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भारत और चीन की जुगलबंदी,

PM Modi China Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से बने वैश्विक तनाव के बीच भारत और चीन की जुगलबंदी ने दुनिया को बड़ा संदेश दिया है। रविवार को चीन के तियानजिन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई अहम बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद का निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान निकालने की प्रतिबद्धता जताई।

बैठक में द्विपक्षीय व्यापार, सीधी उड़ान सेवाओं की बहाली, वैश्विक मुद्दों और परस्पर हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने इसे संबंधों को नई दिशा देने वाला बताया। पहले 40 मिनट के लिए तय मुलाकात करीब एक घंटे चली, जिसे कूटनीतिक सूत्रों ने सकारात्मक बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सीमा पर डिसइंगेजमेंट के बाद शांति और स्थिरता का माहौल बना है। उन्होंने कैलास मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन के बीच सीधी उड़ानों की पुनः शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि परस्पर विश्वास और सम्मान पर आधारित संबंध ही भविष्य को दिशा देंगे।

राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपने संबोधन में हाथी और ड्रैगन के साथ-साथ नृत्य की उपमा दोहराई और कहा कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि भागीदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने पंचशील सिद्धांतों को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखने की बात कही, ताकि सीमा विवाद समग्र संबंधों पर हावी न हो।

दोनों नेताओं ने माना कि मौजूदा वैश्विक माहौल में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन की भूमिका अहम है। माना जा रहा है कि बैठक में ट्रंप की टैरिफ नीति और इसके वैश्विक असर पर भी चर्चा हुई। मोदी ने भी कहा कि भारत सीमा मुद्दे पर न्यायसंगत और व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेता इस बात पर सहमत रहे कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। पीएम मोदी ने शी चिनफिंग को 2026 में भारत में होने वाले शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया।

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