डेस्क: मामला कुछ साल पहले का है, जब आरोपी मौलवी ने बच्ची को पढ़ाने के बहाने मस्जिद में बुलाया था। घटना सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया था और पुलिस ने आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया था।
कोर्ट का सख्त रुख
फैसले में जज ने कहा कि “यह अपराध समाज और इंसानियत दोनों के खिलाफ है। इस तरह के जघन्य कृत्य में किसी भी तरह की नरमी नहीं दिखाई जा सकती।” अदालत ने कहा कि नाबालिग के साथ इस तरह की दरिंदगी एक ऐसा अपराध है, जिसमें कानून की सबसे कठोर सजा ही न्याय कहलाएगी।
समाज में संदेश
इस फैसले को लेकर आमजन में राहत की भावना दिखी है। लोगों ने कहा कि ऐसे अपराधियों को सख्त सजा मिलना जरूरी है ताकि समाज में डर बना रहे और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
⚠️ निष्कर्ष
अलवर कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ पीड़िता के परिवार को न्याय दिलाने वाला है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि कानून के सामने कोई अपराधी बड़ा नहीं होता। बाल उत्पीड़न जैसे मामलों में समाज की संवेदनशीलता और न्याय की सख्ती ही बदलाव का रास्ता है।



