Jharkhand News: बिहार में हिजाब विवाद के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी द्वारा बिहारी डॉक्टर नुसरत परवीन को नौकरी देने का ऑफर देने पर सियासी हलचल मच गई है। अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस बयान से खुद को अलग कर लिया है। पार्टी ने साफ कहा कि यह इरफान अंसारी का निजी बयान है, JMM का नहीं। वहीं भाजपा ने हमला बोला है और पूछा है कि बिहार की डॉक्टर को झारखंड में नौकरी किस नियम से दी जाएगी? यह मामला अब दोनों राज्यों की राजनीति में गर्म हो गया है।
JMM ने क्यों बनाई दूरी?
JMM के प्रवक्ता ने कहा कि इरफान अंसारी ने व्यक्तिगत रूप से ऑफर दिया है। पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं है। JMM गठबंधन सरकार का हिस्सा है। हमारी नीति स्पष्ट है कि नौकरियां झारखंड के लोगों को प्राथमिकता से दी जाती हैं। बाहर के लोगों को नौकरी देने का कोई प्लान नहीं है।
प्रवक्ता ने कहा, “यह मंत्री जी का निजी विचार है। पार्टी इससे सहमत नहीं है।” JMM नहीं चाहती कि यह मुद्दा गठबंधन में खटास पैदा करे।
BJP का हमला
भाजपा ने इस ऑफर को राजनीतिक स्टंट बताया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “इरफान अंसारी वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं। बिहार की डॉक्टर को झारखंड में नौकरी देने का अधिकार किस नियम से है? झारखंड के बेरोजगार युवाओं का क्या? पहले उन्हें नौकरी दें।”
भाजपा ने कहा कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस मंत्री मनमानी कर रहे हैं। यह झारखंड के हित में नहीं है। पार्टी ने मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है।
इरफान अंसारी का ऑफर क्या था?
इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर डॉ. नुसरत परवीन को झारखंड में नौकरी का ऑफर दिया था। कहा था कि यहां उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। हिजाब या धार्मिक प्रतीक पर कोई टिप्पणी नहीं होगी। अच्छी पोस्टिंग और सुविधा दी जाएगी।
यह ऑफर बिहार CM नीतीश कुमार द्वारा हिजाब हटाने की घटना के बाद आया था। डॉ. नुसरत ने खुद को आहत बताया था।
डॉ. नुसरत की स्थिति
डॉ. नुसरत परवीन अभी बिहार में ही नौकरी कर रही हैं। उन्होंने ऑफर पर कोई जवाब नहीं दिया है। वे विवाद के बाद चर्चा में हैं। कई संगठनों ने उनका समर्थन किया है।
Jharkhand News: सियासी माहौल हुआ गर्म
यह मामला झारखंड और बिहार दोनों में गर्म है। JMM ने दूरी बनाकर खुद को बचाया है। भाजपा इसे मुद्दा बना रही है। कांग्रेस चुप है। गठबंधन में खटास की आशंका है। लोग कह रहे हैं कि नौकरी के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। झारखंड के युवाओं को पहले मौका मिले। यह विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।



