
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित मचैल चंडी माता मंदिर जाने वाले मार्ग पर गुरुवार दोपहर भीषण आपदा ने तबाही मचा दी। भवन से करीब 8 किलोमीटर दूर चशोती गांव में अचानक बादल फटने से शांत पहाड़ पल भर में मौत के सैलाब में बदल गए। इस भीषण घटना में घर, वाहन, लंगर और लोगों को पानी बहाकर ले गया, जिससे पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई।
जानकारी के मुताबिक, दोपहर करीब 12:30 बजे लगातार बारिश के बीच चशोती के ऊपरी पहाड़ों पर बादल फटा। तेज़ बहाव के साथ आई बाढ़ मिट्टी और मलबा लाकर गांव के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले गई। आधे से ज्यादा गांव प्रभावित हुआ, जिसमें 12 घर पूरी तरह ढह गए और कई आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। कई वाहन बह गए और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं।
लंगर और श्रद्धालु बाढ़ में फंसे
मचैल माता के श्रद्धालुओं के लिए यहां लगाया गया एक लंगर भी बाढ़ में पूरी तरह बह गया। यह लंगर उधमपुर के सैला तालाब क्षेत्र के लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था। हादसे के समय लंगर में सेवादार, रसोइये और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
स्थानीय लोगों ने संभाली मोर्चा
घटना के बाद स्थानीय मोटरसाइकिल चालक, जो मचैल यात्रा पर श्रद्धालुओं को ले जाने का काम करते हैं, तुरंत राहत और बचाव कार्य में जुट गए। उन्होंने घायलों को करीब 5 किलोमीटर दूर हमोरी लंगर तक पहुंचाया, जहां लंगर संचालकों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी वालंटियर के रूप में घायलों को प्राथमिक उपचार देने लगे। यहां 25 घायलों को लाया गया, लेकिन एक व्यक्ति की रास्ते में ही मौत हो गई। एक महिला की हालत गंभीर बनी हुई है।
राहत कार्य में चुनौतियां
करीब ढाई घंटे बाद दो डॉक्टर और पैरामेडिकल टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उनके पास दवाएं और जरूरी उपकरणों की कमी थी। अब तक मृतकों की संख्या 38 बताई जा रही है, जबकि 120 से अधिक लोग घायल हैं। अनुमान है कि 200 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं, जिनका कोई पता नहीं चल पाया है।
चशोती मचैल यात्रा मार्ग का अंतिम वाहन पड़ाव है, जिसके आगे 8 किलोमीटर का पैदल या मोटरसाइकिल सफर होता है। हादसे वाली जगह पर सेना, CISF और SDRF की टीम भी तैनात थी, लेकिन सैलाब के बाद से उनका भी कोई संपर्क नहीं हो पाया है।
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