन की सफाई और सुरक्षा उपाय
रांची के पुलिस उपाधीक्षक के.वी. रमन ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के कारण एहतियाती कदम उठाया गया है। बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है और महत्वपूर्ण जगहों पर बैरिकेड लगाए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है। चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासियों पर हमले हो रहे हैं। उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं और विरोध करने वालों को दबाया जा रहा है।
कानूनी पक्ष और आरोप
सोरेन ने कहा कि जमीन अधिग्रहण में 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून, छोटानागपुर काश्तकारी (सीएनटी) अधिनियम और ग्राम सभा के नियमों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि सूर्या हांसदा जैसे आदिवासी नेता को गिरफ्तार कर मुठभेड़ में मार दिया गया। यह घटना राज्य में आदिवासियों की स्थिति पर सवाल उठाती है।
यह विवाद झारखंड की राजनीति को गर्म कर रहा है। चंपई सोरेन हाल ही में झामुमो छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। अब वे आदिवासियों के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ खड़े हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही इस मामले का हल निकलेगा।
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Sanjana Gupta
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