Lucknow। मासिक दुर्गाष्टमी हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस बार मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 19 सितंबर को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे शुरू होकर 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे तक रहेगी। सूर्योदय के आधार पर व्रत 19 सितंबर को माना गया है। हालांकि, स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर संभव है।
मासिक दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक मां जगदंबा की आराधना करने से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। पूजा को घर पर भी सरल तरीके से किया जा सकता है।
सुबह स्नान के बाद करें पूजा की तैयारी
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन सुबह स्नान और दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर छोटी चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद लाल आसन पर बैठकर पूजा शुरू करें।
पूजा से पहले मां दुर्गा का स्मरण करते हुए गंगाजल का छिड़काव करने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद धूप, दीप, फूल और अन्य पूजा सामग्री से मां की आराधना करें। मां को फल, मिठाई, नारियल या खीर का भोग लगाया जा सकता है।
दुर्गा चालीसा या 32 नामों का पाठ
पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती से जुड़े द्वात्रिंश नाम, यानी मां दुर्गा के 32 नामों का पाठ करने का उल्लेख मिलता है। इनमें दुर्गा, दुर्गार्तिशमनी, दुर्गापद्विनिवारिणी, दुर्गनाशिनी और दुर्गतोद्धारिणी जैसे नाम शामिल हैं। श्रद्धालु चाहें तो इसके विकल्प के रूप में दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
पाठ के बाद कपूर या घी के दीपक से मां दुर्गा की आरती करें। आरती के पश्चात मां से भूलवश हुई त्रुटियों के लिए क्षमा मांगकर प्रसाद परिवार और अन्य लोगों में बांटने की परंपरा है।
कन्या पूजन और खीर का भोग
मासिक दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन को भी धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। मान्यता के अनुसार दो से दस वर्ष की कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोकर पूजा की जाती है। इसके बाद उन्हें खीर-पूरी, हलवा या उनकी पसंद का भोजन कराया जाता है। सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या कोई उपयोगी वस्तु भेंट करने की परंपरा भी है।
मां दुर्गा को खीर का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटना भी इस दिन की पूजा में शामिल किया जाता है।
दीपक जलाने की भी परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक दुर्गाष्टमी पर घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाया जाता है। इसी तरह तुलसी के पौधे के पास भी घी या तिल के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। ये उपाय आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से जुड़े हैं।
कुछ परंपराओं में मां दुर्गा को जल से भरा एकाक्षी नारियल अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार इसे सुख-समृद्धि की कामना से पूजा में शामिल किया जाता है।
स्थानीय पंचांग से करें तिथि की पुष्टि
अष्टमी तिथि इस बार 18 सितंबर दोपहर से शुरू होकर 19 सितंबर दोपहर तक रहेगी। चूंकि तिथि दो कैलेंडर दिनों में पड़ रही है, इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार तिथि और पूजा का समय देखना चाहिए।
News Desk Declaration / Disclaimer
घोषणा: इस खबर में दी गई पूजा तिथि, मुहूर्त और धार्मिक नियम पंचांग एवं प्रचलित धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। स्थान के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है। पूजा-अनुष्ठान से जुड़ी विशेष जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान आचार्य से पुष्टि करें। News Media Kiran किसी धार्मिक मान्यता को व्यक्तिगत या वैज्ञानिक सलाह के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
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