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UP Rajya Sabha Election: सपा का तीसरा उम्मीदवार अभी घोषित नहीं, सलीम शेरवानी के नाम पर सस्पेंस

UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने दो नाम सार्वजनिक कर दिए हैं, लेकिन तीसरे उम्मीदवार को लेकर आधिकारिक चुप्पी बनी हुई है। पार्टी ने प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को मैदान में उतारा है। दोनों ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल कर दिया है।

बुधवार की घोषणा के बाद सियासी चर्चा का केंद्र तीसरी सीट बन गया है। इस सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री सलीम इकबाल शेरवानी का नाम सबसे अधिक चल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार शेरवानी ने अखिलेश यादव से मुलाकात की और पार्टी नेतृत्व से उम्मीदवारी का आश्वासन मिलने की बात कही। पार्टी की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि तीसरे नाम पर अखिलेश बाद में फैसला कर सकते हैं। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है और मतदान 16 अक्टूबर को होना है। दस सीटों वाले इस चुनाव में सपा दो सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत मानती है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ेगा।

सपा ने कौन से दो नाम घोषित किए हैं?

समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा के लिए पहले दो प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। इनमें वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव शामिल हैं। दूसरे नाम धनराज परिमल नथवानी का है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी बताए गए हैं।

दोनों उम्मीदवारों ने अखिलेश यादव के सामने नामांकन पत्र जमा किया। इस कदम से पार्टी ने दो सीटों पर अपनी तैयारी साफ कर दी। तीसरी सीट पर अभी नाम जारी नहीं किया गया है। इसी अंतर ने राजनीतिक हलकों में अनुमान और कयास तेज कर दिए हैं।

नथवानी के चयन को कई पर्यवेक्षक अप्रत्याशित मान रहे हैं। पार्टी ने पारंपरिक चेहरे के साथ एक नया नाम जोड़कर दूसरी सीट भरी, लेकिन तीसरी सीट का फैसला बाद के लिए छोड़ दिया। इससे यह सवाल बना हुआ है कि अंतिम नाम परिचित चेहरा होगा या फिर एक और सरप्राइज आएगा।

तीसरे उम्मीदवार के रूप में सलीम शेरवानी क्यों चर्चा में हैं?

तीसरी सीट के लिए कई नामों की बात हुई, जिनमें सलीम इकबाल शेरवानी सबसे प्रमुख हैं। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। रिपोर्ट कहती है कि उन्होंने अखिलेश यादव से मुलाकात की है।

शेरवानी की ओर से यह दावा किया गया है कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें उम्मीदवार बनाने का आश्वासन दिया। यह दावा उनकी तरफ से आया है। सपा मुख्यालय या अखिलेश यादव की ओर से आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं आई है। इसलिए नाम चर्चा में है, पुष्टि में नहीं।

सूत्रों का कहना है कि अखिलेश तीसरे उम्मीदवार पर बाद में फैसला ले सकते हैं। यानी मुलाकात और आश्वासन की चर्चा के बावजूद अंतिम सूची अभी बंद नहीं मानी जा सकती। नामांकन की समय सीमा नजदीक होने के कारण यह सस्पेंस जल्द टूटेगा, ऐसा आकलन है।

यूपी राज्यसभा चुनाव की तारीखें और सपा की संख्या क्या कहती है?

UP Rajya Sabha Election: 99 वोट से कैसे बनेगा 3 सीटों का गणित? तीसरे प्रत्याशी के लिए सपा ने शुरू किया वोटों का खेलउत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। नामांकन प्रक्रिया चल रही है। उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। मतदान 16 अक्टूबर को प्रस्तावित है।

विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या के आधार पर सपा दो सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत मानती है। तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत बताई जा रही है। यही वजह है कि केवल नाम ही नहीं, समर्थन जुटाने की रणनीति भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।

राजनीतिक चर्चाओं में क्रॉस वोटिंग और अन्य दलों के विधायकों के संभावित समर्थन का जिक्र हो रहा है। ये चर्चाएं हैं, पुष्ट सौदे नहीं। तीसरे उम्मीदवार का चेहरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अतिरिक्त वोट जुटाने में नाम और समीकरण दोनों काम आ सकते हैं।

बृजभूषण सिंह को लेकर क्या कयास हैं?

सपा के तीसरे प्रत्याशी की चर्चा के समानांतर भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह के सपा में शामिल होने के अनुमान भी लगाए जा रहे हैं। कुछ संबंधित रिपोर्टों में उन्हें संभावित तीसरे नाम के रूप में भी जोड़ा गया है।

मुख्य उपलब्ध जानकारी यह स्पष्ट करती है कि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न पार्टी प्रवेश की घोषणा है, न सपा की ओर से उन्हें उम्मीदवार बनाने का ऐलान। इसलिए यह फिलहाल कयास की श्रेणी में है।

चुनावी माहौल में ऐसे अनुमान आम हैं, लेकिन नामांकन पत्र और पार्टी विज्ञप्ति ही अंतिम प्रमाण माने जाते हैं। 6 अक्टूबर तक जो नाम दाखिल होगा, वही तस्वीर साफ करेगा। उससे पहले बृजभूषण सिंह वाले कोण को अनिर्णीत ही रखना जरूरी है।

अब आगे सपा का फैसला कितना निर्णायक है?

दो नामांकन पूरे होने के बाद तीसरी सीट सपा की सबसे देखी जा रही चाल बन गई है। अगर शेरवानी को आधिकारिक टिकट मिलता है तो चर्चा सही साबित होगी। अगर नया नाम आता है तो अखिलेश एक बार फिर अप्रत्याशित फैसला लेने वाले नेता के रूप में देखे जाएंगे।

तीसरी सीट इसलिए संवेदनशील है क्योंकि पार्टी स्वयं अतिरिक्त समर्थन की जरूरत मान रही है। उम्मीदवार का चयन संदेश भी देता है और विधायकों के बीच समीकरण भी बनाता है। दो मजबूत सीटों के बाद तीसरी सीट पर जीत की संभावना इसी मिश्रण पर टिकेगी।

नामांकन की घड़ी नजदीक है। बुधवार को दो नाम आ चुके हैं। शेरवानी की मुलाकात और आश्वासन वाली बात सार्वजनिक चर्चा में है। अखिलेश के बाद में फैसला लेने वाले सूत्र भी सामने हैं। इन्हीं तथ्यों के बीच सपा तीसरा उम्मीदवार वाला सवाल उत्तर प्रदेश की सियासत का ताजा केंद्र बना हुआ है।

स्थानीय पंप की तरह यहां भी अंतिम प्रमाण कागज पर लिखा नाम ही होगा। घोषणा होने तक सलीम शेरवानी चर्चा में रहेंगे और अन्य कयास भी चलते रहेंगे। 6 अक्टूबर की समय सीमा इस सस्पेंस की स्वाभाविक समाप्ति रेखा है।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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