Jharkhand News: झारखंड में बालू की किल्लत और निर्माण कार्यों पर लगे ब्रेक के संकट से जूझ रही हेमंत सोरेन सरकार को हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य भर में बालू घाटों की नीलामी और खनन पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सभी नियमों का पालन नहीं करती, तब तक यह रोक जारी रहेगी। इस फैसले से राज्य में वैध तरीके से बालू का खनन फिलहाल शुरू नहीं हो पाएगा, जिससे निर्माण कार्यों पर संकट और गहराने की आशंका है।
NGT नियमों का पालन पहले, फिर खनन: हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राजस्व के लिए पर्यावरण के नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को सबसे पहले सभी जिलों में डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (DSR) तैयार करनी होगी और उसके आधार पर पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) लेनी होगी। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक बालू घाटों की नीलामी और खनन पर लगी रोक जारी रहेगी।
सरकार ने दी थी राजस्व और विकास कार्यों के रुकने की दलील
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा था कि बालू खनन पर रोक के कारण राज्य को हर महीने करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने दलील दी कि बालू की कमी के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई सरकारी और निजी निर्माण कार्य ठप पड़ गए हैं, जिससे विकास की गति धीमी हो गई है। सरकार ने यह भी कहा कि वैध खनन बंद होने से राज्य में ‘बालू माफिया’ सक्रिय हो गया है, जो अवैध खनन कर महंगे दामों पर बालू बेच रहा है।
बिना सर्वे रिपोर्ट के शुरू की थी नीलामी प्रक्रिया
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब राज्य सरकार ने NGT के दिशानिर्देशों का पालन किए बिना ही राज्य में बालू घाटों की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। NGT का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी नदी घाट की नीलामी से पहले एक वैज्ञानिक डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (DSR) बनाना अनिवार्य है, जिसमें यह आकलन किया जाता है कि उस घाट से कितना बालू निकाला जा सकता है और उसका पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा। राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिसके बाद एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नीलामी और खनन पर रोक लगा दी थी।
निर्माण कार्य रहेंगे ठप, बालू माफिया की बढ़ेगी सक्रियता
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य में निर्माण कार्यों के लिए बालू का संकट अभी और बढ़ेगा। कानूनी तरीके से खनन बंद रहने का सबसे ज्यादा फायदा बालू माफिया को मिलेगा, जिससे अवैध खनन और बालू की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। अब हेमंत सोरेन सरकार पर यह दबाव है कि वह जल्द से जल्द सभी पर्यावरणीय औपचारिकताओं को पूरा करे, ताकि राज्य में वैध खनन फिर से शुरू हो सके और आम लोगों को राहत मिल सके।
Sanjana Gupta
Hindi Content Writer | New Media Kiran
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