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Kedarnath Yatra Update: भूस्खलन के कारण तीर्थयात्री फंसे,

मुख्य बातें

  • देर रात करीब 3:30 बजे दरका पहाड़
  • 1,600 से ज्यादा तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया
  • प्रशासन की अपील: मौसम देखकर बनाएं यात्रा की योजना
  • मानसून में संवेदनशील रहता है केदारनाथ मार्ग
26 जुलाई 2025

Kedarnath Yatra Update: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड के पास भूस्खलन के कारण केदारनाथ धाम जाने वाला पैदल मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिससे केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। मलबा और पत्थर लगातार गिरने के कारण तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने मार्ग साफ होने और सुरक्षित घोषित होने तक आवाजाही रोक दी। यह घटना शुक्रवार-शनिवार (25-26 जुलाई 2025) की दरमियानी रात की है।

देर रात करीब 3:30 बजे दरका पहाड़

द डेली जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, गौरीकुंड के पास श्री केदारनाथ धाम जाने वाले पैदल मार्ग पर पहाड़ी का एक हिस्सा दरकने से देर रात करीब 3:30 बजे यह अवरोध पैदा हुआ। गौरीकुंड के घोड़ापड़ाव के पास हुए इस भूस्खलन के कारण केदारनाथ से गौरीकुंड लौट रहे कुछ तीर्थयात्री फंस गए, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए NDRF की टीम जुटी रही।

गढ़वाल पोस्ट के अनुसार, प्रशासन को सुबह करीब 4 बजे सूचना मिली कि गौरीकुंड में घोड़ापड़ाव से लगभग 50 मीटर की दूरी पर करीब 30 मीटर क्षेत्र में भारी बोल्डर और मलबा आ गया है। इसके बाद जिला प्रशासन, NDRF, SDRF और अन्य विभागों की टीमों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और वैकल्पिक रास्ता बनाकर तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, लोक निर्माण विभाग ने मार्ग साफ करने का काम शुरू किया, केदारनाथ से लौट रहे यात्रियों की मदद सुरक्षाकर्मी कर रहे थे और गौरीकुंड से धाम की ओर जाने वाले यात्रियों को मार्ग पूरी तरह बहाल होने तक रोक दिया गया।

1,600 से ज्यादा तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया

समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से न्यूज़ड्रम ने बताया कि आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार शाम 4 बजे तक 1,600 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया था, जबकि लगभग 700 और यात्रियों को निकालने का काम चल रहा था। उन्होंने बताया कि इस घटना में किसी इंसान या पशु के हताहत होने की सूचना नहीं है।

पीटीआई की इसी रिपोर्ट के अनुसार, सचिव सुमन ने बताया कि रुद्रप्रयाग जिले में रात 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच भारी बारिश हुई। इस दौरान चमेली और रुमसी गांवों, चमरारा तोक और विजयनगर में करीब 10 इमारतों में पानी घुस गया। राहत और बचाव कार्य के लिए SDRF, NDRF और लोक निर्माण विभाग की टीमें तैनात की गईं। राहत और बचाव कार्य सुबह 6 बजे से शुरू हुआ, प्रभावित इलाकों में JCB की मदद से मलबा हटाया गया और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर लगाए।

प्रशासन की अपील: मौसम देखकर बनाएं यात्रा की योजना

मार्ग साफ करने के चल रहे प्रयासों को देखते हुए प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पैदल मार्ग को अस्थायी रूप से बंद रखा। जिला प्रशासन और पुलिस ने तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे किसी भी परेशानी से बचने के लिए मौसम के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

अधिकारियों के अनुसार, मौसम अनुकूल रहने पर सभी बंद रास्तों को जल्द खोलने की उम्मीद जताई गई। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए था और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अधिकारियों से स्थिति की जानकारी लेकर राहत और बचाव कार्य तेजी से करने तथा तीर्थयात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखने के निर्देश दिए।

मानसून में संवेदनशील रहता है केदारनाथ मार्ग

गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक का पैदल मार्ग पहाड़ी इलाके से होकर गुजरता है और मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण यहां भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। इसी वजह से बारिश के मौसम में प्रशासन अक्सर एहतियात के तौर पर यात्रा को रोक देता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले मौसम और मार्ग की स्थिति की आधिकारिक जानकारी जरूर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

केदारनाथ मार्ग पर भूस्खलन कब और कहां हुआ?

शुक्रवार-शनिवार (25-26 जुलाई 2025) की दरमियानी रात करीब 3:30 बजे गौरीकुंड के पास भूस्खलन हुआ। पीटीआई के अनुसार घोड़ापड़ाव से लगभग 50 मीटर की दूरी पर पैदल मार्ग का करीब 30 मीटर हिस्सा बोल्डर और मलबे से बंद हो गया।

कितने तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया?

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन के अनुसार शाम 4 बजे तक 1,600 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला गया था और लगभग 700 और यात्रियों को निकालने का काम चल रहा था।

क्या इस घटना में कोई हताहत हुआ?

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, किसी इंसान या पशु के हताहत होने की सूचना नहीं थी।

राहत कार्य में कौन-कौन सी टीमें लगीं?

SDRF, NDRF और लोक निर्माण विभाग की टीमें राहत और मार्ग बहाली के काम में लगीं और प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर लगाए गए।

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