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Navratri 2026: 11 से 20 अक्टूबर तक खाने-पीने में क्या रखें ध्यान? जानें 9 दिनों के जरूरी नियम

Navratri 2026: शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हो रहा है। समापन 20 अक्टूबर को दशहरा के दिन होगा। पर्व माता आदिशक्ति दुर्गा को समर्पित है। भक्त घर और पंडाल में नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। व्रत केवल भोजन छोड़ना नहीं माना जाता। संयम, सात्विक आहार और शुद्ध विचार भी उसके हिस्से हैं। खान-पान के नियम क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार बदल सकते हैं। नीचे आम मान्यता का हिसाब है।

ऊर्जा बनाए रखने के लिए हल्का और पौष्टिक फलाहार लिया जाता है। गेहूं-चावल की जगह कुट्टू, सिंघाड़ा और समा चावल चलते हैं। सेंधा नमक सामान्य नमक की जगह लेता है। पानी, नारियल पानी और फलों का रस दिन भर साथ रखें।

नवरात्र व्रत में कौन से अनाज और सब्जी चलते हैं?

सामान्य गेहूं और चावल नहीं लिए जाते। जगह कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा, अरवा और समा के चावल यानी मोरधन चलते हैं। सब्जियों में आलू, शकरकंद, लौकी, कद्दू, अरबी, गाजर और खीरा शामिल माने जाते हैं। ये हल्के और सात्विक विकल्प हैं। तली हुई भारी सब्जी से बचना बेहतर है, भले सब्जी सूची में हो।

दूध, मेवे और फल कैसे ऊर्जा देते हैं?

दूध, दही, पनीर, छाछ और देसी घी शरीर को ऊर्जा व पोषण देते हैं। मखाना, बादाम, काजू, किशमिश और मूंगफली नाश्ते या फलाहारी व्यंजन में आते हैं। फल में सेब, केला, अनार, पपीता और मौसमी फल चलते हैं। नारियल पानी, नींबू पानी, शरबत और फलों का जूस पानी की कमी रोकते हैं। पर्याप्त पानी अलग से पिएं।

नमक की जगह सेंधा नमक है। मसालों में जीरा, काली मिर्च, हरी मिर्च, हरा धनिया और अदरक लिए जा सकते हैं। साधारण टेबल सॉल्ट व्रत में नहीं चलता।

किन चीजों से परहेज रखा जाता है?

गेहूं, चावल, सूजी, मैदा, बेसन और दालें व्रत में नहीं ली जातीं। तामसिक मानी जाने वाली चीजें—प्याज, लहसुन, शराब, मांस, मछली और अंडे—से परहेज है। बाजार के चिप्स, बहुत तला-भुना खाना, मीठे पेय और ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी बेहतर नहीं माने जाते। परिवार की परंपरा अलग हो तो वही मानें।

नौ दिनों की दिनचर्या में क्या ध्यान रखें?

शांत रहें और झगड़े से बचें। मन पूजा-पाठ में लगाएं। रोज स्नान करें, साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह साफ रखें। मान्यता है कि नवरात्र में बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए। दिन में सोने के बजाय पूजा, ध्यान या धार्मिक काम में समय बिताने की सलाह दी जाती है। घर का माहौल सकारात्मक रखें। कुछ लोग चमड़े की चीजें भी नहीं इस्तेमाल करते।

क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या सामान दान किया जा सकता है। व्रत का फल संयम और दान दोनों से जुड़ा बताया जाता है।

शारदीय नवरात्र की तारीखें क्या हैं?

आरंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार है। समापन 20 अक्टूबर को दशहरा पर होगा। नौ दिनों में माता के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। व्रत पूरा करने के लिए खान-पान की सूची पहले दिन से तय कर लें, ताकि कुट्टू, सिंघाड़ा, सेंधा नमक और फल घर में रहें। नियम क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं। अपनी परंपरा और पंडित की सलाह अंतिम मानें।

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Netsha Singh
Author: Netsha Singh

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